मुख्यपृष्ठग्लैमरउनके साथ काम करना कंफर्टेबल फील करता है!-संयमी खेर

उनके साथ काम करना कंफर्टेबल फील करता है!-संयमी खेर

मशहूर अभिनेत्री उषा किरण ने शायद सोचा नहीं होगा कि उनकी पोती संयमी खेर उनके पदचिह्नों पर चलते हुए अभिनय में अपना नाम रोशन करेगी। फिल्म ‘मिर्जया’ से अपना अभिनय सफर हिंदी फिल्मों में शुरू करनेवाली संयमी ने तेलुगू फिल्मों में भी अपने अभिनय के जलवे बिखेरे हैं। इन दिनों संयमी खेर अपनी फिल्म ‘घूमर’ से सुर्खियों में हैं। पेश है, संयमी खेर से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

• फिल्म ‘घूमर’ साइन करने की मुख्य वजह क्या रही?
फिल्म की कहानी जैसे ही मैंने आर. बाल्की से सुनी, मैं भावुक हो गई। पिछले काफी समय से मैंने इतनी इमोशनल कहानी नहीं सुनी थी। मैं बचपन से क्रिकेट को पसंद करती आई हूं। स्कूल और कॉलेज के दिनों में मैंने क्रिकेट खेला और मंजे हुए खिलाड़ी की तरह मैंने अवॉर्ड जीते। खैर, आज से ४ वर्ष पहले बाल्की ने मुझे टूर्नामेंट में क्रिकेट खेलते हुए देखा और कहानी का प्रस्ताव मेरे सामने रखा। मैं कैसे और क्यों यह मौका हाथ से जाने देती?

• क्या इसके लिए आपको काफी होमवर्क करना पड़ा?
मेरे किरदार का नाम अनिका है। अनिका एक उम्दा क्रिकेट खिलाड़ी है, लेकिन दुर्घटनावश उसका हाथ कट जाता है। कैसे एक हाथ से वो बॉलिंग, फील्डिंग, बैटिंग करते हुए देश का नाम रोशन करती है। इस कहानी की मध्यवर्ती रूपरेखा कुछ ऐसी ही है। कास्टिंग होने के बाद मुझे ४ महीनों का समय दिया गया कि मैं अपने लेफ्ट हैंड से क्रिकेट खेलने की प्रैक्टिस करूं। मेरे लिए ऐसा करना आसान नहीं था। बरसों पहले मेरे राइट हैंड का अंगूठा बैडमिंटन खेलते समय प्रैâक्चर हुआ था, तो लेफ्ट हैंड से खेलने में मुझे बड़ी मुश्किल हुई। यहां तो मुझे क्रिकेट खेलते हुए वो भी लेफ्टी बनकर ही पूरी शूटिंग करनी थी। यह प्रैक्टिस बहुत टफ थी।

• फिर आपने प्रैक्टिस कैसे की?
अपने दिन की शुरुआत से ही मैंने लेफ्ट हैंड का इस्तेमाल शुरू कर दिया। राइट हैंड की बजाय लेफ्ट हैंड का प्रयोग कर मैंने ब्रशिंग की शुरुआत कर दी। खाना बनाना, खाना भी लेफ्ट हैंड से खाना, लेफ्ट हैंड से लिखने की प्रैक्टिस यह सब करने में वक्त लगा, लेकिन महसूस हुआ इसमें नामुमकिन कुछ भी नहीं है।

• अभिषेक बच्चन और बाल्की के साथ काम करना कितना अलग कितना खास था?
अभिषेक बच्चन बेहद संवेदनशील अभिनेता हैं। अपने पापा और मम्मी से बिल्कुल १९ नहीं, बल्कि २० ही हैं। मुझे उनके साथ काम करना बहुत कंफर्टेबल फील कराता है। अभिषेक खुद अच्छे खिलाड़ी हैं, उन्हें स्पोर्ट्स फील्ड की काफी जानकारी है। एक दिव्यांग क्रिकेट खिलाड़ी का रोल करने में उन्होंने मेरी काफी मदद की। बाल्की ने इस फिल्म के लिए मेरा सिलेक्शन किया, जो मेरे लिए किसी तोहफे से कम नहीं है।

