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तहकीकात : हेमा उपाध्याय-हरेश भंबानी मर्डर केस : नफरत ने बनाया कलाकार को कातिल! …कोर्ट ने ठहराया आरोपी चिंतन को दोषी

शनिवार को आएगा फैसला
जितेंद्र मल्लाह

बहुचर्चिच शीना बोरा मर्डर केस के बाद मुंबई को झकझोर देनेवाले दूसरे बड़े केस हेमा उपाध्याय-हरेश भंबानी मर्डर केस में दिंडोशी सत्र न्यायालय ने कल महत्वपूर्ण पैâसला सुनाया। दिंडोशी की विशेष सत्र न्यायालय ने मुंबई की मशहूर आर्टिस्ट हेमा उपाध्याय के पति चिंतन को हत्या का दोषी ठहराया है। इस मामले में सजा का फैसला शनिवार को कोर्ट सुना सकता है।
हेमा और उनके वकील हरेश की लाश १३ दिसंबर २०१५ को कांदिवली के एक नाले में मिली थी। दोनों करीब तीन दिन से लापता थे। उनके शवों को पॉलिथीन में लपेट कर पानी में फेंका था। लाश मिलने के बाद जांच में जुटी पुलिस को पता चला कि हेमा उपाध्याय का एक फोटो फ्रेमिंग वर्कशॉप के मालिक विद्याधर राजभर से पांच लाख रुपयों के लेनदेन को लेकर कुछ विवाद चल रहा था। पुलिस ने मामला दर्ज कर उनसे पूछताछ शुरू की तो हेमा के पति चिंतन का नाम भी प्रमुख संदिग्ध के तौर पर उभरकर सामने आया था।

२० लाख में दी थी सुपारी
पुलिस को पता चला कि हेमा की उसके पति चिंतन से पटती नहीं थी इसलिए दोनों कई सालों से अलग रह रहे थे। हेमा ने चिंतन के खिलाफ प्रताड़ना की शिकायत भी दर्ज कराई थी। इसलिए चिंतन ने २० लाख रुपए में हेमा के साथ वकील हरेश के भी कत्ल की सुपारी विद्याधर राजभर को दी थी। विद्याधर राजभर ने इस काम का जिम्मा आर्थिक रूप से परेशान प्रदीप राजभर को दे दिया। विद्याधर और चिंतन के कहने पर प्रदीप ने हेमा को फोन कर कहा कि वह चिंतन का कुक बोल रहा है। उसके पास चिंतन का आपत्तिजनक वीडियो है, जो तलाक में उसके लिए मददगार हो सकता है। प्रदीप ने २ लाख रुपए के बदले वीडियो देने के बहाने हेमा को कांदिवली में बुलाया। बदकिस्मती से वीडियो लेने हरेश भी हेमा के साथ मौका-ए-वारदात पर पहुंच गया। उससे (चिंतन) तलाक लेने के लिए हरेश, हेमा को उकसा रहा है और उसकी मदद कर रहा है ये सोच कर चिंतन हरेश पर भी खार खाए बैठा था। इसलिए चिंतन ने प्रदीप राजभर और उसके साथ मौजूद लोगों को हेमा के साथ-साथ हरेश का भी काम तमाम करने का निर्देश दे दिया था।

ऐसे किया काम तमाम
हरेश के साथ विद्याधर के स्टूडियो पहुंची हेमा नीचे जाने वाली सीढ़ियों पर बैठ गई। इसके बाद विद्याधर ने एक रुमाल पर बोतल से नशीला पदार्थ डाला और बाकियों को हेमा व हरेश को पकड़ने को कहा। प्रदीप ने विजय राजभर, साधु राजभर व कुछ और लोगों की मदद से हेमा और उसके साथ आए हरेश का गला घोंट दिया। वारदात के बाद साधु वाराणसी भाग गया। मुंबई पुलिस के निर्देश पर यूपी एसटीएफ और मुंबई पुलिस ने साझा अभियान में वाराणसी के कवि रामपुर पेट्रोल पंप से साधु राजभर को पकड़ा था। पूछताछ में उसने कबूल किया कि उसने ही हेमा और हरेश का गला घोंट कर हत्या की थी। उसके खुलासे के आधार पर मुंबई पुलिस ने प्रदीप और आजाद राजभर नामक आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया। वाराणसी के बड़ा गांव इलाके का रहने वाला साधु, मुंबई के एक फोटो फ्रेमिंग वर्कशॉप में काम करता था। उसने पुलिस को यह भी बताया कि उसने यह सब अपने साहब यानी विद्या सागर राजभर के इशारे पर किया। सूत्रों की मानें तो विद्या के साथ हेमा ने अपनी पोट्रेट को लेकर कभी कोई बिजनेस डील की थी। इसी को लेकर दोनों के बीच विवाद भी था। इस मामले में पुलिस ने २,००० पन्नों की चार्जशीट दायर की थी और ३० गवाहों को सूचीबद्ध किया था, जिनकी गवाही के आधार पर हेमा और उनके वकील हरेश भंबानी की हत्या और साजिश के मामले में कोर्ट ने चिंतन को दोषी पाया है।

फेसबुक पोस्ट से फंसा चिंतन
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हिरासत में पूछताछ के दौरान चिंतन पुलिस के सवालों का सीधा जवाब नहीं दे रहा था। इसके अलावा उसके बयानों में काफी विसंगतियां थीं। इसी दौरान चिंतन के सोशल मीडिया (फेसबुक) अकाउंट पर पोस्ट किया गया एक गाना पुलिस को खटक गया। पुलिस ने जब चिंतन से हेमा की हत्या के एक दिन बाद फेसबुक में गाना ‘अलविदा’ पोस्ट करने की वजह पूछी तो उसके जवाब में चिंतन लड़खड़ा गया। हालांकि, पुलिस का यह भी कहना है कि ‘अलविदा’ गाना संयोग से भी पोस्ट हो सकता है लेकिन उनके पास और भी ऐसे सबूत हैं जो साबित करते हैं कि चिंतन भी अपनी पूर्व पत्नी हेमा की हत्या में शामिल था। पुलिस को कॉल डिटेल से पता चला है कि हत्या से एक सप्ताह पहले चिंतन अपने दोस्त विद्याधर राजभर के संपर्क में लगातार था। पुलिस को अब चिंतन के उस आरोपी दोस्त की तालाश है जिसने हत्या की योजना बनाने में चिंतन की मदद की थी।

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