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गंदा है पर धंदा है… ‘सर तन से जुदा’ बना अरबों का बिजनेस!

  • पाकिस्तानी स्कॉलर ने उगला था जहर
  •  पूर्व चांसलर जफर सरेशवाला ने सार्वजनिक किया राज

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
धर्मयुद्ध यानी जिहाद के नाम पर मुसलमानों खासकर नवयुवकों को आतंक की आग में झोंकने की कट्टरपंथियों का साजिश की कीमत आज पूरी दुनियाभुगत रही है। इस वजह से आज कुछ इस्लामिक देश जहन्नुम से भी बदतर हो गए हैं। लेकिन फिर भी कट्टरवाद की आग लगातार फैलती जा रही है। अब नबी यानी पैगंबर साहब की शान में गुस्ताखी के नाम पर ‘सर तन से जुदा’ यानी इंसानों की नृशंस हत्या की नई प्रथा शुरू हो गई है। जिसकी आड में वसूली का गंदा धंधा फलपूâल रहा है। ऐसा सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पिछले कुछ समय से कट्टरपंथियों की ओर से निशाना बनाए जा रहे लोगों के मामले में ऐसी जानकारी सामने आई कि ‘सिर तन से जुदा’ रूपी आतंक का यह नया तरीका अब अरबों की वसूली का कारोबार बन चुका है। ऐसा खुलासा पांच महीने पहले एक इस्लामिक स्कॉलर ने किया था। ऐसी जानकारी राजनीतिक विश्लेषक और मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी के पूर्व चांसलर जफर सरेशवाला ने सार्वजनिक की है।
बता दें कि पूर्व चांसलर जफर सरेशवाला का कहना है कि ‘सर तन से जुदा’ का जुमला पाकिस्तान से निकला है और अब यह बिजनेस बन गया है। उन्होंने ऐसा पाकिस्तान आधारित संगठन दावत-ए-इस्लामी के संबंध में कहा हैं। जफर सरेशवाला ने ये बातें एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में कही हैं। उन्होंने इस दौरान यह भी दावा किया है कि पांच महीने पहले पाकिस्तान के एक स्कॉलर ने शुक्रवार के अपने धार्मिक उपदेश में इस बात का जिक्र किया था कि ‘सर तन से जुदा’ अब अरबों का बिजनेस बन चुका है। दावत-ए-इस्लामी, सुन्नी बरेलवी मुस्लिम संगठन है। पाकिस्तान आधारित इस संगठन के बारे में जफर सरेशवाला ने कहा है कि वह इसका विरोध पिछले २५ साल से कर रहे हैं।
कर रहा जड़ें फैलाने की कोशिश
वहीं दावत-ए-इस्लामी की वेबसाइट पर पाकिस्तान आधारित इस संगठन के ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, कनाडा, हांगकांग, कोरिया, अमेरिका और ब्रिटेन में सक्रिय होने की बात कही गई है। हालांकि इसके हिंदुस्थान में काम करने की बात वेबसाइट पर नहीं है। इसके बावजूद यह संगठन भारत में अपनी जड़ें पैâलाने की कोशिश कर रहा है। राजस्थान के उदयपुर में कट्टरपंथियों की ओर से की गई दर्जी की हत्या का मामला ऐसे ही संकेत दे रहा है। इस हत्या में शामिल आरोपियों का कनेक्शन दावत-ए-इस्लामी से होने की बात सामने आई थी। गौरतलब हो कि उदयपुर की घटना के बाद जांच में सामने आया था कि दोनों आरोपी लगातार विदेश दौरे पर भी गए थे। वहीं दावत-ए-इस्लामी की बात करें तो इस संगठन के पाकिस्तान में बड़ी संख्या में फॉलोअर्स हैं। यह लोगों को कट्टरपंथ के बारे में प्रभावित करता है। साथ ही शरिया कानून की भी यह संगठन वकालत करता है।
‘जहर को फैलने से रोकना होगा’
राजनीतिक विश्लेषक जफर सरेशवाला ने इस संबंध में कहा कि उन्होंने करीब १० साल पहले पाकिस्तान के इस्लामिक स्कॉलर्स से कहा था उन्हें इस जहर (सर तन से जुदा) को फैलने से रोकना होगा। राजस्थान के उदयपुर में हुई दर्जी की हत्या के बाद इस तरह की खबरें आई थीं कि उस दौरान दावत-ए-इस्लामी की ओर से ऑनलाइन स्तर पर कट्टरपंथी एजेंडे को बढ़ावा दिया गया था। उसकी ओर से उनके एजेंडे से मुस्लिमों को प्रभावित करने की बात भी देखने को मिली थी।

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