मुख्यपृष्ठग्लैमर`ये सब मेरे दर्शकों का प्यार है!'-मौली गांगुली

`ये सब मेरे दर्शकों का प्यार है!’-मौली गांगुली

टीवी जगत की मशहूर एक्टर मौली गांगुली दो साल के लंबे अंतराल के बाद एक बार पुन: टेलीविजन पर वापसी कर चुकी हैं। इस बार वे एंड टीवी के माइथोलॉजिकल शो, ‘बाल शिव’ में अनुसुइया का अहम किरदार निभा रही हैं। प्रस्तुत है, अभिनेत्री मौली गांगुली से सोमप्रकाश `शिवम’ की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-
 धारावाहिक `बाल शिव’ में महत्वपूर्ण किरदार अनुसुइया के लिए आपका चयन होना कितना आसान रहा?
देखिए आसान तो कतई नहीं रहा। इस किरदार के चयन के लिए मुझे कई तरह के ऑडिशन से गुजरना पड़ा क्योंकि इस शो के निर्देशक बहुत ही अनुभवी व क्रिएटिव व्यक्ति हैं। इस किरदार के लिए उन्होंने मेरा चयन काफी सोच-समझकर किया।
अन्य किरदारों की अपेक्षा कितना आसान होता है धार्मिक किरदार निभाना?
एक कलाकर के लिए उसकी मेहनत के साथ-साथ ऐसे किरदार निभाने पर उसकी जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। इस तरह के धारावाहिकों में जिस तरह का किरदार होता है, कलाकर के लिए उसकी उसी तरह की गरिमा भी बनाए रखना होता है। साथ ही किरदार की वेशभूषा भी काफी लिमिटेशन में रहती है, तो उसे संजोए रखने में काफी मशक्कत उठानी पड़ती है।
 टीवी इंडस्ट्री में लगातार मिल रही लोकप्रियता को आप वैâसे देखती हैं?
ये तो सब मेरे दर्शकों का प्यार है, जो उन्होंने मुझे इस काबिल बनाया। वैसे भी टीवी इंडस्ट्री पहले की अपेक्षा अब बहुत विस्तार ले चुकी है यहां सफलता की संभावनाएं ज्यादा आकार लेती रहती हैं और ये हमेशा कलाकारों को उनकी पहचान दिलाने में मददगार साबित होंगी।
क्या कारण है जिसके चलते टीवी की अपेक्षा फिल्मों में आपको वो शोहरत हासिल नहीं हो पा रही, जिसकी आप असली हकदार हैं?
सच कहूं तो मुझे फिल्मों में अभी तक उस तरह के किरदार निभाने को नहीं मिले जैसा मैं सीरियलों में निभाती हूं। मुझे मेरे सीरियलों के जैसा किरदार निभाने का जब भी अवसर मिलेगा मैं फिल्मों में भी वही सफलता अर्जित कर लूंगी।
आज सिनेमा में बढ़ रही अश्लीलता को आप कैसे देखती हैं?
सिनेमा समाज का दर्पण है, तो आज जो समाज में व्याप्त है सिनेमा उसी पर निर्भर हो गया। वैसे आज समाज की हकीकत को बयां कर रहा है सिनेमा। पहले इकलौता दूरदर्शन हुआ करता था, जिसमें लिमिटेशन ज्यादा रहती थीं लेकिन अब पब्लिक हो गया तो थोड़ी पाबंदियां कम हो गई और कुछ नहीं।
 क्या सुरक्षा की दृष्टि से आज महिलाओं को सिनेमा के क्षेत्र में करियर स्थापित करना ज्यादा आसान हो गया है?
आसान तो आज किसी भी इंडस्ट्री में नहीं होता काम पाना, उसके लिए आपको जी-तोड़ मेहनत करनी पड़ती है। मेरे खयाल से लड़कियां ही नहीं अपितु लड़कों को भी बहुत संघर्ष करना पड़ता है किसी भी क्षेत्र में करियर स्थापित करने के लिए।

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