मुख्यपृष्ठखबरेंनवनियुक्त आयुक्त का कड़क फैसला : अधिकारी कार्यालयीन खर्चों पर करें नियंत्रण

नवनियुक्त आयुक्त का कड़क फैसला : अधिकारी कार्यालयीन खर्चों पर करें नियंत्रण

बिजली खपत और शहर की जलापूर्ति का भी होगा ऑडिट
चंद्रकांत दुबे / भायंदर
मीरा-भायंदर मनपा आयुक्त संजय काटकर ने मनपा की कमान संभालते ही मनपा के खर्चों पर नियंत्रण के लिए कड़क कदम उठाया है। हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में मनपा की सुविधाओं में बिजली की खपत के साथ-साथ शहर में जल आपूर्ति का ऑडिट करने का निर्णय लिया। साथ ही संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश भी जारी कर दिया है।
ज्ञात हो कि मनपा मुख्यालय, प्रभाग कार्यालयों, स्कूलों, फायर स्टेशनों और अन्य सुविधाओं में बिजली की खपत के कारण मनपा को हर महीने लाखों रुपये का बिल चुकाना पड़ता है। इसके अलावा मूलभूत सुविधाओं के तहत शहर में हजार से अधिक स्ट्रीट लाइटें हैं, जिसकी बिजली खपत का करीब ५० प्रतिशत हिस्से का बिल महानगरपालिका को देना पड़ता है। जबकि बिजली की खपत को नियंत्रित करने के लिए महानगरपालिका ने सबसे पहले मुख्यालय में सौर ऊर्जा पैनल स्थापित करने का निर्णय लिया था और इस प्रस्ताव को मंजूरी भी दे दी गयी थी, लेकिन देखा गया कि ये फैसला अभी भी कागजों पर ही सिमट कर रह गया है। शहर की बढ़ती जनसंख्या के कारण विकास कार्य तेजी से हो रहा है। इसलिए मनपा को बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। इसके अलावा, चूंकि बजट में हर साल कई करोड़ रुपये की वृद्धि होती है, फिर भी मनपा को अपनी सीमित आय से बढ़े हुए व्यय बैलेंस शीट को पूरा करने के लिए सरकारी सब्सिडी पर निर्भर रहना पड़ता है। इस खर्च को नियंत्रण में लाने के लिए नव नियुक्त आयुक्त संजय काटकर ने सबसे पहले महानगरपालिका के भवनों में बिजली की खपत को नियंत्रित करने और इसका ऑडिट करने का निर्णय लिया है। साथ ही अधिकारियों और कर्मचारियों को बिजली की खपत को नियंत्रित करने तथा यह सुनिश्चित करना होगा कि इसका अधिक उपयोग न हो। इसी तरह स्टेम और एमआईडीसी से शहर को क्रमशः ८६ और ११०, कुल १९६ मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति की जाती है। इसमें एमआईडीसी की ओर से शहर को १३५ मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति स्वीकृत है, जिसमें से औसतन केवल ११० मिलियन लीटर की ही आपूर्ति की जाती है। चूंकि कई जगहों पर पानी का रिसाव हो रहा है, इसलिए कहा जा रहा है कि यह रिसाव कुल जलापूर्ति का लगभग २० प्रतिशत है। हालांकि, मनपा ने शहर के द्वारों पर पानी के मीटर लगाए हैं, फिर भी स्टेम और एमआईडीसी पहले के मीटर से ही पानी को मापते हैं। इससे मनपा को वास्तविक जलापूर्ति से अधिक बिल चुकाना पड़ रहा है। इसलिए आयुक्त ने शहर में पानी की आपूर्ति का ऑडिट कराने का फैसला लिया है। इससे महानगरपालिका को शहर में होने वाली वास्तविक जलापूर्ति का बिल ही चुकाना पड़ेगा, जिससे दावा किया जा रहा है कि इससे पालिका को काफी पैसों की बचत होगी।

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