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मध्यांतर: शिवराज को छिंदवाड़ा लोकसभा सीट पर उतारने का दांव!

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चुनाव परिणाम आने और १६३ विधानसभा सीटें जीतने के बाद कहते रहे हैं कि मुझे लोकसभा की २९ सीटें जीतकर प्रधानमंत्री मोदी के गले में माला डालनी है, इसलिए मैं दिल्ली किसी पद की मांग के लिए बिना बुलाए नहीं जाऊंगा। हम जानते हैं कि वे दिल्ली गए भी नहीं थे। संभव है पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने इसे शिवराज का अहंकार माना हो और इसे ठंडा करने के लिए, उनकी बजाय मोहन यादव को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठा दिया हो? लेकिन अब पुष्ट सूत्रों से ऐसी खबरें आ रहीं हैं कि शिवराज को छिंदवाड़ा लोकसभा सीट का प्रत्याशी बनाया जा सकता है, जिससे मध्य प्रदेश की सभी २९ लोकसभा सीटों पर भाजपा के काबिज होने की संभावना बढ़ जाए। फिलहाल, यहां से पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के पुत्र नकुलनाथ सांसद हैं। कांग्रेस के पास मध्य प्रदेश में एकमात्र यही अभिजीत सीट रह गई है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस में आने से पहले गुना-शिवपुरी सीट भी कांग्रेस के खाते में शामिल हो जाती थी। लेकिन २०१९ के लोकसभा चुनाव में सिंधिया अपने ही नुमाइंदे भाजपा प्रत्याशी केपी यादव से पराजित हो गए थे। इस पराजय से सिंधिया इतने आहत हुए कि भाजपा के शरणम्-गच्छामि हो गए। अब वे केंद्रीय मंत्री होने के साथ भाजपा के ताकतवर नेताओं में गिने जाते हैं।
हालांकि, कमलनाथ या नकुलनाथ से छिंदवाड़ा सीट छीनना आसान नहीं है, क्योंकि इस जिले की सातों विधानसभा सीटों पर २०२३ के विधानचुनाव में कांग्रेस ने परचम फहराया हुआ है। इसके पहले २०१८ में भी कमलनाथ के प्रभाव के चलते सभी सातों सीटों पर विजय हासिल की थी। छिंदवाड़ा में कांग्रेस ने भाजपा उम्मीदवार विवेक बंटी साहू को लगभग ३७ हजार वोटों से करारी शिकस्त दी है। इसी तरह अमरवाड़ा से गोंडवाना छोड़ कर आई मोनिका शाह बट्टी को कांग्रेस प्रत्याशी और कांग्रेस से ही दो बार विधायक रहे कमलेश शाह ने लगभग २५ हजार मतों से हराकर तीसरी बार जीत का इतिहास रच दिया है। जुन्नारदेव से कांग्रेस के सुनील उईके ने भाजपा के नत्थन शाह कवडेती को करीब ३ हजार मतों से शिकस्त दी है। परासिया विधानसभा सीट से कांग्रेस के सोहन वाल्मीकि ने भाजपा उम्मीदवार ज्योति डेहरिया को १,७०० से ज्यादा वोटों से पराजय का स्वाद चखा दिया है। सोंसर में कांग्रेस उम्मीदवार विजय चैरे ने भाजपा के नाना मोहोड़ को करीब ११ हजार मतों से पराजय का मुख दिखाया है। इसी तरह पांढुर्णा में कांग्रेस प्रत्याशी नीलेश उईके ने भाजपा प्रत्याशी प्रकाश उईके को १० हजार से भी अधिक वोटों से करारी शिकस्त दी है। चैरई में कांग्रेस के सुजीत चौधरी ने भाजपा प्रत्याशी लखन वर्मा को करीब ८ हजार वोटों से पराजित किया है। साफ है भाजपा की लहर छिंदवाड़ा जिले में कोई सेंध नहीं लगा पाई, जबकि छिंदवाड़ा में भाजपा की जीत के लिए शिवराज सिंह चौहान ने पांढुर्णा को जिला भी बना दिया था। इस जिले के निर्माण के बाद मध्य प्रदेश में कुल जिलों की संख्या ५५ हो गई है।
