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मध्यांतर : मध्य प्रदेश में तेज हुई …नरम और गरम, हिंदुत्व की लड़ाई

प्रमोद भार्गव।  खरगोन में हुए सांप्रदायिक दंगों के दो सप्ताह बाद भी भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी जंग जारी है। इसमें नाटकीय मोड़ नरम और गरम हिंदुत्व को लेकर सामने आ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जहां पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर मस्जिद में भगवा झंडे फहराए जाने की पोस्ट को लेकर आपत्ति जताई है, वहीं मध्यप्रदेश के दमोह से कांग्रेस विधायक अजय टंडन ने शिवराज सरकार की ओर से फिर से शुरू की गई मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत तीर्थयत्रियों से भरी रेल को हरी झंडी दिखाकर सरकार की तारीफ की है। दूसरी तरफ टंडन ने कमलनाथ के १५ महीने के कार्यकाल में इस योजना को बंद करने की आलोचना की है। इस तारीफ और निंदा से यह आशंका जोर पकड़ रही है कि कहीं अजय टंडन भाजपा की पगडंडी न पकड़ लें? यह आशंका इसलिए भी है क्योंकि कुछ दिन पहले शहरी विकास मंत्री भूपेंद्र सिंह ने बड़ा दावा करते हुए कहा था कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस के कई विधायक भाजपा में शामिल होने के लिए दस्तक दे रहे हैं। दरअसल भाजपा में कट्टर हिंदुत्व की कतार में गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा आ खड़े हुए हैं। वे कट्टर हिंदुत्व से जुड़े हरेक मुद्दे पर बेबाक एवं तल्ख टिप्पणी मीडिया और कांग्रेस को बतौर उत्तर दे रहे हैं।
याद रहे दिग्विजय सिंह पर आपत्तिजनक पोस्ट के सिलसिले में एफआईआर भी दर्ज की जा चुकी है। जो पोस्ट सोशल मीडिया पर डाली गई थी, वह मध्यप्रदेश की न होकर बिहार की मुजफ्फरपुर मस्जिद की थी। इस पोस्ट व ट्वीट को अशांति पैâलाने का कारण मानते हुए नरोत्तम मिश्रा ने तत्काल सिंह के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दे दिए थे। सूत्र बताते हैं कि बीते हफ्ते कमलनाथ ने सोनिया गांधी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात में उन्होंने दिग्विजय सिंह की इस पोस्ट की भी चर्चा करते हुए भविष्य में मध्यप्रदेश में नरम हिंदुत्व पकड़ने की सलाह दी है। याद रहे २०१८ के विधानसभा चुनाव में नरम हिंदुत्व के सहारे ही कांग्रेस बहुमत के करीब पहुंचकर सत्ता पर काबिज हुई थी। लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया की बगावत ने बना-बनाया काम सवा साल के भीतर ही बिगाड़ दिया था। अब इन्हीं सिंधिया को भाजपा ने दिग्विजय के गृह नगर राघोगढ़ और राजगढ़ में सिंह व उनके बेटे जयवर्धन सिंह को पटकनी देने की जिम्मेवारी सौंप दी है। दिग्विजय और सिंधिया परिवार में अदावत परतंत्र भारत के समय से ही चली आ रही है। पटकनी देने की मुहिम को आगे बढ़ाने की दृष्टि से हाल ही में सिंधिया ने इस क्षेत्र का दौरा भी किया है। इस चाल को नरोत्तम मिश्रा की कूटनीति का परिणाम माना जा रहा है।
वैसे नरोत्तम मिश्रा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के संकटमोचक माने जाते रहे है। वे चुनावी प्रबंधन में कुशल होने के साथ सर्वप्रिय व सर्वस्वीकार नेता भी माने जाते हैं। खरगोन दंगों के बाद उन्होंने हिंदुत्व और हिंदुत्ववादियों के सरंक्षण को लेकर जो तेज दिखाई है, उससे उनका भाजपा और संघ में कद बढ़ा है और ऐसा माना जा रहा है कि प्रदेश भाजपा उनमें भविष्य का नेतृत्व तलाश रही है। इस परीक्षा में खरा उतरने के लिए ही मिश्रा योगी आदित्यनाथ की तर्ज पर उग्र हिंदुत्व के पैरोकार बनते दिखाई दे रहे है। शिवराज के चौथे कार्यकाल और सिंधिया के भाजपा में आने के बाद नरोत्तम का व्यक्तित्व कुछ दबा सा अनुभव हो रहा था। इस लिहाज से वे हिंदुत्ववादी मुद्दों पर कम और गृह मंत्री होने के नाते कानून-व्यवस्था पर ज्यादा बात करते थे। अपने विधानसभा क्षेत्र दतिया में किए गए उल्लेखनीय विकास कार्यों को बताना भी वे नहीं भूलते थे। इसमें कोई दो राय नहीं कि दतिया विधायक बनने के बाद उन्होंने दतिया जिले में जितने विकास कार्य किए हैं, उतने कार्य ग्वालियर-चंबल अंचल में कोई दूसरा विधायक अंजाम तक नहीं पहुंचा पाया है।
