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मध्यांतर :  मध्य प्रदेश में चढ़ा चुनावी पारा, नेताओं की बदली जुबानी धारा!

प्रमोद भार्गव
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लगभग १० महीने शेष बचे हैं। ऐसे में प्रदेश के दोनों प्रमुख दलों के नेताओं में जुबानी जंग तेज हो गई है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ जहां आक्रामक दिखाई दे रहे हैं, वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शालीनता का आवरण ओढ़ लिया है। हाल ही में टीकमगढ़ में पत्रकारों से बातचीत में सिंधिया के संदर्भ में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कमलनाथ ने ज्योतिरादित्य पर तीखा हमला बोलकर उनके राजनैतिक महत्व को सिरे से नकारते हुए, उनकी लोकप्रियता पर सवाल खड़ा कर दिया। कमलनाथ ने कहा कि सिंधिया वाकई यदि इतनी बड़ी तोप थे तो भाजपा ग्वालियार-मुरैना में महापौर का चुनाव क्यों हारी? हमें सिंधिया जैसे नेताओं की जरूरत ही नहीं है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल हुए निकाय चुनाव में सिंधिया के प्रचार के बावजूद ग्वालियर और मुरैना दोनों ही जगह भाजपा चुनाव हार गई थी। सिंधिया कमलनाथ के इस हमले पर बचते दिखाई दिए। उन्होंने एक ट्वीट में कहा कि अच्छा हुआ आपकी तोप की परिभाषा में मैं फिट नहीं हुआ। सिंधिया ने कमलनाथ की १५ महीने की सरकार के किए कार्यों का रिकॉर्ड उद्घाटित करते हुए कहा कि इस १५ महीने की सरकार में तबादला, उद्योग, वादाखिलाफी, भ्रष्टाचार और माफिया राज चरम पर था। इधर राजधानी भोपाल में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के दफ्तर में कमलनाथ द्वारा ली गई कांग्रेस प्रकोष्ठ के अध्यक्षों की बैठक में भी कमलनाथ के तेवर तल्ख थे। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि भाजपा पांच फरवरी से जो विकास यात्राएं शुरू कर रही है, वह फ्राॅड  है। इस फर्जीवाड़े का जिक्र उन्होंने टीकमगढ़ की आमसभा में भी किया। कमलनाथ बोले कि मध्य प्रदेश में भाजपा सिर्फ ध्यान भटकाने की राजनीति वर्तमान में कर रही है। पहले भाजपा जनता को ज्ञान देती थी, लेकिन अब जनता सब जान गई है और भाजपा को ही ज्ञान दे रही है। बीते १८ साल में मुख्यमंत्री रहते हुए शिवराज सिंह ने बीस हजार घोषणाएं की हैं। अगले सात महीने और लोगों को गुमराह कर लें, इसके बाद जनता उन्हें जवाब देगी। मुझे मतदाताओं पर पूरा भरोसा है कि वे सही पैâसला करेंगे और भाजपा को १८ साल का हिसाब दे देंगे। साफ है, कमलनाथ यह भरोसा जता रहे हैं कि चुनाव के बाद भाजपा की हार और उनका मुख्यमंत्री बनना तय है।
कमलनाथ की इस आक्रामकता का माकूल जवाब शिवराज मंत्रिमंडल में केवल गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ही दे पा रहे हैं। उन्होंने कमलनाथ पर तंज कसते हुए कहा कि कमलनाथ की बैठकों ने पूरी कांग्रेस बिठा दी है। मेरा मानना है कि कांग्रेस अब खड़े होने की स्थिति में नहीं रह गई है। खुद कमलनाथ क्षेत्र में नहीं जाते हैं। महीने में एकाध मर्तबा कोई बैठक कर लेते हैं, जबकि भाजपा चुनावी अभियान पर चल पड़ी है। कमलनाथ को जनता की याद आती है तो वे चुनावी पर्यटन पर निकल जाते हैं। प्रदेश की जनता अब कांग्रेस के भ्रमजाल में आने वाली नहीं है इसलिए ये किसी अंजाम तक पहुंचने वाले नहीं है। इनके चक्कर में पूरी कांग्रेस जनता के बीच जाने की बजाय घर बैठे-बैठे ट्वीट करने को ही अपना कर्तव्य मानकर चल रही है इसलिए कांग्रेस की उपयोगिता खत्म हो रही है। इसमें कोई दो राय नहीं कि चुनाव में मतदाता किसे चुनते हैं। लेकिन सिंधिया के कांग्रेस से बाहर जाने के बाद ३४ विधानसभा सीट वाले ग्वालियर-चंबल अंचल में सिंधिया कोई बहुत बड़ा गुल खिला पाएंगे, ऐसा लगता नहीं है। इसीलिए कांग्रेस जहां भी सिंधिया कमजोर दिखते हैं, वहां चोट करने से नहीं चूक रही है। कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष केके मिश्रा सिंधिया की स्थितियों से जुड़े उन बिंदुओं को गहरा कटाक्ष करते हुए सामने ला रहे हैं, जिनसे सिंधिया का क्षेत्र में असर क्षीण