मुख्यपृष्ठनए समाचारनिवेश गुरु : जीवन की सांझ में रिटायरमेंट फंड की खुशबू!

निवेश गुरु : जीवन की सांझ में रिटायरमेंट फंड की खुशबू!

भरतकुमार सोलंकी

जिंदगी के लंबे सफर की यात्रा में जीवन की सांझ महत्वपूर्ण होती है। यह सांझ सुखद, संपन्न और आनंदपूर्ण हो, हर कोई चाहता भी है। फिर भी बच्चों की पढ़ाई, शादी-विवाह आदि अनेक पारिवारिक जिम्मदारियों के चलते मां-बाप अपने जीवन के सांझ की खुशियों के साथ समझौता कर लेते हैं। कई बार देखा गया कि बच्चों की शिक्षा पर मां-बाप अपना सब कुछ दांव पर लगा देते हैं। वहीं बच्चों का अपना परिवार हो जाने पर वे अपने मां-बाप से मुंह मोड़ लेते हैं। ऐसी स्थिति में जीवन की सांझ में भी मां-बाप को मजबूरन कमाने जाना पड़ता है या फिर अपने बच्चों के सामने हाथ पैâलाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
जिंदगी के सफर में जीवन की सांझ सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है। यात्रा जितनी ज्यादा दूर की हो, उसकी तैयारी भी उतनी ही जल्दी करनी चाहिए। अक्सर लोग यह सोचकर कि बुढ़ापा तो अभी बहुत दूर है, जिसकी तैयारी कभी भी कर लेंगे। कभी भी बाद में कर लेने की सोच के साथ जवानी की मौज-शौक में ही अपनी आमदनी का अधिकतर हिस्सा खर्च कर लेते हैं।
जैसे एक यात्रा घर से निकलकर गली के नुक्कड़ तक जाने की है। दूसरी यात्रा घर से निकलकर स्टेशन जाना है। तीसरी यात्रा घर से निकलकर अमदाबाद या दिल्ली जाना है और चौथी यात्रा घर से निकलकर सिंगापुर अथवा अमेरिका जाना है। नुक्कड़ तक जाने के लिए पैदल जा सकते हैं, स्टेशन जाने के लिए बस या ऑटोरिक्शा से जाना होगा और दिल्ली-अमदाबाद के लिए ट्रेन अथवा हवाई जहाज लेना होगा, लेकिन अमेरिका-सिंगापुर जाने के लिए सिर्फ हवाई जहाज से ही जा सकते हैं। अब नुक्कड़ पर जाने के लिए आपको कोई ज्यादा बड़ी तैयारी की जरूरत नहीं करनी पड़ती है, लेकिन अमेरिका-सिंगापुर के लिए महीनों पूर्व तैयारी करनी पड़ती है। लंबी यात्रा के लिए सही समय पर सबसे पहले सर्वप्रथम दूर-यात्रा की फाइनेंसियल प्लानिंग के साथ कई तरह की तैयारी करनी पड़ती है। ठीक इसी तरह जिंदगी के सफर में भी जीवन की सबसे लंबी यात्रा व्यक्ति के जीवन की संध्या यात्रा होती है।
घर, गाड़ी, बच्चों की पढ़ाई, विदेश यात्रा आदि अनेक कार्यों के अलावा सबसे अधिक महत्वपूर्ण और आखिरी लंबी यात्रा अपने बुढ़ापे की सांझ होती है। बुढ़ापे की सांझ में एक निश्चित आमदनी के साधन से बुढ़ापा सुखद और आनंदपूर्ण हो जाता है। इसलिए बुढ़ापे की सांझ को सुखद बनाने के लिए रिटायरमेंट फंड की प्लानिंग सबसे पहले करनी चाहिए, क्योंकि यह एक बहुत दूर की यात्रा है। दूर की यात्रा को करीब लाने के लिए आपके पास एक परमानेंट इंकम स्रोत बन जाए तो जीवन की सांझ में एक अलग ही महक, खुशबू और आनंद को महसूस किया जाता है। जिंदगी भर की कमाई से बने रिटायरमेंट फंड से मिलनेवाली आमदनी से खुशबु और आनंद का एहसास न हो यह असंभव है।
(लेखक आर्थिक निवेश मामलों के विशेषज्ञ हैं)

अन्य समाचार