मुख्यपृष्ठग्लैमर‘उसे देखकर बहुत अच्छा लगता है!’

‘उसे देखकर बहुत अच्छा लगता है!’

फिल्म ‘बेताब’ से अपना फिल्मी सफर शुरू करनेवाले सनी देओल ने इस फिल्म में अपनी मासूमियत से रोमांस की परिभाषा ही बदल दी थी। इस फिल्म से अपार सफलता प्राप्त करनेवाले सनी देओल २००१ में रिलीज हुई अनिल शर्मा निर्देशित ‘गदर- एक प्रेमकथा’ से भी तहलका मचा चुके हैं। वहीं २१ वर्षों के बाद एक बार फिर सनी देओल फिल्म ‘गदर-२’ की सफलता के बाद बुलंदियों पर हैं। पेश है, सनी देओल से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

 कैसा रहा गोवा के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में आपका शरीक होना?

वैसे तो ‘इफ्फी’ में मेरा पहली बार पार्टिसिपेशन हुआ। वहां पर मेरे तीन प्रिय निर्देशकों राजकुमार संतोषी, राहुल रवैल और अनिल शर्मा के साथ एक तरह की मास्टर क्लास संपन्न हुई। ऐसा मौका और इत्मीनान से बातचीत करने का मौका मुंबई में शायद ही कभी मिलता। मेरे अब तक के करियर में मैंने इन तीनों डायरेक्टर्स के साथ सुपरहिट फिल्में दी हैं। हमारी मुलाकात और बातचीत मुझे बेइंतहा इमोशनल कर गई। इन तीनों ने जब ये कहा कि सनी बड़ा इमोशनल एक्टर है, तो इन तीनों के साथ की गई फिल्मों के सीन तब मुझे याद आ गए जब उनका फिल्मांकन करते समय मेरी आंखें सचमुच में भर आई थीं। कभी-कभी पुरानी यादें हम सबको रिचार्ज कर देती हैं।

 आपकी ऐसी कौन-सी फिल्में हैं, जिनकी शूटिंग के वक्त आपकी आंखें भर आई थीं?

फिल्म ‘अपने’ की शूटिंग जब मैं पापा (धर्मेंद्र) के साथ कर रहा था उस वक्त जब मैं, बॉबी और पापा एक प्रâेम में होते थे तो मैं इमोशनल हो जाता था। पापा भी मेरी तरह बहुत भावुक इंसान हैं। ‘गदर- एक प्रेमकथा’, ‘घायल’, ‘गदर-२’ ऐसी कई फिल्में हैं, जिनके सीन फिल्माते समय मेरी आंखें भर आई थीं। मेरे डायरेक्टर्स मेरे जज्बातों को समझते हैं।

 ‘गदर-२’ की अपार सफलता से आपके करियर में कितना बदलाव आया?

दरअसल, मैं तब भी नहीं समझा और आज भी नहीं समझ पा रहा हूं। २००१ में मेरी फिल्म ‘गदर- एक प्रेमकथा’ ने बॉक्स ऑफिस पर हंगामा मचा दिया। इस फिल्म की तुलना ‘लगान’ से हो रही थी। ये दोनों फिल्में एक ही दिन रिलीज हुर्इं और दोनों बॉक्स ऑफिस पर कामयाब रहीं। लेकिन ‘गदर-१’ के बाद मुझे जैसी दमदार स्क्रिप्ट्स मिलनी चाहिए थी नहीं मिली।

 आपके लिए ‘गदर-२’ में सबसे बड़ा चैलेंज क्या था?

मैं शुरू से आज तक कभी भी एक्शन सीन करते समय डरा अथवा घबराया नहीं। डैड ने तो कई डेयर डेविल सीन खुद निभाए हैं। आखिर मैं और बॉबी उनके बेटे हैं। बॉबी भी एक्शन सीन करने में माहिर है। ‘गदर-१’ का तारा सिंह काफी युवा था लेकिन जब ‘गदर-२’ बनी तो स्वाभाविक है मेरी उम्र भी बढ़ गई। २१ वर्षों का बदलाव काफी होता है। उम्र का फासला ये एक बड़ा चैलेंज था।

 सीक्वेल करने में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?

सबसे बड़ा उदाहरण तो ‘गदर-१’ और ‘गदर-२’ का है। राहुल रवैल की फिल्में ‘अर्जुन’ और ‘अर्जुन पंडित’ यह सीक्वल मैंने किया। कहानियां और किरदार मजबूत होने के कारण मैंने उन फिल्मों को स्वीकारा। मैंने आंखें बंद की और अपने मेकर्स पर विश्वास रखा। मेरा यही विश्वास मुझे आगे बढ़ाने में कामयाब रहा।

 अपने पिता धर्मेंद्र के करियर के बारे में आपकी क्या राय है?

मैं बेहद खुश हूं कि मेरी फिल्म ‘गदर-२’ को बेहद अच्छा रिस्पॉन्स मिला तो वहीं दूसरी ओर पापा अभिनीत फिल्म ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ को बहुत प्यार मिला। बॉबी का करियर अच्छा जा रहा है। बॉबी अभिनीत फिल्म ‘एनिमल’ में बॉबी के किरदार को लोगों ने पसंद किया और फिल्म के सारे स्टार्स खासकर रणबीर, अनिल कपूर को ऑडियंस ने बहुत प्यार दिया। पापा को जब शूटिंग करते हुए देखता हूं तो बहुत अच्छा लगता है। इस उम्र में अपने काम के प्रति जो उनका जज्बा है उसे देखकर बहुत अच्छा लगता है।

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