मुख्यपृष्ठसमाचारजेड मोड़ टनल का समय से पहले कार्य पूरा होने की उम्मीद

जेड मोड़ टनल का समय से पहले कार्य पूरा होने की उम्मीद

  • लद्दाख सीमा तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी यह सुरंग

सुरेश एस डुग्गर / जम्मू

करीब ६.५ किमी लंबी जेड-मोड़ सुरंग पर काम जिस तेज गति से बढ़ रहा है उससे अब यह उम्मीद जगने लगी है कि यह निर्धारित समय से पहले ही पूरी हो जाएगी। यह टनल एक रणनीतिक परियोजना का हिस्सा है और कश्मीर व लद्दाख के बीच साल भर संपर्क सुनिश्चित करने की दिशा में पहला कदम भी है। इस टनल पर जिस गति से कार्य चल रहा है उससे यही उम्मीद जताई जा रही है कि जुलाई २०२३ के निर्धारित समय से पहले ही यह लद्दाख सीमा तक पहुंच को आसान बना देगी। बता दें कि टनल का काम करनेवाली कंपनियों नेशनल हाइवे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन और इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड के अधिकारियों ने बताया कि श्रीनगर-लेह हाइवे पर गंगनार इलाके के पास बन रही जेड-मोड़ टनल प्रोजेक्ट पर काम तेजी से चल रहा है। यह सुरंग कश्मीर के बीच प्रसिद्ध पर्यटन स्थल, सोनमर्ग के साथ हर मौसम में संपर्क सुनिश्चित करेगी, जो आमतौर पर भारी बर्फबारी और हिमस्खलन के कारण सर्दियों के दौरान बंद रहता है। पत्रकारों से बात करते हुए, एनएचआईडीसीएल के वरिष्ठ महाप्रबंधक, वी़ के. पांडे ने कहा कि जेड-मोड़ सुरंग पर काम तेज गति से चल रहा है और अगले साल जुलाई में ही इसका कार्य पूरा हो जाएगा जबकि इसकी निर्धारित तिथि तक दिसंबर २०२३ तय की गई है। उन्होंने कहा कि अप्रोच रोड के निर्माण और लाइनिंग, लाइटिंग, फिनिशिंग और वेंटिलेशन जैसे आंतरिक कार्य सहित केवल ३० से ४० प्रतिशत काम ही लंबित हैं। जबकि एप्को इंफ्राटेक के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एस प्रसाद ने बताया कि जल्द ही सुरंग का काम पूरा होने के बाद इसे संबंधित अधिकारियों को सौंप दिया जाएगा।
प्रसाद ने कहा कि ६.५ किमी लंबी जेड-मोड़ सुरंग सोनमर्ग को ५ किमी संपर्क सड़क के साथ जोड़ेगी। यह एक बाय डेरेक्शनल सुरंग के साथ-साथ किसी भी घटना के लिए बचानेवाली सुरंग हैं। यह सुरंग केंद्र द्वारा घोषित रू़ २३७९ करोड़ की परियोजना का एक बड़ा हिस्सा है। तत्कालीन मुख्य कार्यकारी एजेंसी आईएल एंड एफएस द्वारा वित्तीय समस्याओं के चलते इस काम को छोड़ दिया गया था जिस कारण २०१७ और २०१९ के बीच जेड-मोड़ सुरंग पर काम दो साल के लिए रुका हुआ था। फिर केंद्र सरकार को परियोजना के लिए दूसरी बार २४ जून २०१९ को बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर (बीओटी) वार्षिकी आधार पर बोलियां आमंत्रित करनी पड़ीं। बाद में सरकार ने महत्वपूर्ण -जेड मोड़ सुरंग को एपको अमरनाथजी टनलवे प्राइवेट लिमिटेड के हवाले कर दिया।

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