मुख्यपृष्ठस्तंभ`बांहों में बांहें डालना मुश्किल है!'-निशांत मलकानी

`बांहों में बांहें डालना मुश्किल है!’-निशांत मलकानी

ओटीटी के बढ़ते प्रभाव के कारण हर दूसरे चैनल पर यह प्रेशर बना है कि वे अपने शो को अधिक से अधिक बेहतर बनाएं। यही वजह है कि ‘सोनी-सब’ का आगामी ड्रामा ‘पश्मीना-धागे मोहब्बत के’ ने दिल छू लेनेवाले प्रोमो, कश्मीरी संगीत और खूबसूरत सिनेमैटोग्राफी से दर्शकों का दिल जीत लिया है। निशांत शो में राघव का किरदार निभाते नजर आ रहे हैं, जो प्यार में विश्वास करने की बजाय अपने काम में व्यस्त रहता है। पेश है, निशांत मलकानी से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

अपने किरदार के बारे में कुछ बताएंगे?
शो ‘पश्मीना-धागे मोहब्बत के’ में मैं राघव का किरदार निभा रहा हूं। व्यावसायिक रूप से राघव को बिजनेस की बहुत अच्छी समझ है और वो अपने काम के प्रति पूरी तरह से समर्पित रहता है। हालांकि, उसके निजी जीवन की बात करें, तो वह प्यार के अस्तित्व को लेकर असमंजस में है। अपनी व्यावसायिक गतिविधियों पर उसका ध्यान उसके व्यक्तित्व में एक दिलचस्प आयाम जोड़ता है, जिससे यह किरदार अनूठा बन जाता है। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ेगी दर्शक राघव में बदलाव देखेंगे, क्योंकि वह धीरे-धीरे प्यार के रहस्यों को समझना शुरू कर देगा और इसकी अविश्वसनीय क्षमता को महसूस करेगा। संदेह से लेकर प्यार की ताकत को अपनाने तक राघव की यात्रा इस प्रेम कहानी के मूल में है, जिससे यह कहानी और भी समृद्ध बन जाती है। मुझे ये प्रेम कहानी और उसके ट्विस्ट अच्छे लगे।

इस किरदार का सबसे रोमांचक या कठिन हिस्सा क्या है?
प्यार में विश्वास नहीं करनेवाले राघव का किरदार निभाने की तैयारी करना चुनौतीपूर्ण था। मुझे उसकी सोच के पीछे की कहानी में गहराई से उतरना पड़ा, उसके पिछले हादसों और क्यों वो प्यार को अपने जीवन में आने नहीं देता इनके पीछे के कारणों को समझने की कोशिश करनी पड़ी। इस भूमिका का सबसे रोमांचक हिस्सा यह दिखाना है कि वह समय के साथ वैâसे बदलता है। अंतत: राघव का किरदार निभाना एक रोमांचक अनुभव रहा है। इसके लिए फिजिकली तैयारी कम, लेकिन मेंटली तैयारी ज्यादा करनी पड़ी।

कश्मीर में शूटिंग का अनुभव कैसा रहा?
कश्मीर में शूटिंग करने का अनुभव बेहद खास था। यह जगह अविश्वसनीय रूप से सुंदर है और इसका राघव के रूप में मेरे अभिनय पर असर पड़ा है। इस कहानी में कश्मीर की शांतिपूर्ण और आश्चर्यजनक पृष्ठभूमि राघव की दुनिया का बड़ा हिस्सा बन गए, जिससे यह और भी मनोरंजक हो गया। मैंने इससे पहले कभी कश्मीर देखा नहीं था, जब शूटिंग के सिलसिले में जाना हुआ तो वहां की खूबसूरती देखकर मन हुआ की बस, हमेशा के लिए वहीं बस जाऊं।

आप रोमांटिक सीन फिल्माते समय कितने सहज थे?
रोमंटिक सीन को फिल्माना खासकर नए कलाकारों के लिए बड़ा टेंशन वाला मामला होता है, जहां आप अपनी को-स्टार को जानते तक नहीं हैं और उसके साथ बांहों में बांहें डालनी पड़ती है, हाथों में हाथ लेना जरूरी बन जाता है लेकिन शूटिंग का हर दिन आपको अपनी पूरी यूनिट से दोस्ती करा देता है, जिसमें आपके साथी कलाकार और ऑनस्क्रीन प्रेमिका भी शामिल है। बस, यह समस्या शुरू के थोड़े दिनों तक फेस करनी पड़ती है। फिर दोस्ती होना स्वाभाविक बात है।

आपका अपना व्यक्तिगत अभिनय सफर कैसा रहा?
मेरा जन्म दुबई में हुआ और जब मैं ३ वर्ष का था, तब मेरा परिवार दुबई से दिल्ली आया। मैंने दिल्ली में पढ़ाई की और शहीद भगत सिंह कॉलेज से पास होने के बाद आईआईएम कोलकाता से एमबीए किया। कॉलेज के दिनों से मुझे मॉडलिंग के ऑफर्स आ रहे थे, जिन्हें मैंने शौकिया पूरा किया। एक मर्तबा मैं कोलकाता मेट्रो से ट्रैवल कर रहा था कि सामने बैठे एक शख्स ने मुझसे कहा कि ‘क्या मैं डेली सोप में काम करना चाहूंगा?’ मैंने कहा, ‘लेकिन वैâसे?’ उसने कहा, ‘मुझे ऑडिशन देना होगा।’ खैर, मैंने ऑडिशन दिया और ‘गुड्डन तुमसे न हो पाएगा’ के लिए मेरा सिलेक्शन हो गया। इस शो ने मुझे सब कुछ दिया। मैंने कुछ ओटीटी शो और ‘क्यूट कमीना’, ‘इश्क ने क्रेजी किया रे’ जैसी फिल्में भी कीं। लेकिन मेरी पहचान टीवी से बनी इसलिए मैं छोटे पर्दे का शुक्रगुजार हूं। आज सोचता हूं अगर उस दिन वो कास्टिंग डायरेक्टर मेट्रो में नहीं मिलता तो क्या आज मैं यहां होता? कुछ बातें किस्मत ही तय करती हैं।

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