मुख्यपृष्ठस्तंभमध्यांतर : राज्यसभा में युवाओं को लाने की तैयारी

मध्यांतर : राज्यसभा में युवाओं को लाने की तैयारी

प्रमोद भार्गव
शिवपुरी (मध्य प्रदेश)

प्रदेश से राज्यसभा में सदस्य भेजने के लिए कांग्रेस अनुसूचित जाति (एससी) विभाग के सम्मेलन में इस सीट पर इस वर्ग के उम्मीदवार को भेजने की मांग पुरजोर तरीके से उठी है। इस मोर्चे के राष्ट्रीय संयोजक हेमंत नरवरे ने कहा है कि भाजपा ने एससी वर्ग की सुमित्रा बाल्मीक को राज्यसभा में भेजा हुआ है। इसे एक उदाहरण मानते हुए कांग्रेस को भी एससी नेतृत्व विकसित करने के लिए इस वर्ग का उम्मीदवार घोषित करने की जरूरत है। इस वर्ग में प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा और विजयलक्ष्मी साधो दावेदार हो सकते हैं। इसके अलावा पिछड़े वर्ग से जीतू पटवारी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव भी चर्चा में हैं।

निर्वाचन आयोग द्वारा राज्यसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही कांग्रेस और भाजपा में प्रत्याशी तलाशने की तैयारी शुरू हो गई है। विधानसभा सीटों के गणित के अनुसार, कांग्रेस को एक और भाजपा को चार सीटें मिलना तय माना जा रहा है। इस समय २३० सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास १६३ और कांग्रेस के पास ६६ विधायक हैं। पांच सीटों के लिए चुनाव होना है। निर्धारित फॉर्मूला के अनुसार, ३९ विधायक एक सदस्य को चुनेंगे। इस हिसाब से भाजपा को चार और कांग्रेस को एक सीट पर निर्विरोध जीत मिल सकती है। भाजपा जहां लोकसभा चुनाव की दृष्टि से जातीय और वर्ग के आधार पर प्रत्याशी तय करेगी, वहीं कांग्रेस भी पिछड़े वर्ग का उम्मीदवार मैदान में ला सकती है। चूंकि भाजपा में केंद्रीय नेतृत्व नाम तय करेगा। इसलिए कानों-कान यह अनुमान लगाना मुश्किल है कौन-कौन संभावित प्रत्याशी हो सकते हैं? कोई भी प्रत्याशी केंद्रीय नेतृत्व के भय से टिकट की मांग भी नहीं कर रहा, लेकिन कांग्रेस में ऐसी स्थिति नहीं है।
विधानसभा चुनाव में पराजित हुए कांग्रेस को एक-एक कदम फूंक-फूंककर रखने की जरूरत है। इस हार के बाद कमलनाथ और दिग्विजय सिंह निर्णायक भूमिका में नहीं रह गए है। गोया, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी अहम भूमिका में रहेंगे। प्रदेश से राज्यसभा में सदस्य भेजने के लिए कांग्रेस अनुसूचित जाति (एससी) विभाग के सम्मेलन में इस सीट पर इस वर्ग के उम्मीदवार को भेजने की मांग पुरजोर तरीके से उठी है। इस मोर्चे के राष्ट्रीय संयोजक हेमंत नरवरे ने कहा है कि भाजपा ने एससी वर्ग की सुमित्रा बाल्मीक को राज्यसभा में भेजा हुआ है। इसे एक उदाहरण मानते हुए कांग्रेस को भी एससी नेतृत्व विकसित करने के लिए इस वर्ग का उम्मीदवार घोषित करने की जरूरत है। इस वर्ग में प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा और विजयलक्ष्मी साधो दावेदार हो सकते हैं। इसके अलावा पिछड़े वर्ग से जीतू पटवारी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव भी चर्चा में हैं।
यदि कांग्रेस भविष्य के लिए सक्रियता दिखाती है तो उसे जीतू पटवारी को राज्यसभा सदस्य बनाने की पहल करनी चाहिए। क्योंकि पटवारी विधानसभा का चुनाव हार गए हैं और उनके पास कोई अन्य पद भी नहीं है। कांग्रेस पूर्व में लोकसभा या राज्यसभा सदस्यों को प्रदेश अध्यक्ष बनाती रही है। दरअसल संवैधानिक पद पर रहने से व्यक्ति की एक गरिमा बनती है और उसे सरकारी सुविधाएं भी मिलने लग जाती हैं। इस स्टेटस के चलते अध्यक्ष की किसी समस्या के निराकरण की मांग को प्रशासन भी गंभीरता से लेता है। प्रदेश अध्यक्ष संसद सत्र में समस्याओं को उठाकर जनभावनाओं को भी पार्टी के अनुकूल कर सकता है। अतएव कांग्रेस पटवारी को उम्मीदवार बनाती है तो उन्हें मध्य प्रदेश में पार्टी की पुनर्स्थापना करने में मदद मिलेगी। चूंकि पटवारी एक जुझारू और बोलने वाले नेता हैं, इसलिए उन्हें कोई मंच और गरिमापूर्ण पद मिलता है तो वे भाजपा पर तल्ख प्रहार करने में सफल दिखाई दे सकते हैं। फिलहाल, कांग्रेस के राजमणि पटेल राज्यसभा सदस्य हैं। यही सीट रिक्त हो रही है।