नजर आए। हाल ही में दिल्ली में भाजपा कार्यकारिणी की बैठक संपन्न हुई है। इस बैठक में सिंधिया सबसे अंतिम पंक्ति में बैठे नजर आए। इससे पता चलता है कि भाजपा में सिंधिया की क्या हैसियत है। केके मिश्रा ने इस चित्र को साझा करते हुए, इस चित्र के साथ एक और तस्वीर लगाई है, जिसमें सिंधिया कांग्रेस में मजबूत हैसियत वाले नेता दिखाई दे रहे हैं। केके मिश्रा ने इन चित्रों को वैâप्शन दिया है, टाइगर तब और अब। मिश्रा ने एक शेर का उदाहरण देते हुए लिखा कि ‘उसूलों पर जहां आंच आए, वहां टकराना जरूरी है। जिंदा हो तो फिर, जिंदा नजर आना भी जरूरी है।’ यह शेर सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ने के बाद अपने एक भाषण में बोला था, किंतु अब उनकी बोलती बंद है।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को विश्वास है कि एक बार फिर से मतदाता उनके सिर पर सत्ता का मुकुट रखने की मानसिकता बना रहे हैं। इस उद्देश्य के पोस्टर भी नए साल के दिन कांग्रेस ने जारी किए थे। चूंकि कमलनाथ प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और कांग्रेस की कमान वर्तमान में उन्हीं के हाथों है इसलिए कमलनाथ को पोस्टरों में भावी मुख्यमंत्री दर्शाना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। लेकिन हैरानी इसलिए है कि जो कांग्रेस २०१८ के विधानसभा चुनाव में दिग्विजय और सिंधिया के गुटों में जबरदस्त तरीके से बंटी दिखाई दे रही थी, वह अब पूरे प्रदेश में एक सूत्र में बंधी दिखाई दे रही है इसीलिए कमलनाथ के इन पोस्टरों के चस्पां किए जाने के बाद आज तक कांग्रेस में कोई विरोधी स्वर सुनाई नहीं दिया है। यही नहीं सोशल मीडिया पर भी मध्य प्रदेश के मानचित्र में नववर्ष २०२३ की मंगल कामनाओं के साथ लिखा है ‘नया साल नई सरकार मिटेगा अंधकार, आ रही है कमलनाथ सरकार।’ विज्ञापननुमा इस पोस्टर पर प्रदेश कांग्रेस के तीन प्रमुख पदाधिकारियों चंद्रप्रभास शेखर, प्रकाश जैन और राजीव सिंह के नाम हैं। इन्होंने ही एक जनवरी को पत्रकार वार्ता बुलाकर संकल्प दिवस मनाने की घोषणा करते हुए, कमलनाथ को प्रदेश का भावी मुख्यमंत्री बनने का एलान भी कर दिया है। कमलनाथ के निर्विवाद नेतृत्व को लेकर समूची कांग्रेस आश्वस्त है कि अगली सरकार उन्हीं की बनेगी। हालांकि, प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इन पोस्टरों पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि जो कमलनाथ बनी बनाई सरकार नहीं बचा पाए, वे नई सरकार कैसे बना पाएंगे?
दरअसल, कांग्रेस यह मानकर चल रही है कि २०१८ के चुनाव में उसे जिस तरीके से जीत मिली थी, उसी तरीके को फिर से अमल में लाया जाए। वर्ष २०१८ में कांग्रेस ने घोषणा-पत्र की बजाय वचन-पत्र जारी किया था। इसका आशय था कि कांग्रेस घोषणा नहीं कर रही है, बल्कि विकास कार्य करने का लिखित वचन दे रही है। हमारे यहां ‘प्राण जाए पर वचन न जाए’ की कहावत भी प्रचलन में है। इस वचन-पत्र की तैयारी में पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा जुटे हैं। इस वचन-पत्र के साथ कांग्रेस आरोप-पत्र भी लाएगी। इस पत्र के जरिए सत्तारूढ़ भाजपा को घेरने का काम कांग्रेस करेगी। वर्मा ही इस आरोप-पत्र को तैयार करने में लगे है। वर्मा का कहना है कि जितना वचन-पत्र जरूरी है, उतना ही आरोप-पत्र भी जरूरी है। जहां वचन-पत्र में सरकार बनने पर कांग्रेस क्या-क्या काम करेगी, उन्हें रेखांकित किया जाएगा, वहीं आरोप-पत्र में भाजपा की वादाखिलाफी उजागर करेंगे। भाजपा सरकार ने जो सपने जनता, नौजवानों और किसानों को दिखाए थे, वे कैसे टूटे-यह खुलासा आरोप-पत्र में किया जाएगा। इसके अलावा प्रदेश में शराबबंदी कैसे की जाए, इसकी तैयारी भी कांग्रेस कर रही है। साफ है, कांग्रेस के ये दोनों पत्र प्रामाणिक ढंग से सामने आए तो भाजपा के सामने मुश्किलें पेश आएंगी।
(लेखक, साहित्यकार एवं वरिष्ठ पत्रकार है।)
(उपरोक्त आलेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं। अखबार इससे सहमत हो यह जरूरी नहीं है।)

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