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जब दे मेट! … खुशकिस्मती है दोनों बच गए!

मनमोहन सिंह
एन्ना गुमसुम अपने बेड पर पड़ी हुई थी। उसका चेहरा उदास हुआ था और सूनी नजरों से छत की ओर ताक रही थी। दोपहर के १२ बज चुके थे। दरवाजा कमरे का पूरी तरह बंद नहीं था। एक्रिन दूसरे कमरे में कुछ लिख रही थी। डोर बेल की आवाज से वह उठी और आहिस्ता कदमों से चलते हुए दरवाजे तक पहुंची। उसने दरवाजा खोला तो सामने एजेल खड़ा था।
‘हैलो…’ उसने आहिस्ते कदम भीतर रखते हुए कहा। ‘हम्मम’ दरवाजे से बगल होते एक्रिन ने सिर्फ इतना ही कहा।
‘बाहर बहुत गर्मी है।’
‘जुलाई का महीना है गर्मी तो होगी लेकिन आज टेंपरेचर ४५ डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। तुम यहां आज वैâसे?’ एक्रिन ने सवाल किया।
‘एन्ना को देखने आया हूं। कल ही राशाद को देखा। अभी अस्पताल में ही है। एन्ना की बड़ी फिक्र हो रही है उसे। उसे पता ही नहीं कि एन्ना है या नहीं! बहुत दुखी है। उसने मुझसे एन्ना की तस्वीर शेयर की है। एन्ना की तस्वीर देखते ही मेरी जुबान से उसका नाम निकल गया तो चौंक गया था। चौंका तो तुम्हारे नाम का जिक्र करने पर भी था वह। उसकी हालत देखकर बड़ा दर्द हुआ मुझे।’
‘और किसी की हालत देखकर दर्द नहीं होता तुम्हें?’
‘होता है बहुत होता है लेकिन…’
‘लेकिन क्या?’
‘एक्रिन हम दोनों एक साथ हैं, एक शहर में हैं और एक ही देश के हैं। सोचो हम कितने लंबे अरसे के बाद मिले हैं। हमें मिलना ही था। यह डेस्टिनी है। इसलिए हम मिले। हम स्कूल में साथ पढ़ते थे। उसके बाद तकरीबन २०-२२ सालों बाद हमारी मुलाकात हुई।’
‘अब राशाद और एन्ना को देखो। दोनों अलग-अलग देशों से हैं। दोनों देशों के हालात ऑलमोस्ट एक जैसे ही हैं। और किस्मत का खेल देखो, इस देश में जहां पर दोनों मिले वहां के हालात ने उन्हें जुदा कर दिया। यह खुशकिस्मती है कि दोनों बच गए।’
‘छोड़ो एन्ना कहां है?’
एक्रिन एजेल का हाथ पकड़कर उस कमरे की ओर ले गई जहां एन्ना लेटी हुई थी। दरवाजा आधा खुला हुआ था। एक्रिन ने भीतर झांककर देखा। टेबल पर उसका नाश्ता पड़ा हुआ था। एन्ना लेटी हुई थी। वह एजेल का हाथ पकड़कर भीतर घुसी।
उसने आवाज को थोड़ा तेज करते हुए कहा, ‘यह क्या है एन्ना आज भी तुमने नाश्ता नहीं किया? दोपहर का खाना भी नहीं खाओगी और रात को भी भूखी सो जाओगी। ऐसे कितने दिनों तक चलेगा… क्या तुमने अपनी हालत देखी है?’
एंजेल कि एन्ना पर नजर पड़ी। उसका चेहरा मुरझा गया था। आंखों में चमक नहीं थी। बाल यूं ही बिखरे हुए थे। होंठों पर पपड़ी जम गई थी। क्या यही वह एन्ना है जिसे देखकर उसने कहा था, ‘एन्ना यू आर एन एंजिल।’
उसने उसके माथे पर हाथ फेरते हुए कहा, ‘ऐसा नहीं करते स्वीट एंजिल। तकलीफें तो हर एक की जिंदगी का हिस्सा हैं। अंधेरी रात हमेशा नहीं रहती, रात को जाना है और दिन को आना ही है।’
एंजिल बेड के बगल स्थित चेयर पर बैठ गया। एक्रिन ने सहारा देकर एन्ना को बिठाया। उसने कहा कि पीने के लिए ‘अयरान’ ले आओ’ फिर रुककर कहा, ‘नहीं, शरबत ले आओ।’ कुछ वक्त गुजरा और एक्रिन तीन गिलास शरबत ले आई।
उसने अपने हाथों से शरबत का गिलास अन्ना के होंठों पर लगाया और कहा, ‘इसे पी लो थोड़ी राहत मिलेगी शरीर को ताकत मिलेगी’ उसने कहा।

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