मुख्यपृष्ठग्लैमर‘मेरे लिए यह बड़ा शॉक था!’ -नितांशी गोयल

‘मेरे लिए यह बड़ा शॉक था!’ -नितांशी गोयल

सिनेमाघरों में रिलीज होने के बाद ‘लापता लेडीज’ जब नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई तो दर्शकों का इसे जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। फिल्म ‘लापता लेडीज’ में अपने किरदार ‘फूल कुमारी’ से लोगों का दिल जीतनेवाली नितांशी गोयल ने बिना अभिनय का कोई प्रशिक्षण लिए अपने सहज और सादगी भरे अभिनय से सभी का दिल जीत लिया है। पेश है, नितांशी गोयल से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

फिल्म ‘लापता लेडीज’ की सफलता के बाद आपकी जिंदगी और करियर में कितना बदलाव आया?
फिल्म की रिलीज के बाद मेरी जिंदगी ने ३६० डिग्री करवट ले ली है। फिल्म के किरदारों ने आम दर्शकों के दिलों में स्थान बनाया और फूल कुमारी यानी मेरा किरदार लोगों को बेहद पसंद आया। मुझे घर की बहू-बेटी सा प्यार मिल रहा है। मैं जैसे नेशनल क्रश बन चुकी हूं। इस प्यार और अपनेपन से मैं अभिभूत हूं। फिल्म और ओटीटी से काफी ऑफर्स आ रहे हैं। स्टारडम का अनुभव पाकर मैं खुशी महसूस कर रही हूं।

क्या ‘लापता लेडीज’ के लिए आपने ऑडिशन दिया था?
आमिर खान के प्रोडक्शन से जब मुझे ऑडिशन के लिए फोन आया तो मुझे विश्वास ही नहीं हुआ। इतना बड़ा कलाकार मुझे कैसे अप्रोच कर सकता है, जबकि मेरी कोई आइडेंटिटी ही नहीं बनी थी। मैंने उनके स्टाफ से तीन मर्तबा पूछा, क्या उन्होंने मुझे ऑडिशन के लिए बुलाया है? इस पर उन्होंने फोन पर मुझे कहा, हां, आमिर खान ने ही आपको ऑडिशन के लिए बुलाया है। मेरे लिए यह बड़ा शॉक था। फूल कुमारी के गेटअप में मैंने उन्हें ऑडिशन दिया और दूसरे ही दिन मुझसे कहा गया कि आमिर खान और किरण राव ने लंच पर आमंत्रित किया है। मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा था। मैं जब दूसरे दिन उनके ऑफिस पहुंची तो दोनों वहां उपस्थित थे। उन्होंने मुझे इतना कम्फर्टेबल महसूस करवाया की क्या बताऊं? मैंने इतना अविस्मरणीय अनुभव आज तक महसूस नहीं किया।

शहरी माहौल में परवरिश होने के बावजूद आप फूल कुमारी का किरदार कैसे कर पाईं?
मैं अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनने में यकीन करती हूं। आत्मविश्वास और मेहनत पर भी मेरा काफी विश्वास है। जब ‘फूल कुमारी’ के लिए मैंने ऑडिशन दिया उससे पहले ही मुझे लग रहा था कि इस किरदार को निभाने का मौका मुझे मिलेगा। मेरी परवरिश नोएडा में हुई और अर्बन लाइफ स्टाइल में मैं पली-बढ़ी हूं। ऑडिशन देने से पहले मैंने ‘नदिया के पार’ और ‘बालिका वधू’ जैसी फिल्में देखीं और कई पुरानी फिल्मों में मैंने बालिकाओं को देखा जो १२-१३ वर्ष में दुल्हन बनी हैं। उनके सिर्फ गेटअप नहीं देखे, बल्कि उनकी बॉडी लैंग्वेज देखी कि वो क्या चाहती हैं, वैâसे बोलती और चलती हैं। कई बातों को ऑब्जर्व करने के बाद मैंने ऑडिशन दिया और मैं पास हुई। व्यक्तिगत जिंदगी में मैं जींस-पैंट से लेकर सभी मॉडर्न कपड़े पहनती हूं, लेकिन ‘लापता लेडीज’ की १६ वर्षीय फूल कुमारी सिर्फ साड़ी पहनती है और सिंदूर, चूड़ियां, बिछिया यही उसका सिंगार और उसकी जिंदगी है।

सुना है आपने खुद को टैन कर लिया था?
जब फूल कुमारी के किरदार के लिए मैं कन्फर्म हो गई तब मैंने किरण राव को यह सुझाव दिया कि यदि फूल कुमारी के किरदार के लिए मेरी स्किन टैन हो तो किरदार में और भी जान आ जाएगी। फूल कुमारी को ज्यादा से ज्यादा रीयल और ऑथेंटिक दिखाने के लिए मैंने तीन-चार महीने तक आइब्रो और वैक्सिंग नहीं करवाई। तकरीबन तीन-चार महीने तक मैं बिना सनस्क्रीन लगाए धूप में बैठी रही। चार महीने बाद जब सभी ने मेरा स्किन टोन देखा तो सभी आश्चर्यचकित हो गए। मैं साड़ी, चूड़ियां, सिंदूर और सांवली स्किन में जिसे हू-बहू फूल कुमारी नजर आ रही थी।

जुबान में देहाती टच लाने के लिए आपने क्या किया?
मैंने ‘लापता लेडीज’ की शूटिंग शुरू होने से पहले काफी पुरानी फिल्में देखीं, जैसा कि मैंने बताया अभिनेत्रियों के लुक सहित उनकी बोली-भाषा और परिधान का अभ्यास किया। इसके अलावा शूटिंग शुरू होने से पहले हमारे लिए नियुक्त टीचर सोनू आनंद ने मेरे लहजे पर काफी काम किया।

फिल्म की शूटिंग कहां हुई?
पहले ही रेलवे की एक पूरी ट्रेन शूटिंग के लिए आरक्षित की गई थी। स्क्रिप्ट के अनुसार ट्रेन के डिब्बे में जिन्हें सवार होना था, उन्हें उसमें बिठाया जाता था। शूटिंग नासिक में हुई और इंटीरियर के शॉट्स की शूटिंग भोपाल स्थित सीहोर में की गई।

आपने खुद को फूल कुमारी से कितना रिलेट किया?
फूल कुमारी और मेरे परिवेश में जमीन-आसमान का अंतर है, लेकिन फूल कुमारी की कई बातें मेरे अंतर्मन को हमेशा के लिए छू गर्इं। उसके मासूम लेकिन परिपक्व विचारों ने मुझे झिंझोड़ दिया। अपने पति के प्रति उसका सच्चा प्यार, भारतीय आदर्श और संस्कार, अच्छी सोच और अपने पिया को हर हाल में वापस पाने की उसकी चाहत, उसका कॉन्फिडेंस बहुत गजब है। मैं भी सभी से प्यार का रिश्ता बनाए रखना चाहती हूं।

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