मुख्यपृष्ठग्लैमर‘इसे बता पाना बेहद मुश्किल है!’-रवि गोसाईं

‘इसे बता पाना बेहद मुश्किल है!’-रवि गोसाईं

बहुमुखी प्रतिभा के धनी अभिनेता रवि गोसाईं का जिक्र निकलते ही शो ‘सीआईडी’ का नाम तुरंत आंखों के सामने घूम जाता है। ‘सीआईडी’ के अलावा फिल्म ‘डेढ़ इश्किया’ और ‘शूट आउट एट लोखंडवाला’ फिल्मों को नहीं भुलाया जा सकता, जिसमें रवि गोसाईं के परफॉर्मेंस की काफी तारीफ हुई। अनेक टीवी शो और दर्जनों फिल्मों में यादगार किरदार निभाने वाले रवि गोसाईं इन दिनों शो ‘मेहंदी वाला घर’ में नजर आ रहे हैं। पेश है रवि गोसाईं से पूजा सामंत की बातचीत के प्रमुख अंश-

शो ‘मेहंदी वाला घर’ स्वीकारने की क्या वजह रही?
जबसे मैंने एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा, ऊपरवाले का शुक्र है कि कभी फिल्म तो कभी टीवी के लिए मेरे पास लगातार काम आता रहा। शायद ही कभी मुझे घर बैठना पड़ा हो। इस बार शायद पहली बार मेरे साथ ऐसा हुआ कि जब इस शो का ऑफर मुझे मिला, मैं वाकई कुछ नहीं कर रहा था। यह है असली वजह। मुझे मेरा किरदार जिंदगी से जुड़ा हुआ लगा इसलिए इनकार करने की कोई वजह नहीं थी।

अपने किरदार के बारे में आप क्या कहेंगे?
अग्रवाल परिवार एक संयुक्त और आदर्शों पर चलने वाला परिवार है। मेरे किरदार का नाम अजय है। अजय के किरदार में जो शेड्स है, वो चैलेंजिंग है। अजय वैसे तो पहलवान है जो शादी नहीं करना चाहता, लेकिन उसकी शादी करवाई जाती है। बेचारा मजबूरी में शादी कर लेता है। एक ब्रह्मचारी व्यक्ति की जबरदस्ती शादी करवाने पर उसकी मनस्थति क्या होगी, इसे बता पाना बेहद मुश्किल है। अजय की जिंदगी का ट्रैक उसकी शादी के बाद पूरी तरह बदल जाता है। एक और दिलचस्प बात शो में जब फ्लैशबैक में मेरी कहानी चलती है, तब मुझे जवान दिखाया गया है। अपनी उम्र से २० साल कम नजर आना मेरे लिए बड़ा चैलेंज था, जो कहानी का खूबसूरत एंगल है।

शो की कहानी आपको रिलेटेबल क्यों लगी?
‘मेहंदी वाला घर’ शो की कहानी संयुक्त परिवार के आपसी प्यार, अपनापन, एकता, अखंडता, मतभेद जैसे कई मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित करती है। मैं इस शो में खुद का प्रतिबिंब देखता हूं। वास्तविक जिंदगी में हम ४ भाई हैं और चारों भाइयों में बहुत प्यार था। अक्सर हम चारों भाई साथ में खाना खाते थे। धीरे-धीरे तीन भाइयों की शादी हो गई और मैं अकेला रह गया। आगे चलकर मेरी भी शादी हुई। ‘मेहंदी वाला घर’ में दिखाई उन छोटी-छोटी बातों को याद कर मैं नॉस्टैल्जिक हो जाता हूं।

कई किरदारों के बीच शो में क्या आपके किरदार को न्याय मिल पाएगा?
इस शो में न कि सिर्फ कई किरदार हैं, बल्कि परफॉर्मेंस के लिए सभी के पास समान मौका है। हर किरदार की अपनी कहानी और उन्हें जस्टिफाई करनेवाली सिचुएशन भी है। इस कहानी में कोई भी किरदार नेगेटिव नहीं, बल्कि इमोशंस से भरपूर कहानी है।

क्या आपको लगता है कि नई कहानियों और लेखकों की इंडस्ट्री में कमी है?
इस दौर में लेखक-निर्देशक आपस में बातचीत तो करते हैं, लेकिन सभी का काफी सारा वक्त मोबाइल देखने और मोबाइल पर बातचीत करने में चला जाता है, जो सच्चाई है। इंसान की जिंदगी का अधिकांश वक्त मोबाइल ने ले लिया है। ऐसे में वैâसे वक्त मिलेगा नई पीढ़ी को अपनी क्रिएटिविटी दिखाने का? अब लोग किताबें नहीं पढ़ते। अगर किताबें पढ़नी भी हैं तो उन्हें मोबाइल पर पढ़ी नहीं देखी जाती हैं। दर्शकों का भी टेस्ट बदल चुका है। जमाना भी कामचोर बन चुका है।
बहरहाल, आपकी जर्नी कैसी रही?
मेरी जर्नी अच्छी रही, लेकिन जो फिल्म या टीवी शो हिट हो जाता है, बस उसी को याद रखा जाता है। क्या यह गलत नहीं कि जो एक्टर हिट नहीं होता उसे कम आंका जाता है। लोग उसे भुला देते हैं। मैं अपनी बात करूं तो ऐसे कई किरदार हैं जिन्हें मैंने पूरी शिद्दत से निभाया, लेकिन लोगों ने उसे भुला दिया। अगर किरदार फिल्म का हो और फिल्म नहीं चली तो किरदार भी आया-गया हो जाता है। मेरे साथ भी ऐसा कई बार हुआ इसलिए दिल खट्टा हो जाता है।

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