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सिर्फ छलावा है रु. २०० की छूट :  केंद्र सरकार की कारगुजारी, रु. ३० लाख करोड़ की मुनाफाखोरी!

२०२४ में केंद्र की मोदी सरकार की लुटिया डूबनेवाली है। इस बात का अहसास अब खुद मोदी सरकार को हो चुका है। इसकी पहली झलक ठीक रक्षाबंधन के एक दिन पहले देखने को मिली जब मोदी सरकार ने घरेलू गैस सिलिंडर के दामों में २०० रुपए की कमी करके बहनों को तोहफा देने का ढोल खूब जोर-शोर से पीटा। ऐसा करके मोदी सरकार एक तीर से कई शिकार करने की कोशिश कर रही है। एक तो वह यह दिखाना चाहती है कि वह महंगाई के प्रति काफी गंभीर है। दूसरे वह देश की महिला शक्ति का विश्वास जीतना चाहती है। उसे लगता है कि ऐसा करके उनका वोट हासिल कर लेगी। मोदी सरकार में यह डर राजस्थान में गहलोत सरकार ने पैदा किया है जहां वे ५०० रुपए में सिलिंडर दे रहे हैं। मगर आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि सिलिंडर में यह २०० रुपए की कमी करने से पहले केंद्र की मोदी सरकार पेट्रोलियम उत्पादों से अपनी झोली में एक दो नहीं बल्कि पूरे ३० लाख करोड़ रुपए की मुनाफाखोरी कर चुकी है।
मोदी सरकार की यह मुनाफाखोरी इसलिए भी चिंता का विषय है क्योंकि यह पैसा देश की जनता से लूटा गया है। जब बाजार में क्रूड ऑयल के भाव कम थे तब भी सरकार ने बहाना बनाकर देश में पेट्रोलियम उत्पादों के भाव कम नहीं किए थे। पर अब चुनावी हार के डर ने मोदी सरकार को घुटने पर ला दिया है।
हमलावर कांग्रेस
मोदी सरकार द्वारा घरेलू रसोई गैस के दामों में प्रति सिलिंडर २०० रुपए की कमी के पैâसले पर कांग्रेस ने तीखा हमला किया है। कांग्रेस ने इसे मोदी सरकार का खेल करार देते हुए दावा किया है कि केंद्र सरकार ने पिछले नौ वर्षों में एलपीजी के दाम में १८५ प्रतिशत की वृद्धि की और अब सिर्फ १७.५ प्रतिशत की कमी की है। पार्टी प्रवक्ता और सोशल मीडिया विभाग की प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की ताकत के चलते सरकार रसोई गैस के दाम कम करने के लिए मजबूर हुई। सुप्रिया ने एक वीडियो जारी कर दावा किया कि इस सरकार ने पिछले ९.५ वर्ष में र्इंधन पर कर बढ़ाकर ३० लाख करोड़ रुपए की मुनाफाखोरी की है। खरीद की क्षमता के अनुसार, दुनिया में सबसे महंगी रसोई गैस हिंदुस्थान में बिकती है। देश में रसोई गैस के दाम वर्ष २०१४ में ४०० रुपए प्रति सिलिंडर थे, जो २०२३ में १,१४० रुपए हो गए। उनके मुताबिक, हिंदुस्थान में रसोई गैस के दाम ‘सऊदी अरामको’ के एलपीजी दाम और डॉलर एवं रुपए के मूल्य के आधार पर निर्भर करता है। सऊदी अरामको के एलपीजी दाम के मुताबिक, जनवरी, २०१४ में एलपीजी की कीमत १०१० डॉलर प्रति मीट्रिक टन थी, जो जनवरी, २०२३ में घटकर ५९० डॉलर प्रति मीट्रिक टन रह गई। अगस्त, २०२३ में एलपीजी का दाम ४७० डॉलर प्रति मीट्रिक टन था।’

सस्ता क्रूड, महंगा पेट्रोल
गैस की कीमत भले ही २०० रुपए कम हो गई पर पेट्रोल-डीजल के दाम पिछले १५ माह से जस के तस हैं। सरकारी तेल कंपनियों ने आखिरी बार २१ मई २०२२ को पेट्रोल पर ८ रुपए और डीजल पर ६ रुपए प्रति लीटर उत्पाद शुल्क घटाया था। तब क्रूड ऑयल का भाव १०९.५१ डॉलर था। इसके बाद जून २०२३ में ये ३१.५७ फीसदी गिरकर ७५ डॉलर से नीचे आ गए, लेकिन पेट्रोल-डीजल सस्ते नहीं हुए। २०२३-२४ की अप्रैल-जून तिमाही में इन तेल कंपनियों को ३१,१५९ करोड़ रुपए का अभूतपूर्व मुनाफा हुआ है। जानकारों का कहना है कि तेल कंपनियों के पास पेट्रोल-डीजल में ५ से ६ रुपए की कटौती करने की गुंजाइश है।

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