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मोदी सरकार की महंगाई और बेरोजगारी में जीना मुश्किल मरना आसान!

कर्ज से परेशान शख्स की गर्भवती पत्नी ने की आत्महत्या 
किसानों, व्यापारियों के बाद अब नौकरीपेशा वर्ग भी कर रहा सुसाइड

सामना संवाददाता / ठाणे
केंद्र की मोदी सरकार देश को गर्त की तरफ धकेल रही है। देश में महंगाई और बेरोजगारी चरम पर है, फिर भी लोगों को धर्म और जाति के नाम पर गुमराह किया जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि इस स्थिति में लोगों को जीना मुश्किल लग रहा है और मरना आसान। इसी कड़ी में मुंबई से सटे ठाणे में एक २५ वर्षीय गर्भवती महिला ने अपने घर के हॉल में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। इस मामले में वर्तकनगर पुलिस स्टेशन ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, महिला का पति कर्ज से काफी परेशान था। जहां पहले कर्ज और बेरोजगारी से किसान और व्यापारी ही सुसाइड करते थे, वहीं अब नौकरीपेशा वर्ग भी परेशान होकर आत्महत्या जैसा कदम उठाने लगा है।
क्या था मामला? 
बता दें कि सावरकरनगर इलाके में आरजे ठाकुर कॉलेज के सामने साई बिल्डिंग में महिला अपने पति और बच्चों के साथ रहती है। घटना वाले दिन पति लकी अपनी मां के पास गया था, जो उसी इमारत की छठी मंजिल पर रहती हैं। इसी दौरान पत्नी ने घर में ही फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। इसके बाद पति समेत परिजन मौके पर पहुंचे और इस घटना की जानकारी पुलिस को दी। प्रथम दृष्टया यह बात सामने आई है कि पति के कर्ज से परेशान होकर उसने आत्महत्या की है। मरनेवाली महिला के दो छोटे-छोटे बच्चे हैं।
सुसाइड और सामूहिक आत्महत्या के बढ़े मामले  
अभी कुछ दिन पहले ही छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के में पति-पत्नी और बेटी ने खुदकुशी कर ली थी। बताया जाता है कि यह परिवार भी कर्ज और बेरोजगारी से परेशान था। वहीं गाजियाबाद में भी एक शख्स ने अपने कारखाने में फांसी लगा लिया। बरामद सुसाइड नोट में लिखा गया है कि महंगाई और आर्थिक तंगी के चलते वह आत्महत्या कर रहा है। महंगाई की वजह से मरनेवालों के कई मामले सामने आ चुके हैं।
बर्बादी के मुहाने पर नौकरीपेशा वर्ग 
बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी की वजह से नौकरीपेशा वर्ग बर्बादी के मुहाने पर आ गया है। जिस दर से महंगाई बढ़ रही है, उस दर से लोगों की आय में वृद्धि नहीं हो रही है। किसान कर्ज से परेशान है, व्यापारी घाटे से परेशान है, तो वहीं नौकरीपेशा वर्ग अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी न होने की वजह से परेशान हैं।

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