मुख्यपृष्ठसमाचारभड़का रहा है हरियाणा प्रशासन!

भड़का रहा है हरियाणा प्रशासन!

-किसानों का आरोप, जत्थों में भेष बदलकर घुस रहे हैं कर्मचारी

-शांतिपूर्ण आंदोलन को उकसा रहे हैं, पत्थरबाजी करने को प्रेरित कर वीडियो बनवा रहे हैं

-एक कर्मचारी को रंगे हाथों पकड़ने का संगठन ने किया दावा

-हरियाणा प्रशासन पंजाब के किसानों से कर रहा है सौतेला व्यवहार

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

किसान आंदोलन को हर प्रकार से कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। आंदोलन कर रहे किसानों के दावों पर यकीन करें तो यही सवाल सामने आता है। किसानों का कहना है कि हरियाणा पुलिस अपने कर्मचारियों को किसानों के जत्थे में शामिल कर रही है और जानबूझकर पत्थरबाजी करवा रही है और वीडियो बनवा रही है और वही वीडियो सोशल मीडिया और समाचार चैनलों पर चलवा कर किसानों को बदनाम करने की कोशिश कर रही है। किसान संगठन ने तो एक एक कर्मचारी को रंगे हाथ पकड़ने का दावा भी किया है। साथ ही हरियाणा सरकार पर यह भी आरोप लग रहे हैं कि वो पंजाब के किसानो के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।
सिंगर ने साधा निशाना
किसान आंदोलन को लेकर भोजपुरी सिंगर नेहा सिंह राठौर ने सरकार के रवैये पर भी सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट करते हुए उन्होंने कहा कि सारी कीलें दिल्ली बॉर्डर पर ही खत्म कर दी हैं या कुछ कीलें चाइना बॉर्डर के लिए भी बचा रखी हैं? इससे पहले उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि सरकार के पास हमारे हर सवाल का जवाब सिर्फ लाठी है। जब भी सरकार के कुछ कहा जाता है तो वो सिर्फ लाठियां बरसाती है। नेहा सिंह राठौर ने आगे कहा कि सरकारी कर्मचारी खुद अपनी पेंशन के लिए लड़ रहे हैं लेकिन हरियाणा-पंजाब के किसानों को खालिस्तानी बता रहे हैं। बेरोजगार एड़ियां घिस रहे हैं, पकौड़ा तलने की नौबत आ गई है, लेकिन ये भी किसानों को कांग्रेस का एजेंट बता रहे हैं। इन बेरोजगारों के बापों को बुढ़ापे की चिंता तो खाए जा रही है, लेकिन ये भी ज्ञान ठेल रहे हैं कि किसानों की मांगे मान लीं तो देश बर्बाद हो जाएगा। बाकी यूपी-बिहार के किसान तो बस जलन के मारे उनको पिटते देखना चाहते हैं।
खनौरी बॉर्डर पर पकड़ा गया मुखबिर
बता दें कि हरियाणा प्रशासन ने शंभू बॉर्डर पर तैनात पुलिस जवानों पर पत्थरबाजी के २ वीडियो जारी किए हैं। पुलिस ने उनकी पहचान करने की अपील की है। पुलिस ने कहा कि ये वीडियो १३ और १४ फरवरी के हैं। पुलिस जब किसानों को बॉर्डर क्रॉस करने से रोकने के लिए आंसू गैस के गोले दाग रही थी तो कुछ प्रदर्शनकारियों ने उनके ऊपर पत्थर फेंके। हालांकि किसानों का कहना है कि पुलिस खुद पत्थरबाजी करवाकर ऐसे वीडियो बनवा रही है और किसानों को बदनाम करने का काम कर रही है। किसानों ने खनौरी बॉर्डर पर एक कर्मचारी को मुखबिरी करने के शक में पकड़ा भी है।
हम पाकिस्तानी नहीं हैं
रिपोर्ट के मुताबिक चंडीगढ़ में मंत्रियों के साथ हुई बैठक में किसानों का प्रतिनिधित्व संयुक्त किसान मोर्चा के जगजीत सिंह डल्लेवाल और किसान मजदूर संघर्ष समिति के महासचिव सरवन सिंह पंधेर ने किया। उन्होंने आंदोलनकारी किसानों पर बलों की कार्रवाई पर चिंता व्यक्त की है। किसान मजदूर मोर्चा के नेता सरवन सिंह पंढेर ने बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि किसान संघ के नेताओं ने वैâबिनेट मंत्रियों को बातचीत के प्रति प्रतिबद्धता का आश्वासन दिया है। उन्होंने किसानों पर आंसू गैस छोड़े जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हम पाकिस्तानी नहीं हैं। हम शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं।
किसान की मौत पर भड़के अखिलेश यादव
बीच शंभू बॉर्डर से एक बुरी खबर आई है, जिसमें बताया गया है कि ठंड लगने के बाद पड़े दिल के दौरे के चलते ७८ वर्षीय किसान ज्ञान सिंह की मौत हो गई है। किसान की मौत को लेकर समाजवादी पार्टी के चीफ अखिलेश यादव ने मोदी सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को आंदोलन में किसानों की मौत का हिसाब बीजेपी से मांगना चाहिए। अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा कि शंभू बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी गुरदासपुर के सरदार ज्ञान सिंह की मौत बेहद दुखद समाचार है। श्रद्धांजलि! सुप्रीम कोर्ट बीजेपी से इलेक्टोरल बॉन्ड के साथ-साथ किसान आंदोलनों में हुई किसानों की मौत का हिसाब भी मांगे। जीवन देने वाले का जीवन लेने वाले लोगों का अब अंत समय आ गया है।
ये सरकार उद्योगपतियों और व्यापारियों की है :राकेश टिकैत
भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार पर हमला किया है। उन्होंने कहा कि हम बार बार ये कह रहे हैं कि ये सरकार उद्योगपतियों और व्यापारियों की है। ये उन लोगों की सरकार है जो गरीबों की रोटी पर कब्जा करना चाहते हैं। हमने मांग की है कि एमएसपी की गारंटी पर कानून बना दो। लेकिन इससे व्यापारी का नुकसान होगा। इसलिए सरकार इससे भाग रही है। सरकार और बड़े उद्योगपतियों का तालमेल है। ये हमारी आवाज को दबाना चाहते हैं। राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार को कुल समय बताना चाहिए। हम सिर्फ मांग कर रहे हैं, इन्हें ताकत का इस्तेमाल बंद करना चाहिए। देश में बहुत सारे कानून बदले जा रहे हैं। संसद में इसमें संसोधन के लिए बिल लाया जाए, इसे वैâसे लागू करना है इस पर कमेटी बनानी चाहिए।

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