मुख्यपृष्ठग्लैमरयह बिल्कुल सच है : मुग्धा गोडसे

यह बिल्कुल सच है : मुग्धा गोडसे

मॉडलिंग के शिखर पर रह चुकीं मॉडल मुग्धा गोडसे इस वक्त पॉलिटिकल थ्रिलर फिल्म ‘खेला होबे’ की वजह से सुर्खियों में हैं। इस फिल्म में एक सामान्य युवती जो सैलून की मालकिन है, अचानक राजनीति में जाने के बाद शतरंज की चालें कैसे चलने लगती है,- इसे दिलचस्प तरीके से दर्शाया है। इस समय मुग्धा ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी काफी सक्रिय हो चुकी हैं। पेश है, मुग्धा गोडसे से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

  • कनाडा में १५ अगस्त का अनुभव कैसा रहा?
    मैं और राहुल देव अभी कनाडा से लौटे हैं। मैं एक आध्यात्मिक इंसान हूं और गुरु तारनिव को मानती हूं। कनाडा में बड़ी तादाद में भारतीय लोग रहते हैं। मेरे आध्यात्मिक गुरु ने मुझे और राहुल को कनाडा में भारतीय स्वतंत्रता दिन के लिए चीफ गेस्ट के रूप में आमंत्रित किया था। जब उन्होंने वहां आने का न्योता दिया तो हम वहां गए। वहां भारतीय माहौल और हिंदी में बातचीत करनेवाले भारतीय नागरिकों को देखकर महसूस हुआ कि मैं कहीं हिंदुस्थान में तो नहीं हूं।
  • फिल्म ‘खेला होबे’ स्वीकारने की क्या वजह रही?
    इसकी सबसे बड़ी और अहम वजह ये थी कि किरदार बहुत अलग और नायिका प्रधान है। सभी कलाकार सशक्त रोल के साथ ही उसमें भिन्नता चाहते हैं। इस फिल्म में मैंने सैलून मालकिन का किरदार निभाया है, जो आगे चलकर राजनीति में सक्रिय हो जाती है। ये एक थ्रिलर कम कॉमेडी फिल्म है।
  • आप राजनीति में कितनी दिलचस्पी रखती हैं?
    इस किरदार के लिए मैंने खुद रिसर्च की है। एक सैलून मालकिन जिसे राजनीति की कोई सूझबूझ नहीं, वो राजनीति में जाने पर एक नहीं कई गलतियां कर सकती है। सैलून चलानेवाली महिला का नाम है सलोनी, जो राजनीति के अखाड़े में जाने के बाद बेगम दीदी बन जाती है। वैसे, मैं राजनीति की नॉर्मल नॉलेज रखती हूं। लेकिन अपनी राय जाहिर करना यानी ट्रोल होनेवाली बात है।
  • क्या ये सच है कि बतौर सेल्सगर्ल आपने पुणे में तेल, साबुन जैसी चीजें बेची हैं?
    यह बात बिल्कुल सच है। मेरे बचपन में १०० रुपए की वैल्यू भी अच्छी-खासी थी। आज के टीनएज बच्चों को एक हजार महीना पॉकेट मनी भी कम पड़ जाता है। कॉलेज के दिनों में पॉकेट मनी के लिए कई सारे स्टूडेंट्स पार्ट टाइम करते हैं। मैंने भी पॉकेटमनी के लिए ये काम किया, परंतु मेरी मां इस बात को नहीं जानती थीं। जरूरत पड़ने पर किसी से पैसे मांगना मुझे अच्छा नहीं लगता था। मैं आत्मनिर्भर बनना चाहती थी। मैं चाहती थी कि मैं अपनी पॉकेट मनी से साइकल खरीदूं और इसके लिए मैंने पैसे जमा किए थे।
  • क्या आप अभी भी इंडिपेंडेंट हैं खासकर पैसों के मामले में?
    और नहीं तो क्या? राहुल देव मेरे पार्टनर हैं। हम साथ में जिंदगी बिता रहे हैं। विदेश जाते हैं लेकिन अपने सारे खर्चे मैं खुद करती हूं और मैं अपना क्रेडिट कार्ड खुद इस्तेमाल करती हूं।
  • अब तक का आपका सफर कैसा रहा?
    मैं शिखर पर कभी नहीं रही लेकिन बिना किसी संघर्ष के मुझे अच्छे प्रोजेक्ट्स मिलते रहे, मेरी फिल्मों का चलना न चलना मेरे हाथों में नहीं है। काफी समय से बॉलीवुड के मेगास्टार्स की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर नहीं चल रही हैं। इसकी मुख्य वजह है स्क्रिप्ट का कमजोर होना। २००८ में फिल्म ‘फैशन’ रिलीज हुई थी और इतने समय बाद भी मैं इंटरव्यू दे रही हूं इसका मतलब तो है कि मैंने अपनी जगह कुछ हद पा ली है। मुझे अपनी जर्नी से कोई मलाल नहीं है।
  • सुना है आप ओटीटी पर काफी व्यस्त हैं?
    ओटीटी प्लेटफॉर्म अच्छे कलाकारों को काफी मौके दे रहा है। वेब शो ‘ब्रोकन’ में मुझे जयदीप अहलावत और सोनाली बेंद्रे जैसे एक्टरों के साथ काम करने का मौका मिला। ओटीटी प्लेटफॉर्म कलाकारों को मनचाहे मौके के साथ स्तरीय काम देता है। यहां काम करना मुझे बड़ी संतुष्टि देता है।

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