छिंदवाड़ा जिले का चुनाव परिणाम सामने आने के बाद से भाजपा के चुनावी रणनीतिकार इस कोशिश में लग गए हैं कि क्यों न यहां से शिवराज सिंह चौहान को मैदान में उतार दिया जाए। यदि कांग्रेस छिंदवाड़ा के वर्तमान सांसद नकुलनाथ को ही फिर से मैदान में उतारती है, तो शिवराज सिंह चौहान की जीत आसान हो सकती है। क्योंकि नकुलनाथ इस सीट से अत्यंत मामूली अंतर ३७,५३६ मतों से बमुश्किल जीत पाए थे। दरअसल, कमलनाथ के २०१८ में मुख्यमंत्री बनने के बाद यह सीट उनके बेटे के हिस्से में आई हुई है। यहां से भाजपा ने नत्थन शाह को मैदान में उतारा था। अब नत्थन शाह विधानसभा का चुनाव भी हार गए हैं। छिंदवाड़ा लोकसभा सीट की यह खासियत रही है कि आजादी के बाद से लगातार यह सीट कांग्रेस जीतती रही हैं इसलिए भाजपा शिवराज सिंह चौहान को दांव पर लगाना चाहती हैं।
शिवराज सिंह को दांव पर लगाने के कई मायने निकाले जा रहे हैं, एक तो यह कि यदि शिवराज सिंह चौहान जीत जाते हैं तो प्रदेश की सभी २९ सीटों पर भाजपा अपना परचम फहराने में सफल हो सकती है? हालांकि, कमलनाथ के प्रभाव के चलते सीट जीतना शिवराज सिंह चौहान को आसान नहीं होगा। ऐसे में यदि शिवराज के मुकाबले में स्वयं कमलनाथ छिंदवाड़ा से लोकसभा उम्मीदवार बन जाते हैं तो शिवराज की जीत और कठिन हो जाएगी। बहरहाल, यदि शिवराज हार जाते हैं तो उनकी बोलती और हेकड़ी दोनों ही बंद हो जाएगी। क्योंकि आज कल शिवराज तो शिवराज उनके पुत्र कार्तिकेय भी कुछ ज्यादा ही बोलने लगे हैं। हाल ही में कार्तिकेय का एक बड़ा बयान आया है। सीहोर में १२ जनवरी को कार्तिकेय ने भेंरूदा के कोसमी में विकसित भारत संकल्प यात्रा के दौरान जनता को संबोधित करते हुए कहा कि यदि आपसे किए गए वादे निभाने के लिए अगर अपनी सरकार से भी लड़ना पड़े तो कार्तिकेय चौहान तैयार है। हालांकि, मैं नेता नहीं हूं, मेरा राजनीति में आने की कोई मंशा भी नहीं है। लेकिन यहां पापा शिवराज नहीं मैं आपसे वोट मांगने आया था। अतएव सरकार ने वादे पूरे नहीं किए तो मुझे सरकार से भी लड़ना पड़ा तो इस लड़ाई में कार्तिकेय पीछे नहीं हटेगा।
शिवराज सिंह चौहान और उनके पुत्र के प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़ा करने वाले बयान अब सरकार समेत भाजपा नेतृत्व को भी खटकने लगे हैं। इसलिए भाजपा संगठन और संघ चाहता है कि शिवराज को छिंदवाड़ा से लोकसभा का उम्मीदवार बना दिया जाए। ऐसा होने पर भाजपा के लिए शिवराज सिंह चौहान की जीत हो या हार, दोनों ही स्थितियां अनुकूल रहेंगी। शिवराज सिंह यदि जीतते हैं तो प्रदेश की सभी सीटों पर भाजपा का कब्जा हो जाएगा और यदि शिवराज सिंह हारते हैं तो उनकी गति दोई गए पांडे, हलुआ मिले न मांडे, जैसी हो जाएगी।

प्रमोद भार्गव
शिवपुरी (मध्य प्रदेश)
(लेखक, वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार हैं।)

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