भाजपा को जिन चार सीटों पर उम्मीदवार उतारने हैं, उनमें वह ऐसे उम्मीदवार उतारने की कोशिश में है, जिससे पार्टी को चुनाव में लाभ मिले। उसका प्रयास यह भी है कि प्रत्याशी चयन के बाद कोई जनप्रतिनिधि या वर्ग नाराज नहीं होने पाए। नतीजतन, भाजपा का जोर जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण में संतुलन बिठाने का रहेगा। भाजपा विधानसभा चुनाव में पराजित या फिर नाराज नेता को भी मौका दे सकती है। लेकिन उसकी प्रमुख कोशिश नए चेहरे लाकर पार्टी को सशक्त करना है। भाजपा के वर्तमान राज्यसभा सदस्य अजय प्रताप सिंह, वैâलाश सोनी, धर्मेंद्र प्रधान और डॉ. एल मुरुगन का कार्यकाल मार्च २०२४ में पूरा हो रहा है। भाजपा दो सीटों पर नए चेहरे भी सामने ला सकती है। पार्टी यह प्रयोग पहले भी कर चुकी है। इस नजरिए से बड़वानी के कॉलेज में प्राध्यापक रहे सुमेर सिंह सोलंकी और इससे पहले संपतिया उईके को राज्यसभा में भेजने का प्रयोग कर चुकी है। इसके अलावा पार्टी राज्यसभा सदस्यों को लोकसभा चुनाव में भी उतार सकती है। इनमें ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम प्रमुख है। सिंधिया को ग्वालियर या गुना-शिवपुरी से उम्मीदवार बनाया जा सकता है। दोनों ही सीटें उनके लिए सुरक्षित हैं। हालांकि, कांग्रेस में रहते हुए गुना सीट से सिंधिया चुनाव हार गए थे।
इसी तरह धर्मेंद्र प्रधान को भी भाजपा ओडिशा से लोकसभा का चुनाव लड़ा सकती है। वैसे भी भाजपा की नजर अब ओडिशा पर है, क्योंकि वहां नवीन पटनायक लगातार २५ साल से मुख्यमंत्री हैं और जनता बदलाव का मन बना रही है। पटनायक के साथ संकट यह भी है कि वे अपनी पार्टी में सेकेंड लाइन खड़ी नहीं कर पाए हैं। ७५ साल के हो जाने के कारण उनकी राजनीतिक पारी समापन की ओर जाती दिखाई दे रही है। चूंकि उनका कोई पारिवारिक उत्तराधिकारी नहीं है, इसलिए पटनायक एक आईएस को अपना राजनैतिक उत्तराधिकारी बनाने की कोशिश में है। भाजपा इसे कमजोर कड़ी मानते हुए धर्मेंद्र प्रधान को ओडिशा का भावी मुख्यमंत्री बना देने का अवसर तलाश रही है। चूंकि पटनायक और भाजपा के बीच एक अलिखित समझौता है कि आप ओडिशा में दखल न दें और केंद्र में जहां भी जरूरत है, वहां हमारा सहयोग लेते रहें। इसी समझौते का परिणाम है कि पटनायक मुख्यमंत्री बने रहने की लंबी पारी खेलते जा रहे हैं। लेकिन भाजपा दीर्घकालिक राजनीति का खेल खेलते हुए आगे बढ़ रही है। इसी नजरिए से उसने आदिवासी महिला द्रोपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाने का काम किया है।
दतिया सीट से चुनाव हारे पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा इस लिहाज से अग्रिम पंक्ति में हैं। उन्हें एक कर्मठ कार्यकर्ता माना जाता है। अमित शाह से नजदीकी के चलते ये उम्मीद की जा रही है कि वे उम्मीदवार बन सकते हैं। भाजपा के युवा और बौद्धिक चेहरों में राघवेंद्र शर्मा का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। फिलहाल, वे भोपाल में भाजपा कार्यालय मंत्री हैं और संघ और भाजपा के बीच सेतु बने हुए हैं। वे अपना काम शालीनता के साथ पूरी गोपनीयता बरतते हैं। संघ से प्रशिक्षण प्राप्त होने के कारण एक अच्छे वक्ता भी हैं। हालांकि, यदि भाजपा ओबीसी, एससी या एसटी का कार्ड चलती है तो इन दोनों में से कोई भी उम्मीदवार नहीं होगा। लेकिन मध्य प्रदेश में ब्राह्मणों के वोट साधने की दृष्टि से किसी एक को उम्मीदवार बनाया जा सकता है।
(लेखक, वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार हैं।)

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