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ड्राइविंग पर ब्रेक जरूरी

कविता श्रीवास्तव

मुंबई की सड़कों पर बीते जनवरी से जून तक के मात्र छह महीनों में कुल १३२ सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं और इनमें १४७ लोगों की जानें गई हैं। यह आंकड़ा और किसी ने नहीं स्वयं मुख्यमंत्री ने विधानसभा में प्रस्तुत किया है। सड़कों पर इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जानें जाना कोई साधारण बात नहीं है। इसका कारण है रैश ड्राइविंग और यातायात नियमों की अनदेखी। यह गंभीर अपराध है। लेकिन गैरजिम्मेदार लोग इसकी फिक्र नहीं करते। हालांकि, पुलिस का ट्रैफिक विभाग उन पर सख्त कार्रवाई करता है। लेकिन इसके बावजूद लोग एक-दूसरे से आगे बढ़ जाने की होड़ में दूसरों की जान जोखिम में डालते हैं। इसी तरह समृद्धि सुपर एक्सप्रेसवे पर भी आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं। सरकार मानवीय गलतियों को इसका जिम्मेदार बताती है। इसी तरह मुंबई की सड़कों पर भी वाहनों की तेज रफ्तार दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण है। इसीलिए मुंबई ट्रैफिक पुलिस ने अपने ताजा आदेश में मुंबई की नौ प्रमुख सड़कों पर वाहनों की स्पीड लिमिट भी तय कर दी है। इनमें प्रमुख जंक्शन और उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण सड़कें शामिल हैं। मुंबई में वैसे तो ट्रैफिक सिपाही हर जगह मोबाइल वैâमरे में यातायात नियमों को तोड़ने वालों की तस्वीरें उतारते दिखते हैं। दोषियों को ई-चालान भी भेजा जाता है, लेकिन हजारों लोगों ने अभी तक जुर्माने की राशि नहीं भरी है। यह रकम करोड़ों रुपए में है। वसूली के लिए अब लोक अदालत की नोटिस भेजी जा रही है। इसी के तहत केवल ठाणे में ही मात्र नौ दिनों में एक करोड़ ४० लाख से अधिक की राशि यातायात पुलिस के पास लोगों ने भर दिए हैं। मुंबई में भी करोड़ों रुपए की राशि का जुर्माना वसूला जाना बाकी है। हालांकि, बीते दिनों एक नेता ने यातायात पुलिस को वसूली विभाग कह कर भी तंज कसा था, लेकिन यह भी समझना होगा कि यातायात नियमों का पालन सभी की जिम्मेदारी है। लापरवाह ड्राइविंग से न केवल दुर्घटनाएं होती हैं, बल्कि वे लोग भी अक्सर नाहक शिकार बनते हैं, जो नियम से चलते हैं। दूसरों की रैश ड्राइविंग के कारण सही से चल रहे वाहनचालक भी कन्फ्यूज हो जाते हैं। प्रशासन हमेशा लोगों को सही ढंग से गाड़ी चलाने की हिदायत देता है। इसके बावजूद ढेर सारे लोग हिदायतों पर कभी ध्यान नहीं देते, इसीलिए कई घरों के चिराग केवल इसलिए बुझ गए क्योंकि उन्होंने ट्रैफिक रूल्स का पालन नहीं किया, लापरवाही बरती। आजकल वैसे भी तेज रफ्तार वाले आधुनिक वाहनों का चलन बढ़ गया है। मुंबई में अनेक नए फ्लाईओवर, हाईवे और तेज रफ्तार से चलने योग्य सड़कें बनी हुई हैं। ढेर सारे लोग इन पर कलाबाजी दिखाने से भी बाज नहीं आते। गाड़ियों की रफ्तार पर ब्रेक लगाने के लिए प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ लोगों में जागरूकता और सामाजिक चेतना जगाना भी जरूरी है। इसके लिए सामाजिक स्तर पर भी प्रयास होने चाहिए।

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