" /> महाराष्ट्र सरकार का मेगा प्लान…जन-वन और जीवन को मिलेगी सुरक्षा!

महाराष्ट्र सरकार का मेगा प्लान…जन-वन और जीवन को मिलेगी सुरक्षा!

♦ आरे में थमेगा मानव-वन्यजीव संघर्ष
♦ निवासियों को सुरक्षित स्थान पर बसाया जाएगा
♦ सीसीटीवी से होगी वन्यजीवों की निगरानी

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई जैसे महानगर में भी मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की घटनाएं घट रही हैं। संजय गांधी नेशनल पार्क के आस-पास के रिहायशी इलाकों में जंगली जानवर आ जाते हैं और इंसानों पर हमले करते हैं। बीते ६ महीने में आरे कॉलोनी में इंसानों पर जंगली जानवर के पांच हमले हुए हैं। हालांकि वन विभाग ने खूंखार तेंदुए को पकड़ लिया है लेकिन यह संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। वन्यजीवों और जैव विविधता को बचाए रखने के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अगुवाईवाली महाविकास आघाड़ी सरकार ने अहम कदम उठाया है।

आरे कॉलोनी और आसपास के इलाकों में इंसानों द्वारा अतिक्रमण किए जाने से समस्या गंभीर हुई है। अब जंगली जानवर भोजन की तलाश में इंसानी बस्तियों में पहुंच रहे हैं। ऐसे में पालतू जानवरों और इंसानों पर जंगली जानवरों के हमले हो रहे हैं। इस मानव और वन्यजीव संघर्ष को खत्म करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने कई योजनाएं बनाई हैं। नेशनल पार्क के जंगल में रहनेवाले आदिवासियों के अलावा अतिक्रमण करके रहनेवाले पात्र लोगों को सुरक्षित स्थान पर बसाने का निर्णय लिया गया है। नेशनल पार्क के जंगल में रहनेवाले लोगों को सुरक्षित स्थान पर बसाया जाएगा और उन्हें मुख्यधारा में लाया जाएगा। साथ ही नेशनल पार्क के सुरक्षा घेरे को मजबूत किया जाएगा ताकि जंगली वन्यजीव इंसानी बस्तियों में न आ सकें। जंगली जानवरों को उनके इलाके में भोजन व पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे की अगुवाई में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है।
स्थानीय विधायक रविंद्र वायकर बताते हैं कि मानव के साथ वन्य जीवों और वृक्षों की सुरक्षा जरूरी है। इंसानों के अतिक्रमण के कारण यह समस्या बढ़ी है। इस मामले को लेकर मैं विधानसभा में अपनी राय रख चुका हूं। अतिक्रमण को लेकर मैंने शिकायतें भी की हैं। इस समस्या के समाधान के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे के नेतृत्व में हम लगातार प्रयास कर रहे हैं। आरे के १० हजार आबादी वाले २७ आदिवासी बस्तियों का पुनर्वास हमें करना है। म्हाडा के माध्यम से उन्हें ४०५ वर्ग फुट का घर और सरकारी नौकरी मिले, ऐसी हमारी मांग है। वर्ष २०३४ तक का प्लान बनाया गया है।
वैकल्पिक जमीन की तलाश शुरू
नेशनल पार्क के बाहर पात्र अतिक्रमणकारियों के पुनर्वास के लिए फ्लैटों का निर्माण कार्य स्लम पुनर्वास प्राधिकरण को सौंपा गया है। कुल ११,३५९ अतिक्रमणकारियों का पुनर्वास किया गया है। शेष का पुनर्वास बाकी है। आरे कॉलोनी में दी गई १९० एकड़ जमीन पुनर्वास के लिए उचित नहीं है, वैकल्पिक जमीन की तलाश की जा रही है। संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में ४३ आदिवासी पाड़ों में १,७९५ परिवार रहते हैं। इसके अलावा गैर-आदिवासी पात्र अतिक्रमणकारियों को फ्लैट दिए जाएंगे।
८०८ एकड़ जमीन जंगल घोषित
पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे की पहल से आरे कॉलोनी की ८०८ एकड़ भूमि को जंगल घोषित किया गया है। इस ग्रीन जोन एरिया में कोई अतिक्रमण नहीं कर सकता और न ही पेड़ों की कटाई की जा सकती है। नेशनल पार्क से सटे इलाकों में लोहे के बाड़, सोलर बोरवेल तैयार करके जंगली जानवरों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था, सीसीटीवी वैâमरों से वन्य जीवों पर निगरानी, कुछ बाघों की निगरानी के लिए रेडियो कॉलर लगाए जाएं ताकि लोगों को सतर्क किया जा सके और मानव-वन्यजीव के संघर्षों से बचा जा सके।

बेहतर पुनर्वास किया जाएगा
जंगल क्षेत्र के अंदर पुनर्वास करना उचित नहीं होगा इसलिए हम रोड साइड एरिया में पुनर्वास के पक्षधर हैं, ताकि मानव और वन्यजीव संघर्ष को रोका जा सके। सारिपुत नगर-सीप्ज ३ नंबर गेट बाउंड्री वाल क्षेत्र की भूमि में इमारत का निर्माण कर लोगों का बेहतर पुनर्वास किया जा सकता है। इस भूमि का निरीक्षण करने जल्द ही संबंधित कमेटी के सदस्य आनेवाले हैं।
रविंद्र वायकर- स्थानीय विधायक

महाराष्ट्र सरकार का सराहनीय कदम
जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार का लिया गया निर्णय सराहनीय है। यदि सरकार ने एक ही स्थान पर स्थलांतरित करके समुचित पुनर्वास कर दिया तो आरे कॉलोनी और पर्यावरण को बचाया जा सकता है।
निलेश हरिश्चंद्र धुरी- आरे कॉलोनी निवासी

आरे डेयरी कॉलोनी का जतन हो‌गा
राज्य सरकार द्वारा लिया गया ये एक अच्छा निर्णय है।‌ आरे कॉलोनी क्षेत्र के झुग्गीवासियों को मूलभूत सुविधाएं लंबे अर्से से नहीं मिल पा रही हैं। पुनर्वास होने पर हमारी आगामी पीढ़ी अच्छा जीवन जी सकती है। मुंबई को ऑक्सीजन देनेवाली आरे डेयरी कॉलोनी का जतन हो‌ सकता है। साक्षी गणेश ठाकुर- स्थानीय निवासी