मुख्यपृष्ठग्लैमर‘ऐसे लगा जैसे मेरी जान निकल गई!’-बरखा बिष्ट

‘ऐसे लगा जैसे मेरी जान निकल गई!’-बरखा बिष्ट

‘शऽऽऽ कोई है’ से छोटे पर्दे पर आगाज करनेवाली बरखा बिष्ट के अभिनय करियर को २० वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। अपने करियर में पीछे मुड़कर न देखनेवाली बरखा ने टीवी शो ‘कितनी मस्त है जिंदगी’, ‘प्यार के दो नाम- एक राधा एक श्याम’, ‘कैसा यह प्यार है’, ‘काव्यांजलि’, ‘कसौटी जिंदगी की’, ‘क्या होगा निम्मो का’ के साथ कई बांग्ला फिल्मों सहित ‘राजनीति’, ‘गोलियों की रासलीला रामलीला’, ‘ब्लैक’ जैसी हिंदी फिल्मों में भी काम किया है। इस समय बरखा ‘दुरंगा’ सीजन-२ के चलते चर्चा में हैं। पेश है, बरखा बिष्ट से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-
‘दुरंगा’ सीजन-२ स्वीकारने की क्या वजह रही?
बंगाली भाषी होने के कारण मैं बांगला फिल्मों में काम कर चुकी हूं। प्रख्यात फिल्म मेकर प्रदीप सरकार का काम देख चुकी हूं और मैं उन्हें जानती हूं। ‘दुरंगा’ सीजन-१ को प्रदीप सरकार ने निर्देशित किया था और उसमें मेरा किरदार प्राची बन्ने का था। अब प्रदीप सरकार नहीं रहे लेकिन ‘दुरंगा’ की टीम वही है। इसलिए मैंने यह शो करना चाहा।
अपने किरदार के बारे में कुछ बताएंगी?
मेरे किरदार का नाम प्राची बन्ने है, जो बहुत ही सिंपल लड़की है। अपनी दुनिया में खोई सीधी-साधी प्राची को दुनिया कितनी धोखेबाज है इस बात का कोई इल्म नहीं है। प्राची मेकअप से भी दूर रहती है। यह एक थ्रिलर है कि कैसे प्राची का किरदार मुख्य धारा से जुड़ जाता है। प्राची का एक पास्ट है और वो उसी में खोई रहती है, जिसे देखना बड़ा दुखदायी है।
प्राची का किरदार निभाने के लिए क्या आपने कुछ अलग से तैयारी की?
मुझे होमवर्क करना खास पसंद नहीं आता। मैं खुद को स्पॉन्टेनियस कलाकार मानती हूं। जब मुझे बताया जाता है कि मैं कोई किरदार निभानेवाली हूं तो उस किरदार का खाका मेरे जेहन में बनने लगता है। जब निर्देशक एक्शन कहता है तो कैमरे के सामने मैं जो परफॉर्मेंस देती हूं वही मेरे लिए बेस्ट होता है।
‘दुरंगा’ में अमित साध और गुलशन देवैया के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
सभी का बेहतरीन परफॉर्मेंस यह ‘दुरंगा’ सीजन-१ और २ की सबसे बड़ी ताकत है। ‘दुरंगा’ सीजन-२ अब टेलीकास्ट हो चुका है लेकिन मैं इस स्टारकास्ट के साथ काम करना बहुत मिस कर रही हूं। सभी के साथ मित्रता, यारी और दोस्ती कमाल की हो गई थी। दृष्टि धामी से मिलकर लगा मैं किसी परिवार के सदस्य से मिल रही हूं। एक सीन के अनुसार अमित साध को मेरा गला पकड़ना था और मुझे खींचकर जमीन पर पटकना था। इस सीन को वास्तविक बनाने के लिए अमित ने मेरे गले को ऐसे पकड़ा कि एक पल के लिए ऐसे लगा जैसे मेरी जान निकल गई हो। यह तो अच्छा हुआ की शॉट ओके हो गया वरना मुझ पर बड़ी आफत आ जाती। जैसे ही कट की आवाज आई अमित ने हाथ जोड़कर ‘आई एम सॉरी बरखा जी’ कहते हुए मुझसे माफी मांगी और इस हरकत पर शर्मिंदा होकर मेरे लिए खास अलग बंगाली लंच ऑर्डर किया।
आपकी अब तक की जर्नी कैसी रही?
ईश्वर का शुक्र है कि मेरी जर्नी कभी रुकी नहीं। मुझे लगातार काम मिलता रहा। मुझे याद नहीं कि एक शो खत्म होने पर मुझे दूसरे शो के इंतजार में कभी रुकना पड़ा हो। मेरा अभिनय सफर बोरिंग नहीं बेहद खुशी देनेवाला रहा। अपने काम के पैसे तो सभी को मिलते हैं लेकिन २० सालों से अपने काम को एन्जॉय करते हुए जीवन में आगे बढ़ना यह एक अलग बात है। मैंने अपना हर शो हर किरदार एन्जॉय किया फिर वो फिक्शन शो हो या रियालिटी शो। करियर में एक मुक्कमल जहां मुझे मिला है।
अपने करियर से आप कितनी संतुष्ट हैं?
मैं अपने करियर ग्राफ से संतुष्ट हूं। मेरी संतुष्टि की एक वजह यह भी है कि मैं अल्प संतुष्ट हूं। जरूरत से ज्यादा पाने की इच्छा रखना आपको दुखी कर देता है। बिना किसी सिफारिश, बिना किसी फिल्मी कनेक्शन अपने आप जब काम सिर्फ टैलेंट के बल पर मिलता है तो उसमें खुशी मिलनी चाहिए।
जीवन का कोई टर्निंग पॉइंट?
मैंने महसूस किया कि एक दरवाजा बंद होने पर मेरे लिए दूसरा दरवाजा खुला है। मेरे लिए ऐसा कोई एक टर्निंग पॉइंट नहीं है। ‘प्यार के दो नाम-एक राधा और एक श्याम’ में मैंने मध्यवर्ती भूमिका निभाई। मेरे काम की तारीफ होते ही दूसरे चैनलों का ध्यान मेरी ओर गया। संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘रामलीला’ में दीपिका-रणवीर सिंह के होते हुए भी मुझे नोटिस किया गया। यह भी एक बड़ा टर्निंग पॉइंट रहा।

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