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तहकीकात : शक ने बनाया दोस्त को ‘जानी’ दुश्मन! …भागने की बजाय ‘लोकल’ में भटकता रहा कातिल

•  कत्ल के बाद हुई परिवार की चिंता
• कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने दबोचा
जितेंद्र मल्लाह
कहते हैं शक की बीमारी का कोई इलाज नहीं है। शक के कारण अक्सर लोग अपनों के ही बैरी बन जाते हैं। ऐसा ही एक मामला खार-पूर्व स्थित तीन बंगला क्षेत्र से सामने आया है, जहां शक के कारण ३२ वर्षीय युवक १५ साल पुराने दोस्त की जान का दुश्मन बन गया। दोस्त के कत्ल के बाद वह मौके से फरार तो हो गया था लेकिन अतीत में उसके परिवार के साथ घटी एक घटना ने उसे डरा दिया और वह भागन की बजाय असमंजस में फंसकर एक लोकल से दूसरी लोकल ट्रेन में चर्चगेट से विरार के बीच भटकता रहा, इस दौरान उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही निर्मल नगर पुलिस की टीम ने उसे दबोच लिया।
६ नवंबर को सुबह के वक्त खार-पूर्व स्थित तीन बंगला रेलवे कॉलोनी क्षेत्र में लोग उस वक्त सन्न रह गए, जब परिसर में रहनेवाले २७ वर्षीय अमोल मोहिते (बदला हुआ नाम) की लाश इमारत की छत पर पड़ी होने की जानकारी उन्हें मिली। सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची निर्मल नगर पुलिस की टीम ने शव की जांच की तो अमोल के जिस्म पर चोट के कोई निशान नहीं थे। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक श्रीमंत शिंदे के मार्गदर्शन तथा पीआई क्राइम रऊफ शेख नेतृत्व में निर्मल नगर पुलिस की टीम ने जांच की तो गद्दे पर सो रहे अमोल की नाक, कान और बाल में अल्प मात्रा में सूखा हुआ खून लगा पाया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला कि अमोल के सिर पर किसी भारी वस्तु से जोरदार प्रहार किया गया था। हालांकि, इसकी वजह से कोई बाहरी बड़ा जख्म तो नहीं हुआ, लेकिन दिमाग के अंदर की नसें बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थीं।
दोस्त से चल रहा था झगड़ा
वरिष्ठों के मार्गदर्शन में जांच करने पर निर्मल नगर पुलिस थाने के पीएसआई संतोष मसाल को पता चला कि अमोल का उसी बस्ती में रहनेवाले ३२ वर्षीय संजय (बदला हुआ नाम) से कुछ झगड़ा चल रहा था। असल में संजय और अमोल करीब १५ वर्षों से दोस्त थे, दोनों के खिलाफ कुछ आपराधिक मामले भी दर्ज थे। लेकिन संजय को शक हो गया था कि अमोल उसकी पत्नी और साली से घनिष्ठता बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। इस बात पर अमोल से संजय नाराज था और उसने अमोल को अपनी हरकतों से बाज आने की कड़ी चेतावनी भी दी थी।
दोस्तों के कारण दो बार चूका मौका
बताया जा रहा है कि रविवार की रात अमोल और संजय के बीच कुछ झगड़ा हुआ था। हालांकि दोस्तों और परिजनों ने झगड़ा छुड़ा दिया था। बाद में अमोल अमोल अपने तीन दोस्तों के साथ इमारत की छत पर सोने चला गया। रात में करीब १ बजे संजय वहां गया तो अमोल सो गया था, लेकिन उसके तीनों दोस्त जाग रहे थे। संजय ने उनके समक्ष अमोल से बात करने की इच्छा व्यक्त की लेकिन उन्होंने उसे बताया कि अमोल सो चुका है और समझाकर भेज दिया, लेकिन संजय के सिर पर खून सवार था। इसलिए वह रात में ३ बजे के करीब दोबारा छत पर पहुंच गया। उस वक्त अमोल के दो दोस्त तो जा चुके थे लेकिन एक दोस्त जाग रहा था। इसलिए संजय चुपचाप नीचे आकर छिप गया और वह मौके का इंतजार करने लगा। भोर में ५ बजे के करीब जब अमोल का तीसरा दोस्त भी चला गया तो संजय छत पर पहुंच गया। उसने वहां पड़ा कॉन्क्रीrट ब्लॉक उठाकर अमोल के सिर पर मार दिया और वहां से चंपत हो गया।
परिवार के बारे में सोचकर डरा
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि संजय का भाई कत्ल के एक मामले में जेल में बंद है। भाई द्वारा कत्ल किए जाने पर संजय सहित उसके पूरे परिवार को काफी तकलीफों का सामना करना पड़ा था। इस बार उसके (संजय) फरार होने की वजह से परिवार को फिर वैसे ही यातनाओं का सामना करना पड़ सकता है, ये सोचकर संजय डर गया। वह भागने या न भागने के असमंजस में लोकल ट्रेनों में एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन भटकता रहा। सीसीटीवी फुटेजों की मदद से उसकी तलाश में जुटी निर्मल नगर पुलिस की टीम भी उसके पीछे-पीछे चर्चगेट से विरार के बीच खाक छानती रही। इस दौरान वह जैसे ही हालात का जायजा लेने के लिए खार पहुंचा, पीएसआई संतोष मिसाल की टीम ने उसे दबोच लिया।

 

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