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डॉक्टरों को ओपीडी में आठ बजे आना अनिवार्य है …मनपा अस्पतालों के लिए जारी हुआ परिपत्र

• देरी से पहुंचने वाले डॉक्टरों पर होगी कार्रवाई
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
मनपा अस्पतालों में ओपीडी का समय निश्चित है। इसके बावजूद ओपीडी में डॉक्टरों के देरी से पहुंचने के कारण हजारों मरीजों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। डॉक्टरों की इस मनमानी की शिकायत मरीज आए दिन करते रहते हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए अब मनपा के सभी प्रमुख अस्पतालों में ओपीडी सुबह आठ बजे से ही शुरू करने पैâसला किया गया है। इसे लेकर जारी परिपत्र में आदेश दिया गया है कि सभी डॉक्टर सुबह आठ बजे ही ओपीडी में पहुंचें। इस पर निगरानी रखने की जिम्मेदारी अस्पतालों के डीन पर होगी, वहीं यह भी कहा गया है कि ओपीडी में देरी से पहुंचने पर संबंधित डॉक्टरों को कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
मनपा के अतिरिक्त आयुक्त सुधाकर शिंदे द्वारा १९ दिसंबर को जारी आदेश में कहा गया है कि अब से किसी भी स्थिति में ओपीडी में मरीजों की जांच सुबह आठ बजे से शुरू हो जानी चाहिए। डॉक्टर इस समय का सख्ती से पालन करें। इसके लिए अब से उनकी हाजिरी बायोमेट्रिक तरीके से लगेगी। आदेश में यह भी कहा गया है कि यह बायोमेट्रिक अटेंडेंस डॉक्टर के वेतन से जुड़ी होगी। खास बात यह है कि मरीजों का रजिस्ट्रेशन सुबह सात बजे से शुरू करने को कहा गया है, ताकि ओपीडी में आनेवाले मरीजों को समय पर इलाज मिल सके। डॉ. सुधाकर शिंदे का मानना है कि इससे मरीजों और उनके परिजनों को होने वाली परेशानी बंद हो जाएगी।
अस्पतालों में सालाना तीन करोड़ मरीजों का होता है इलाज
केईएम अस्पताल के ओपीडी में सालाना २१ लाख ५२ हजार मरीजों का इलाज होता है, जबकि सायन अस्पताल में १९ लाख मरीज इलाज के लिए आते हैं। नायर में सालाना ११ लाख, कूपर में ७.५ लाख मरीजों का इलाज किया जाता है। इसके अलावा नायर डेंटल अस्पताल के ओपीडी में लगभग आठ लाख रोगियों का इलाज किया जाता है। इस तरह मनपा के इन पांच मेडिकल कॉलेजों व मनपा के संबद्ध अस्पतालों के ओपीडी में सालाना ६८ लाख २० हजार मरीजों का इलाज किया जाता है।

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