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निवेश गुरु : व्यक्ति की पहचान और व्यवसाय, ब्रांडिंग से लेकर सामाजिक जातियों तक

 

भरतकुमार सोलंकी

अक्सर हम कई बार टूथपेस्ट को कोलगेट, फोटो कॉपी को जेरोक्स और बीमा को एलआईसी कहते हुए सुनते हैं। ब्रांड इतना अधिक प्रचलित हो जाता है कि उत्पाद का ब्रांड ही उत्पाद का नाम बन जाता है। ठीक वैसे ही हम साग-भाजी, परचून दुकानदार से लेकर टाटा, बिरला और अंबानी जैसे लोगों को भी बिजनेसमैन ही कहते हैं। मिट्टी के बर्तन बनाने वाले से लेकर स्टील कारखाना-मालिक को उद्योगपति कहा जाता है।
सदियों से व्यक्ति और व्यक्ति के परिवार की पहचान सहित अनेक जातियों की निर्मिति भी परंपरागत व्यवसायों से ही बनी थी। जैसे कपड़ा बुननेवाले को बुनकर, सिलाई करनेवाले को दर्जी, बाल काटनेवाले को नाई, जूते बनानेवाले को मोची, खेती करनेवाले को किसान और व्यापार व्यवसाय करने वाले को बनिया-महाजन आदि जातियों से पहचाना जाता रहा है। स्कूल-कॉलेज में पढ़े-लिखे इंजीनियर, कलेक्टर, डॉक्टर या वकील बनने वाले प्रोफेशनल युवाओं को मान्यता प्राप्त इंस्टीट्यूट से उनके व्यावसायिक कार्यों के लिए एक उपाधि मिल जाती है, लेकिन ऐसे लाखों लोग हैं जो अपने परंपरागत व्यवसाय को छोड़कर किसी व्यवसाय में जुड़कर अपना जीवनयापन करने लगे हैं जिन्हें यह भी नहीं मालूम है कि मैं कौन हूं और मेरी वर्तमान जाति क्या है?
पुराने जमाने में जातियों का निर्माण परंपरागत व्यावसायिक कार्यों से ही हुआ था। वर्तमान में किसी इंजीनियर से भी यदि कोई उसकी जाति के बारे में पूछा जाए तो वो अपनी वही पुरानी जाति बताता है, जिसके द्वारा उनके बाप-दादाओं को जाना पहचाना जाता था। जब किसी व्यक्ति को अपने खुद के बारे में ही नहीं मालूम है कि मैं कौन हूं और वर्तमान में मेरी जाति व्यवसाय क्या है तो उसका भविष्य कैसा होगा?
व्यक्ति की व्यक्तिगत पहचान और उसकी व्यावसायिक समृद्धि के कई पहलुओं पर निर्भर करती है। व्यक्ति अपनी क्षमताओं, रुचियों और शैली के माध्यम से एक अद्वितीय ब्रांड बना सकता है, जो आत्मविश्वास और स्थायित्व को बढ़ाता है। उसका व्यवसाय उसकी अंतर्निहित प्रेरणा, मान्यता और सामाजिक परियायों पर आधारित हो सकता है। इसमें उसकी क्षमताओं का सही उपयोग, अच्छा नेटवर्किंग और बाजार में अपनी जगह बनाने के लिए योजनाबद्धता तरीके शामिल होते हैं।
व्यक्ति की पहचान और उसके व्यवसाय से जुड़े उदाहरणों से यही दिखता है कि कई बार एक ब्रांड इतना प्रचलित हो जाता है कि वह उत्पाद का सामान्य नाम बन जाता है। इससे हम उस उत्पाद को उस ब्रांड से ही जोड़ते हैं। इससे ही व्यक्ति और उसका व्यवसाय एक पहचान बना लेते हैं, जिसे समाज ने स्वीकार किया है। व्यक्ति की जाति से जुड़ी बातें, व्यक्ति का परिवार और व्यावसायिक गतिविधियों से उसकी पहचान बनती है। इससे व्यक्ति की व्यक्तिगत पहचान और उसका व्यवसाय एक-दूसरे को कैसे प्रभावित करते हैं और यह कैसे उसके जीवन की दिशा को नए आयाम दे सकता है?
(लेखक आर्थिक निवेश मामलों के विशेषज्ञ हैं)

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