मुख्यपृष्ठस्तंभदिल्ली का दर्द... क्या छोटे बच्चों का स्कूल जाना सुरक्षित है?

दिल्ली का दर्द… क्या छोटे बच्चों का स्कूल जाना सुरक्षित है?

योगेश कुमार सोनी।  राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना को लेकर एक बार फिर से संकट आ गया है। मामला यह है कि पिछले एक सप्ताह से लगातार कोरोना केसों ने रफ्तार पकड़ ली है। राजधानी में पॉजिटिविटी रेट ५.७० प्रतिशत के साथ एक्टिव केस बढ़कर २,७४१ पर पहुंच गए हैं और यह आंकड़ा हर रोज बढ़ रहा है। दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने बीते बुधवार को अपनी बैठक में यह अहम पैâसला लिया है कि अब मास्क की अनिवार्यता फिर जरूरी है और मास्क नहीं पहनने पर ५०० रुपए का चालान काटा जाएगा। फिलहाल स्कूल और अन्य एजुकेशनल इंस्टीट्यूट बंद नहीं होंगे। डीडीएमए के मुताबिक कोविड-१९ के नए वैरिएंट ँ.१.१०, ँ.१.१२ के शुरुआती संकेत मिलने के बाद यह निर्णय लिया गया है। एक बार फिर से दिल्लीवासियों में तनाव की स्थिति देखने को मिल रही है और सबसे ज्यादा उन अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है, जिनके बच्चे छोटे हैं और वह स्कूल जा रहे हैं। बीते दो वर्षों से स्कूल नहीं खुले थे और अब कुछ राहत मिली थी कि एक बार फिर से संकट आ गया। ऐसे में अभिभावकों चिंता जायज भी है चूंकि आठवीं कक्षा तक बच्चा स्वयं का ख्याल अर्थात कोरोना के नियमों का पालन नहीं कर पाता। दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने पुन: स्कूल बंद करने का पैâसला नहीं लिया, हालांकि स्थिति अभी इतनी भयावह नहीं है लेकिन हालात बिगड़ते देर नहीं लगती। चूंकि बीते समय ने हमें बहुत कुछ ऐसा दिखाया था कि जिसकी हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी। पिछले वर्ष हिंदुस्थान में किस तरह मौतों का तांडव हुआ था शायद ही कोई कभी भूल पाएगा।
बहरहाल अब शायद स्थिति यही बन रही है कि कोरोना काल में हमें जीना पड़ेगा। चूंकि कहते हैं जिंदगी किसी के लिए नहीं रुकती, चूंकि ऑनलाइन शिक्षा से बच्चों की शिक्षा बहुत प्रभावित हुई है। बच्चों को सही तरह से मास्क व सेनिटाइजर का प्रयोग करना सिखाना होगा। दरअसल जो छोटी कक्षा में हैं जैसे कि पहली से पांचवीं तक तो ऐसे बच्चों के माता-पिता का चिंतित होना सही भी है। चूंकि इतने छोटे बच्चे सोशल डिस्टेंसिंग व अन्य नियम का पालन नहीं कर पाते। इसके अलावा अभिभावकों का कहना यह है कि यदि किसी के घर में कोरोना पेशेंट हुआ और उस बच्चे से स्कूल में पढ़ रहे बाकी बच्चों को हो गया तो सब प्रभावित होगें। स्वाभाविक है कि छोटे बच्चों की इम्युनिटी बड़ों की अपेक्षा अधिक नहीं होती। लोगों का सुझाव है कि कक्षा पांच तक के बच्चों के लिए स्कूल फिर से बंद कर दिए जाएं। कुछ लोगों ने तो फिर से अपने बच्चों को स्कूल जाना बंद करा दिया। डीडीएमए को इस मामले में मीटिंग लेते हुए गंभीर निर्णय लेने की जरूरत है क्योंकि कोरोना एकदम तेजी पैâल गया तो समस्या बढ़ सकती है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक मामलों के जानकार हैं।)

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