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लोकतंत्र को बचाने के लिए मोदी सरकार को उखाड़ फेंकना जरूरी : येचुरी

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
केंद्र की सत्ता में आने के बाद नरेंद्र मोदी के नेतृत्ववाली भाजपाई सरकार अपने आठ वर्षों के कार्यकाल में विपक्ष को खत्म करने की हरसंभव कोशिश करती रही है। धन और केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करके विपक्षी सांसदों, विधायकों एवं अन्य नेताओं को तोड़कर, खत्म करके भाजपा अपना ‘विकास’ कर रही है। भाजपा की मनमानी एवं दादागीरी के खिलाफ अब विपक्ष भी लामबंद होने लगा है। माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव सीताराम येचुरी ने शनिवार को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से उन नीतियों में तुरंत बदलाव करने की मांग की, जिसके तहत बड़े कॉरपोरेट घरानों को सब्सिडी और कर लाभ दिया गया है। उन्होंने इन कंपनियों को बड़ी मात्रा में दिए गए ऋण की वसूली करने की भी मांग की है। देश भर में माकपा द्वारा आयोजित १० दिवसीय ‘देश रक्षणा भेरी’ के समापन के अवसर पर एक जनसभा को संबोधित करते हुए, पार्टी महासचिव ने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने आठ साल के कार्यकाल के दौरान संविधान और देश की अर्थव्यवस्था को नष्ट कर दिया है। येचुरी ने मोदी सरकार को सत्ताच्युत करने के लिए धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक दलों से हाथ मिलाने का आह्वान करते हुए कहा, ‘यदि आप ऐसा (नीतियों में बदलाव) नहीं करते हैं तो हम आपको सत्ता से हटा देंगे और एक नई जन-हितैषी सरकार लाएंगे।’ येचुरी ने कहा, ‘मोदी के मित्रों-बड़े कॉरपोरेट घरानों को दिए गए ११ लाख करोड़ रुपए के ऋण को बट्टे खाते में डाल दिया गया। उन्हें कर लाभ के रूप में दो लाख करोड़ रुपए दिए थे। यह जनता के पैसे की एक खुली लूट है।’ येचुरी ने जोर देते हुए कहा कि मोदी के शासन में केवल पांच-छह उद्योगपति अरबों डॉलर के मालिक बन गए हैं। मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले उद्योगपति गौतम अडानी दुनिया के अमीरों की सूची में ३३०वें स्थान पर थे, लेकिन अब वे विश्व के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं, जबकि २०-२५ आयु वर्ग के ४२ प्रतिशत युवा बेरोजगार हैं। उन्होंने दावा किया कि देश भर में आत्महत्या से ११ हजार से अधिक युवाओं की मौत हो गई, क्योंकि वे नौकरी हासिल नहीं कर सके, जबकि सरकार में लाखों पद खाली हैं। येचुरी ने यह भी कहा कि सभी भाजपा-शासित राज्यों में धर्मनिरपेक्षता खतरे में है, अल्पसंख्यकों पर हमले के लिए कानूनों में बदलाव किया जा रहा है और महिलाओं एवं दलितों पर अत्याचार बढ़े हैं। इसलिए देश और संविधान की रक्षा के लिए तैयार अन्य लोगों को एक धर्मनिरपेक्ष विकल्प बनाने के लिए एकजुट किया जाना चाहिए।’

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