मुख्यपृष्ठस्तंभउत्तर की उलटन-पलटन: वोट दिया तो खैर नहीं!

उत्तर की उलटन-पलटन: वोट दिया तो खैर नहीं!

श्रीकिशोर शाही

लोकसभा चुनाव ७ चरणों में हो रहे हैं, ताकि कानून व्यवस्था में कोई कमी न रह जाए और हर वोटर अपना वोट सुरक्षा के घेरे में रहकर सही सलामत दे सके। मगर मुंगेर से जो खबर आई है वो लोकतंत्र की सेहत के लिए अच्छी नहीं है। इसकी वजह है कि मुंगेर में बहुत से वोटर्स को वोट डालने ही नहीं दिया गया। उन्हें बाहर से ही भगा दिया गया। राजद नेता और राज्यसभा सांसद मनोज झा ने राज्य चुनाव अधिकारी से इसकी शिकायत की है। उन्होंने मुंगेर में मतदान के दौरान वोटरों को डरा-धमकाकर भगाने का आरोप लगाया। झा जी का कहना है कि विरोधियों में हार का डर है इसलिए वह स्थानीय प्रशासन की मदद से इस तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। हमारे वोटर को लाइन से भगाया गया। हम चाहते हैं कि इस पूरे मामले में जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। बिहार और बंगाल में चुनाव बहुत आसान नहीं रहते। पहले वहां बूथ लूटने की काफी घटनाएं होती थीं। अब उस पर अंकुश लगा है तो वोटर्स को डराने और भगाने की घटनाएं होने लगी हैं। पता नहीं चुनाव आयोग कहां सो रहा है।
धमकियां नहीं आईं काम
झारखंड के कई जिलों में माओवादियों का अभी भी बोलबाला है। ये माओवादी चुनाव का विरोध करते हैं और वोट देनेवालों को देख लेने की धमकी देने में माहिर हैं। चौथे चरण में झारखंड की चार सीटों पर मतदान हुए। वहां औसतन ६३.१४ फीसदी वोट पड़े। इनमें सबसे ज्यादा टर्नआउट सिंहभूम में रहा, जहां ६६.११ फीसदी वोट पड़े। खूंटी में ६५.८२, लोहरदगा में ६२.६० और पलामू में ५९.९९ फीसदी मतदान दर्ज किया गया। सर्वाधिक नक्सल प्रभावित इलाकों में मतदाताओं के इस टर्नआउट को देखकर लगता है कि वोटर्स में अब नक्सलियों का खौफ खत्म हो गया है। बात दें कि पिछले पांच वर्षों में सिंहभूम में सबसे ज्यादा नक्सली घटनाएं हुई हैं। इस बार भी यहां माओवादी नक्सलियों ने चुनाव बहिष्कार का फरमान जारी किया था। लेकिन, व्यापक सुरक्षा बंदोबस्त के बीच सबसे ज्यादा इसी संसदीय क्षेत्र में वोटर निकले। कुछ इलाके तो ऐसे हैं जहां २० साल में पहली बार खुलकर वोटिंग हुई है। इन चारों लोकसभा सीटों में बनाए गए ७,५९५ बूथों में करीब साढ़े चार हजार बूथ नक्सलियों के कारण चुनौतीपूर्ण माने गए थे। खूंटी में केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, सिंहभूम में मौजूदा सांसद गीता कोड़ा और झारखंड सरकार की पूर्व मंत्री जोबा मांझी, पलामू में सांसद एवं पूर्व डीजीपी बीडी राम सहित कुल ४५ प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है। अब देखना है ४ जून को किस-किस के चेहरे मुस्कुराते हैं।
राजधानी में तीन वॉर रूम
अब तो चुनाव भी एक वॉर ही हो गया है शायद इसीलिए राजनीतिक दलों को वॉर रूम बनाकर चुनाव का संचालन करना पड़ता है। यही वजह है कि देश की राजधानी दिल्ली पर कांग्रेस ने खासा फोकस किया है और वहां वॉर रूम बनाए हैं। कांग्रेस ने चुनाव कैंपेन को धार देने के लिए सोशल मीडिया वॉर रूम बनाए हैं। पार्टी की ओर से तीन लोकसभा क्षेत्र में अलग-अलग वॉर रूम बनाए गए हैं। दिल्ली कांग्रेस के अंतरिम अध्यक्ष देवेंद्र यादव के अनुसार, वॉर रूम के माध्यम से पार्टी के वैंâपेन को और मजबूत किया जाएगा। इसके जरिए पार्टी अपने मुद्दे और केंद्र सरकार की नाकामी को सोशल मीडिया के जरिए जनता तक पहुंचाएगी। दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस एक साथ मिलकर गठबंधन में चुनाव लड़ रही हैं। सात में से चार लोकसभा सीट पर आम आदमी पार्टी और तीन लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी उतारे हैं। दिल्ली की सभी लोकसभा सीटों पर २५ मई को वोट डाले जाएंगे। देश की राजनीतिक घटनाक्रम में रोजाना नए-नए मोड़ आ रहे हैं। ऐसे में सोशल मीडिया का ऑपरेशन काफी महत्वपूर्ण हो गया है। अब जिसका वॉर रूम जितना मजबूत वो चुनाव में उतना ही ज्यादा कम्फर्टेबल।

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