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इंटरनेशनल होगा कोंकण का काजू!

सामना संवाददाता / मुंबई। सार्वजनिक लोक निर्माण विभाग ने रायगढ़ जिले के रेवस से सिंधुदुर्ग जिले के रेड्डी तक समुद्री राजमार्ग को मंजूरी दे दी है, जो गोवा राजमार्ग का एक विकल्प है और कोकण के विकास मार्ग के रूप में जाना जाता है। परियोजना को गति देने के लिए महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (एमएसआरडीसी) को काम सौंपा गया है। ४९८ किलोमीटर लंबे इस हाइवे के निर्माण में १०,००० करोड़ रुपए की लागत आने का प्रस्ताव है। इस निर्णय को १६ मार्च को अंतिम रूप दिया गया था और इसे चार चरणों में बनाया जाएगा। यह महामार्ग समुद्र के किनारे के पास से जाएगा, इसलिए इसका फायदा यहां पर्यटन के लिए होगा। इस महामार्ग से कोकण का विकास तेज गति से होगा, ऐसा कहा जा रहा है।
१४८ करोड़ रुपए खर्च की मंजूरी दी
कोकण के प्रसिद्ध आम, काजू, नारियल, सुपारी को अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलेगा, इसलिए यह होने वाला महामार्ग कोकणवासियों के लिए केवल महामार्ग ही नहीं, बल्कि सोने का मार्ग है। विशेष रूप से रेवस से रेड्डी मार्ग के केलसी खाड़ी पर पुल बनाने के लिए १४८ करोड़ रुपए खर्च की मंजूरी दी गई है। यह महामार्ग रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, रायगड जिले से होकर जाएगा।
मुंबईकरों को गोवा जाने में होगा फायदा
मुंबईकरों को गोवा जाने के लिए इस महामार्ग का फायदा मिलेगा। द्रोणागिरी से मुरूड ८० किलोमीटर, मुरूड से बाणकोट ६४ किलोमीटर, बाणकोट से रत्नागिरी १४६ किलोमीटर, रत्नागिरी से पावस २० किलो मीटर, पावस से खाक्षीतिठा ६९ किलोमीटर, खाक्षीतिठा से मालवण ५० किलोमीटर, मालवण से गोवा ६५ किलोमीटर के बीच इस काम को पूरा करने के लिए करीब दस हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे। रेवस-रेडी महामार्ग की कल्पना दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री बै. ए. आर. अंतुले ने की थी। उसके बाद कई मायने में काम में गति आई थी लेकिन निधि के अभाव में परियोजना रखड़ गई थी।
पर्यटन और उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
मुंबई-गोवा महामार्ग का पर्यायी समुद्री महामार्ग साबित होगा। इस संकल्पना से महामार्ग का काम शुरू किया गया है। रेवस से रेड्डी के बीच इस समुद्री महामार्ग को तैयार किया जाएगा। यह किनारा शहरों को मुख्य सड़क से जोड़ेगा। मुंबई से गोवा की दूरी भी कम हो जाएगी। यह मार्ग पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है, क्योंकि यह समुद्र तट की प्रकृति से होकर गुजरता है। समुद्री राजमार्ग कोकण के नागरिकों के लिए आकर्षण का विषय है। इससे यहां के पर्यटन और मछली पकड़ने के उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा।

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