मुख्यपृष्ठसमाचारयूपी में बढ़ते क्राइम के आगे आईपीएस ‘सरेंडर'!

यूपी में बढ़ते क्राइम के आगे आईपीएस ‘सरेंडर’!

सामना संवाददाता / गाजियाबाद । गाजियाबाद की एक लूट कई आईपीएस अफसरों से लेकर सरकार तक के लिए सिरदर्द बन गई। लूट से भी बड़ी बात थी कि उन बदमाशों की सड़क पर बाइक गिराकर पिस्टल तानकर लूटते हुए लाइव फोटो वायरल हो जाना। यह सिर्फ एक फोटो नहीं, सीधे-सीधे योगी सरकार के प्रशासनिक तंत्र को चुनौती थी। ऐसा लगने लगा कि गाजियाबाद में सड़कों पर गुंडाराज है। इस लूटकांड के आगे कई आईपीएस अफसर भी सरेंडर कर गए। इस घटना में पेट्रोल पंप कर्मचारियों से २५ लाख रुपए लूट लिए गए थे।

सबसे ज्यादा थकाने वाला केस
२०१७ बैच के आईपीएस ऑफिसर डॉ.ईरज राजा पिछले एक साल से ज्यादा वक्त से गाजियाबाद में बतौर एसपी (ग्रामीण) तैनात हैं। इससे पहले वह डॉक्टर थे और उसको छोड़कर भारतीय पुलिस सेवा में आए थे। २५ लाख रुपए की लूट जिस इलाके में हुई, उसके सुपरविजन का प्रभार ईरज राजा पर ही है। ईरज राजा ने ट्वीट करते हुए लिखा- ‘४ साल की मेरी नौकरी का मानसिक एवं शारीरिक रूप से शायद सबसे ज्यादा थकाने वाला केस है।

कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर हुए फेल
अगस्त २०२१ में एसएसपी गाजियाबाद बनकर आए पवन कुमार कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर फेल साबित हुए है। २५ लाख रुपए की लूट की घटना में मुख्यमंत्री ने एसएसपी पवन कुमार को सस्पेंड कर दिया। राजस्थान में हनुमानगढ़ के रहने वाले पवन कुमार २००९ बैच के आईपीएस ऑफिसर हैं। उनके कार्यकाल में सिर्फ ढाई महीने में ही सवा सौ से ज्यादा लूट की वारदात हुईं।

बीमारी का बना रहे बहाना
एसएसपी के सस्पेंड होने के बाद संजीव गुप्ता ने एक अप्रैल को कानून-व्यवस्था संभालने के लिए अस्थायी तौर पर जी कुमार को गाजियाबाद भेजने का आदेश किया था। शासन में बैठे उच्च अधिकारियों ने छानबीन कराई तो पता चला कि वे बीमार हो गए हैं और छुट्टी पर चले गए हैं। इसके बाद कल नया आदेश जारी हुआ और एसपी मुनीराज को लखनऊ से कार्यवाहक एसएसपी बनाकर गाजियाबाद भेजने का आदेश हुआ।

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