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नहीं सुधरी वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे की जामवाली स्थिति मेट्रो का नहीं हुआ कोई लाभ! ५ वर्षों में मुंबई की सड़कों पर बढ़े ३५ प्रतिशत वाहन

अभिषेक कुमार पाठक / मुंबई
‘वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे’ का नाम लेते ही यह अनगिनत मुंबईकरों को रोजाना यात्रा के दौरान होनेवाली कठिनाइयों की याद दिलाता है। अपने काम के लिए निकलनेवाले व्यक्ति उम्मीद से ज्यादा समय वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर बिता रहे हैं। लोगों को आशा थी कि मेट्रो शुरू होने से दैनिक यात्रा करनेवालों का जाम कुछ कम होगा, लेकिन ऐसा होता हुआ नजर नहीं आ रहा है। हाईवे पर रोजाना यात्रा करनेवाले लोगों के लिए अंधेरी से हवाई अड्डे तक की सीधी यात्रा करना एक दु:स्वप्न में बदल गया है। लोगों को इस दौरान काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बता दें कि वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे मीरा रोड के उपनगरीय क्षेत्रों से बांद्रा तक पैâला हुआ है।

मेट्रो शुरू होने के बावजूद यही स्थिति
जनवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भव्यता के साथ उद्घाटन की गई मेट्रो लाइन-२ए और ७ की कल्पना डब्ल्यूईएच की भीड़ को कम करने के समाधान के रूप में की गई थी। उस दौरान कुछ समय के लिए यात्रियों ने राहत व्यक्त की, क्योंकि काफी संख्या में लोगों ने सड़क यात्रा की बजाय मेट्रो की सवारी को चुना। उस वक्त वेस्टर्न एक्सप्रेसवे ने एक अस्थायी राहत का अनुभव किया, यह काफी कम भीड़भाड़वाला समय था। हालांकि, कुछ दिनों बाद ही फिर से वही जामवाली स्थिति निर्माण हो गई है।
‘निजी वाहनों के आदी लोगों के लिए यह नई मेट्रो रास नहीं आई। थोड़े समय के लिए आनंददायक होने के बावजूद वे अनिवार्य रूप से सड़क यात्रा पर लौट आए।’ गोरेगांव के एक निवासी ने स्पष्ट किया, जो खुद मेट्रो और एसी ट्रेन लोकल में परिवर्तित हो गए थे। ‘७९ साल की उम्र में मैंने मेट्रो और एसी लोकल के साथ प्रयोग किया, लेकिन अनुभव अनुकूल नहीं रहा। पीक आवर्स के दौरान यात्रा करने या मेट्रो लाइनें बदलने से मेरे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ा और मेरी अपनी कार के बराबर नहीं है। निश्चित रूप से मुंबई में ऐसे कई लोग हैं, जो मेरी भावनाओं से सहमत हैं।

‘ ५ वर्ष में बढ़े ३५ फीसदी वाहन
अपनी निराशा के अलावा मुंबईवासी भविष्य में शहर की यातायात संभावनाओं को लेकर भी निराश हैं। राज्य के हालिया आर्थिक सर्वे के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में मुंबई की सड़कों पर वाहन घनत्व में ३५ प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘बढ़ती आबादी और बढ़ते वाहनों के साथ, इस यातायात की दल-दल से बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता सड़क विस्तार और अतिरिक्त फ्लाईओवर है। यह मुंबईकरों की पीड़ा को कम करने और बनाए रखने का एकमात्र तरीका है।’ मेट्रो-२ए दहिसर-पूर्व से डीएन नगर के बीच चलती है, जबकि ७ अंधेरी-पूर्व को दहिसर-पूर्व से जोड़ती है। जनवरी २०२२ के आंकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र में ४.०९ करोड़ वाहन हैं। इसमें से मुंबई में ४२.१३ लाख वाहन हैं। २०२१ की तुलना में २०२२ में दोपहिया वाहनों की संख्या ४.९ प्रतिशत, हल्की मोटर कारों और जीप की संख्या ३.५ प्रतिशत बढ़ गई। शहर की कुल संख्या में से मार्च २०२२ तक मुंबई सेंट्रल आरटीओ में १२.४६ लाख वाहन रजिस्टर्ड थे। जिनमें ७.४ लाख दोपहिया वाहन, ३.८८ लाख कारें, २६,१६० मीटर टैक्सी और २९,६७२ ट्रैवेल्स वैâब शामिल थीं।

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