मुख्यपृष्ठनए समाचारमत का हक मार रहा चुनाव आयोग?

मत का हक मार रहा चुनाव आयोग?

योगेश कुमार सोनी

जैसा कि चुनाव हर पांच साल के अंतराल पर होते हैं और मतदाता में एक उत्साह देखा जाता है। जो इस दिन का बेसब्री से इंतजार करते हैं, यदि उनका वोटर्स लिस्ट में नाम न हो तो कितना कुंठित महसूस करते हैं इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। इस पूरे प्रकरण में चुनाव आयोग की गलती मानी जाएगी। चूंकि वह जिन एजेंसियों को यह काम देता है, उन्होंने अपना काम बेहतर तरीके से नही किया। हाल ही में हुए मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलगांना व मिजोरम में हुए चुनाव में देखा गया कि कुछ लोगों का वोटर्स लिस्ट में नाम नहीं था, जिस पर वहां के लोगों ने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हीं जगहों पर मतदाताओं का लिस्ट में नाम नहीं है, जहां अन्य पार्टियों का वर्चस्व है। उनका मानना है कि भाजपा ने डर के मारे इसमें खेल कर दिया। चूंकि इससे पहले देखा जाता था कि कोई दो-चार लोगों को लेकर गलती हो जाती थी, लेकिन इस बार संख्या ज्यादा है। यदि इन लोगों की बात को गंभीरता से लिया जाए तो यह एक बडा मामला बनता है, इससे स्पष्ट तौर पर लोकतंत्र की हत्या हो रही है। हर किसी को अपनी मर्जी से अपनी सरकार चुनने का अधिकार है और यदि वह ऐसा न कर पाए तो यह संचालन प्रक्रिया को बेहद प्रभावित कर सकता है। इससे पहले भी कई बार भाजपा पर सिस्टम को हाईजैक करने के आरोप लगे हैं। ईवीएम की गड़बड़ी के सबसे ज्यादा आरोप यदि किसी सरकार पर लगे हैं तो वह मोदी सरकार है। ज्ञात हो कि वर्ष २०१७ में मध्य प्रदेश के भिंड जिले के अटेर में ईवीएम मशीन के डेमो के दौरान किसी भी बटन को दबाने पर वीवीपैट पर्चा भारतीय जनता पार्टी का निकलने के बाद जिले के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को हटा दिया गया था। चुनाव आयोग ने भी इस मामले की पूरी जानकारी राज्य की निर्वाचन अधिकारी सेलिना सिंह से मांगी थी, जिसके बाद कार्रवाई हुई थी। सेलिना सिंह ने बातचीत में कहा है कि मशीनें ठीक से वैâलिब्रेट नहीं हुई थीं, जिसकी वजह से समस्या हुई। लेकिन प्रश्न यही है कि वीवीपैट से पर्चा भारतीय जनता पार्टी का ही क्यों निकला था। इस मामले पर सभी राजनीतिक दलों ने मोदी सरकार को घेरा था, लेकिन यह बात ‘रात गई बात गई’ वाली कहावत के तर्ज पर दब गई। मौजूदा स्थिति में देश में एक अजीब सा माहौल बना हुआ है, जिसको लेकर हर विशेषज्ञ भी हैरान व परेशान हैं। उनका मानना है कि यदि आज सरकार ऐसा कर रही है और भविष्य में कोई अन्य सरकार आएगी और उसने भी ऐसा किया तो फिर लोकतंत्र खत्म होने की ओर चला जाएगा। सरकार आएंगी-जाएंगी लेकिन चुनाव आयोग को स्वतंत्र रूप से काम करना चाहिए। हमें इस घटना से यह सीख लेनी चाहिए और आगे से ध्यान रखना होगा कि किसी के मत का हनन न हो और लोकतंत्र की हत्या न हो।

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