• आप क्या फर्क महसूस करती हैं, ग्लैमर और स्पोर्ट्स इंडस्ट्री में?
सच कहूं तो मुझे लगता है कि स्पोर्ट्स की दुनिया काफी विनम्रता से भरी है। स्पोर्ट्स ज्यादातर टीम वर्क के कारण जीते जाते हैं। खेल की निपुणता आपको बहुत ज्यादा विनम्र बना देती है। अभिनय की दुनिया में मैं बहुत सीनियर अभिनेत्री तो नहीं हूं, लेकिन मेरी फीलिंग है कि अभिनय की दुनिया ऐसी नहीं होगी। हर माता-पिता को अपने बच्चों को स्पोर्ट्स एक्टिविटीज में जरूर शामिल करना चाहिए। स्पोर्ट्स में आपकी कॉम्पिटिशन सिर्फ खुद से होती है। स्पोर्ट्स में होनेवाली हार-जीत हम सभी को जीवन का फलसफा अपने आप सिखा देती है, इंसान हवा में नहीं उड़ता।

• फिर आपने क्यों नहीं स्पोर्ट्स में करियर बनाना चाहा?
मेरे पापा अद्वैत खेर काफी नामी पैâशन फोटोग्राफर रह चुके हैं, मां उत्तरा खेर सुपर मॉडल, मेरी दादी अपने जमाने की मशहूर अभिनेत्री उषा किरण थीं, मेरी सिस्टर संस्कृति भी मॉडल अभिनेत्री है, मेरी बुआ तन्वी खेर (तन्वी आजमी) भी नामचीन अभिनेत्री हैं, हम सभी पारिवारिक सदस्य कला-अभिनय से संबंधित हैं। मॉडलिंग के दिनों में मुझे सामने से साउथ की फिल्मों में मौका मिला। उसके बाद फिल्म ‘मिर्जया’ में मौका मिला। ‘मिर्जया’ के असफल होने के बावजूद मुझे काम मिलता रहा। हां, मैं बैडमिंटन, स्विमिंग, क्रिकेट में अच्छी हूं। फुल मैराथन २०१७ में पुरस्कार ले चुकी हूं।

• क्या आपके पैरेंट्स नहीं चाहते थे कि आप दोनों सिस्टर्स अभिनय में आएं?
मेरे मॉम-डैड ने अपने क्षेत्रों में काफी सफलता पाई, लेकिन हमारी जड़ें सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार की रही हैं। उन दोनों की सोच थी कि अगर हमारा परिवार मुंबई में रहेगा तो हम ग्लैमर वर्ल्ड की तरफ आसानी से आकर्षित हो सकती हैं। लिहाजा, जब हम स्कूल में थे तभी पापा-मम्मी ने मुंबई को गुडबाय कह दिया और हम नासिक शिफ्ट हो गए। लेकिन अंतत: हमारी किस्मत हमें ग्लैमर की दुनिया में ही ले आई।

• आप अपने करियर ग्राफ से कितनी संतुष्ट हैं?
एक एक्टर के रूप में मुझे बहुत आगे बढ़ना है। लेकिन मेरे लिए यह माइल स्टोन है कि मुझे अभिषेक बच्चन, शबाना आजमी तथा आर. बाल्की के साथ काम करने का मौका फिल्म ‘घूमर’ ने दिया है। मेरे परिवार ने मुझे बहुत सपोर्ट किया है और मैं अपने मम्मी-पापा की वजह से हमेशा उत्साह और प्रेरणा के साथ आगे बढ़ती गई हूं।

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