नतीजतन मिश्रा ऐसे किसी अवसर पर तीखी प्रतिक्रिया देने से नहीं चूकते हैं, जो उनकी कट्टर हिंदुत्ववादी की छवि बनाने का काम करे। हाल ही में मिश्रा के गृहनगर डबरा में नाम बदलकर शादी करने, युवती का जबरन धर्मांतरण कराने और दुष्कर्म के आरोपी इमरान का मामला सामने आया है। इमरान ने राजू जाटव बनकर ग्वालियर की युवती से लव जिहाद किया और शीतला माता मंदिर पर जाकर शादी कर ली। शादी के बाद डबरा अपने घर आया। यहां आकर युवती को राजू के मुसलमान होने का पता चला। मौलाना ओसामा और इमरान के परिजन ने जबरन उसका धर्मांतरण कराकर निकाह भी करा दिया। लेकिन युवती ने किसी तरह भागकर रिपोर्ट दर्ज कराई। इस मामले की खबर जब मिश्रा को मिली तो उन्होंने तत्काल इमरान का घर ढहाने के निर्देश दिए और मामले की जांच एएसपी अमित सांघी को सौंपकर सभी संबंधित आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। खरगोन में जो बुलडोजर थम गया था उसका पहिया डबरा में इमरान के मकान पर चढ़ गया।
मिश्रा ओटीटी पर रिलीज हुई वेब सीरीज तांडव में जिस प्रकार से हिंदू धर्म की भावनाओं का मखौल उड़ाया गया है, उसकी उन्होंने निंदा तो की ही साथ ही २१ जनवरी २०२१ को मध्यप्रदेश सरकार ने एफआईआर भी दर्ज करा दी थी। इंदौर में एक चूड़ीवाला अपना धर्म छिपाकर हिंदू बस्तियों में चूड़ियां बेचता था। एक दिन उसकी असलियत सामने आ गई। इस पर हिंदू महिलाओं और पुरुषों ने आपत्ति जताई और ३ अगस्त २०२१ को एफआईआर भी दर्ज करा दी। इस मामले को जब तूल दिया गया, तब मिश्रा ने कहा कि उसने अपना धर्म क्यों छिपाया? सही नाम से घूमे, जहां भी घूमना है। कौन रोकता है? उसे जवाब देना होगा कि ऐसा क्यों किया? वेब सीरीज आश्रम पर भी तीखी टिप्पणी करते हुए मिश्रा ने कहा था, आश्रम नाम क्यों? सीरीज बनाने वाले हिंदू भावनाओं को आखिर आहत करने वाले दृश्य क्यों फिल्माते हैं। हिम्मत है तो ऐसा दूसरे धर्म के बारे में करके बताओ। करवा चौथ पर फेम क्रीम ब्लीच एड पर भी चेतावनी देते हुए मिश्रा ने कंपनी को आगाह किया था कि हिंदू धर्म के धार्मिक त्योहारों को लेकर ही विज्ञापन क्यों जारी किए जाते हैं? ये आपत्तिजनक है। कंपनी ने विज्ञापन वापस नहीं लिया तो वैधानिक कार्यवाही की जाएगी। आखिरकार विज्ञापन वापस ले लिया गया।
हालांकि नरोत्तम मिश्रा सांप्रदायिक सौहार्द के पक्षधर रहे हैं। लेकिन कुछ समय से उनका रुख बदला-बदला दिखाई दे रहा है। राजनीति के विश्लेषकों का ऐसा मानना है कि मिश्रा कट्टर हिंदुत्व की जो छवि गढ़ने में लगे हैं, वह उनकी सुनियोजित रणनीति है। कमलनाथ के नरम हिंदुत्व और दिग्विजय की कट्टर मुस्लिम पक्षधरता को ऐसे ही कट्टर हिंदुत्व से २०२३ के विधानसभा चुनाव में पराजय का मजा चखाया जा सकता है। इसीलिए इंदौर में देखने में आया है कि जब हिंदवी स्वराज के कार्यकर्ताओं ने खेड़ापति हनुमान मंदिर में लाउडस्पीकर से पांच बार हनुमान चालीसा का पाठ किया तो कुछ कांग्रेसियों ने इसका विरोध किया। किंतु कांग्रेस के पूर्व मंत्री और मीडिया प्रभारी जीतू पटवारी ने यह कहकर कांग्रेस के मुद्दे को ठंडा कर दिया कि हनुमान चालीसा के पाठ पर कोई आपत्ति नहीं होना चाहिए। इधर खरगोन जिले में देखने में आ रहा है कि खरगोन नगर से लेकर ग्रामों तक हिंदू समाज विधर्मियों की दुकानों से सामान नहीं खरीदने की मुहिम चला रहे हैं। साथ ही इस संकल्प को भगवान महाकाल से पूरा करने की प्रार्थना भी कर रहे हैं। इस अभियान का असर खरगोन के सीमावर्ती जिले खंडवा, बड़वानी, बुरहानपुर और इंदौर में भी देखने में आ रहा है। साफ है, नरम और गरम हिंदुत्व की लड़ाई अभी और तेज होगी ?
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।)
(उपरोक्त आलेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं। अखबार इससे सहमत हो यह जरूरी नहीं है।)

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