मुख्यपृष्ठनए समाचारआईटी सेक्टर का धंधा मंदा : २.६० लाख लोगों ने गंवाई नौकरी!

आईटी सेक्टर का धंधा मंदा : २.६० लाख लोगों ने गंवाई नौकरी!

चुनावी मूड में मस्त केंद्र सरकार का देश की अर्थव्यवस्था पर ध्यान ही नहीं है। आईटी सेक्टर बुरे दौर से गुजर रहा है। हाल ही में खबर आई है कि पेटीएम से १,००० कर्मचारियों की छंटनी की जा रही है। इसके पहले बायजू से ऐसी ही खबर आई थी। अब यह साल तो समाप्त हो रहा है और २०२४ के लक्षण भी ठीक नहीं दिख रहे हैं।
गौरतलब है कि साल २०२३ की शुरुआत गूगल और फेसबुक जैसी कंपनियों में लोगों की नौकरियां जाने से हुई थी। वैश्विक स्तर पर नाइकी ने भी २०२३ के अंत से पहले सैकड़ों लोगों को नौकरी से निकालने की घोषणा की है। इससे यह आशंका पैदा हो गई है कि क्या छंटनी का यह दौर २०२४ में भी जारी रहेगा? यदि नहीं, तो किन क्षेत्रों में नई नौकरियां आएंगी? असुरक्षित ऋण पर आरबीआई के नए दिशा-निर्देशों के कुछ ही दिनों बाद, पेटीएम से लगभग १,००० लोगों को नौकरी से निकाले जाने की खबर है। अगर वैश्विक आंकड़ों को एक तरफ रख दें तो साल २०२३ भारत के लिए भी नौकरी छूटने के मामले में बुरा रहा है। `लेऑफ्स.एफवाईआई’ के आंकड़ों के मुताबिक, देश की १,१७५ छोटी-बड़ी टेक कंपनियों ने २०२३ में २.६० लाख लोगों को नौकरी से निकाल दिया। ये आंकड़ा ऐसा था कि २०२२ में १,०६४ कंपनियों ने १.६४ लाख लोगों की नौकरियां छीन लीं। इस तरह छंटनी के मामलों में ५८ फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है। भारत में स्टार्टअप सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं। ग्लोबल फंडिंग बंद होने के बाद देश की करीब १०० स्टार्टअप कंपनियों ने करीब १५,००० लोगों को नौकरी से निकाल दिया है। सबसे खराब स्थिति बायजू में देखने को मिली, जहां इस साल २,५०० से ज्यादा लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी। अगर हम बाजार के रुझान की वास्तविकता की जांच करें तो २०२४ में ज्यादातर कंपनी के लोगों को अपने ऑफिस वापस जाना होगा। कंपनियां अब वापस ऑफिस पर जोर दे रही हैं। कंपनियां वर्क प्रâॉम होम से दूरी बना रही हैं, लेकिन यह पूरी तरह खत्म नहीं होने वाला है। नए साल में एआई और मशीन लर्निंग जैसी नई तकनीकों पर काम करने वाले लोगों की मांग रहेगी। ऐसे में लोगों को री-स्किलिंग या अप-स्किलिंग पर ध्यान देना होगा।

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