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अडानी के खिलाफ आर्टिकल लिखना पड़ा भारी! पत्रकारों की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने चार पत्रकारों को बड़ी राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। इन चारों पत्रकारों ने अपने आर्टिकल में अडानी समूह की आलोचना की थी, जिसके बाद गुजरात पुलिस ने इन सभी को तलब किया था। बता दें कि अडानी-हिंडनबर्ग विवाद को लेकर दो पत्रकारों द्वारा लिखे गए आर्टिकल को ऑर्गनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (ओसीसीआरपी) की वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया था, जबकि दो अन्य पत्रकारों के आर्टिकल को फाइनेंशियल टाइम्स ने प्रकाशित किया था।

गुजरात सरकार को मिला एक हफ्ते का समय

इस मामले की सुनवाई जस्टिस हृषिकेश रॉय और जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने की। ओसीसीआरपी पत्रकारों के वकील ने अनुरोध किया कि मामले की सुनवाई जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस प्रकाश कुमार मिश्रा की खंडपीठ द्वारा की जाए, जिन्होंने उन्हें सुप्रीम कोर्ट के नियमों के अनुसार राहत दी थी। जिसका विरोध गुजरात सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने किया। मेहता ने कहा कि कोई भी सुनवाई के लिए खंडपीठ नहीं चुन सकता, क्योंकि यह सुप्रीम कोर्ट (कोई व्यक्तिगत खंडपीठ नहीं) है, जो मामले की सुनवाई कर रहा है। इस मामले में अब गुजरात सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है।

अमदाबाद पुलिस ने किया था तलब

सूत्रों के अनुसार, अडानी-हिंडनबर्ग विवाद को लेकर पत्रकार रवि नायर और आनंद मंगनाले को नोटिस भेजा गया था। अमदाबाद पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अक्टूबर में इन दोनों को यह कहते हुए बुलाया था कि वह योगेशभाई मफतलाल भंसाली नामक निवेशक के आवेदन के आधार पर प्रारंभिक जांच करना चाहती है। हालांकि, इन दोनों ने ३ नवंबर को शीर्ष अदालत में गिरफ्तारी से राहत प्राप्त कर ली थी। इसके बाद अदालत ने १० नवंबर को फाइनेंशियल टाइम्स के दो अन्य पत्रकारों बेंजामिन निकोलस ब्रुक पार्विâन और क्लोई नीना कॉर्निश को भी राहत दी थी।

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