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जीवन दर्पण: मंगल चंडिका स्तोत्र का पाठ करें होगा उन्नति का मार्ग प्रशस्त

 डॉ. बालकृष्ण मिश्र

गुरुजी, क्या मेरी कुंडली मांगलिक है। विवाह में विलंब क्यों हो रहा है, बताएं? – यश मिश्रा
(जन्म- ६ मई १९९५ समय- दिन ११.२३, स्थान- मुंबई)
यश जी, आपका जन्म शनिवार के दिन पुनर्वास नक्षत्र की चतुर्थ चरण में हुआ है और आपकी राशि कर्क राशि बन रही है। कर्क राशि पर इस समय शनि की ढैया भी चल रही है। लग्न के आधार पर अगर हम देखें तो कर्क लग्न में ही आपका जन्म भी हुआ है और कर्क लग्न में ही मंगल चंद्रमा के साथ बैठा हुआ है। अत: आपकी कुंडली मांगलिक है, लेकिन मांगलिक दोष से इतना घबराने की आवश्यकता नहीं है। अनुकूल जीवनसाथी प्राप्त करने के लिए आपकी कुंडली में प्रयुक्त शंखपाल नामक कालसर्प योग की पूजा भी आपको करवानी चाहिए, क्योंकि सूर्य के साथ केतु बैठ करके ग्रहण दोष भी बना रहा है। वैसे आपकी कुंडली में सूर्य उच्च राशि का है। आपके जन्म के बाद पिता का विकास भी हुआ होगा और पिता ने कहीं जगह-जमीन भी खरीदी होगी। आप अपने पुरुषार्थ से भी जगह-जमीन खरीदने की तलाश में होंगे। आप निश्चित ही मैरिज के बाद किसी व्यापार से जुड़ेंगे। मंगल ग्रह आपकी कुंडली में दशम भाव का स्वामी है और नीच राशि का है इसलिए मंगल चंडिका स्तोत्र का पाठ एवं आर्ष विवाह कर लेना आपके लिए ज्यादा लाभदायक होगा। यह उपयुक्त उपाय जरूर करें इससे आपके जीवन में उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
गुरुजी, मेरा विवाह कब होगा। क्या मेरी पसंद से विवाह होगा, बताएं? – महेंद्र भटनागर
(जन्म- २२ अक्टूबर १९९६, समय- रात्रि १२.५५ स्थान- कुर्ला, मुंबई)
महेंद्र जी, आपका जन्म मंगलवार के दिन धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण में हुआ है और आपकी राशि कुंभ बन रही है। वर्तमान समय में कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती भी चल रही है। यदि आपके मैरिज को हम देखें तो कर्क लग्न में आपका जन्म हुआ है। कर्क लग्न का स्वामी चंद्रमा है और वह आपकी कुंडली में अष्टम भाव पर बैठा है। आपकी कुंडली मांगलिक नहीं है, लेकिन चौथे स्थान पर सूर्य के बैठने से जीवन साथी का चयन करने में किसी न किसी प्रकार की अड़चन आ रही है। लग्न भाव का स्वामी चंद्रमा आपकी कुंडली में अष्टम भाव पर बैठ करके यह संकेत दे रहा है कि आप अपनी इच्छा से अपना विवाह करना चाहते हैं, लेकिन आपको अपने माता-पिता की सहमति के बगैर विवाह नहीं करना चाहिए। अगर हम आपके विवाह को देखें कि आपका विवाह कब तक होगा तो इसके लिए आप शनि का उपाय करिए। २०२५ में आपका विवाह हो सकता है।
गुरुजी, मेरी शिक्षा वैâसी होगी और स्वास्थ्य वैâसा रहेगा? – आरव गुप्ता
(२ अगस्त २०१५, समय- रात्रि ४.४२, स्थान- प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश)
आरव जी, आपका जन्म रविवार के दिन धनिष्ठा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में हुआ है और आपकी राशि कुंभ बन रही है। लग्न के आधार पर आपका जन्म कर्क लग्न में हुआ है। कर्क लग्न का स्वामी चंद्रमा आपकी कुंडली में अष्टम भाव पर बैठा है इसलिए आपकी राशि पर शनि की साढ़ेसाती भी चल रही है, जिसकी वजह से आपका स्वास्थ्य थोड़ा ऊपर-नीचे हो सकता है, लेकिन घबराने की आवश्यकता नहीं है। आपको शनि का उपाय करना चाहिए। अगर आपकी शिक्षा को हम देखें तो आपकी शिक्षा अच्छी होगी। लग्न में ही नीच राशि का मंगल भी बैठा हुआ है इसलिए आपकी कुंडली मांगलिक भी है।
गुरुजी, मैं बेहद परेशान हूं। मेरी परेशानी कब तक दूर होगी? – सौरभ भारद्वाज
(जन्म- २ मार्च १९७३, समय- १२.५५, स्थान- जौनपुर, उत्तर प्रदेश)
सौरभ जी, आपका जन्म श्रवण नक्षत्र के द्वितीय चरण में हुआ है। आपकी राशि मकर बन रही है और मकर राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है। शनि की साढ़ेसाती जनवरी २०२५ में समाप्त हो जाएगी। लग्न के आधार पर अगर हम बात करें तो मिथुन लग्न में आपका जन्म हुआ है और आपको शनि की साढ़ेसाती का उपाय करना चाहिए। शनि की साढ़ेसाती के उपाय के लिए आपको प्रतिदिन ७ मिनट तक पीपल के पेड़ की परिक्रमा करनी चाहिए और परिक्रमा करते समय ‘ॐ पिप्लाश्रय संस्थिताय नम:’ मंत्र का जाप भी करना चाहिए तथा प्रतिदिन तीन बार हनुमान चालीसा का पाठ करने के साथ ही हनुमान जी का दर्शन भी करना चाहिए। इस उपाय को करने से धीरे-धीरे आपकी परेशानियां समाप्त होने लगेंगी।
गुरुजी, मेरी परेशानियां कब तक दूर होंगी, कृपया बताएं? – सचिन चौहान
(जन्म- २६ फरवरी १९९२, समय- रात्रि ९.५५, स्थान- भदोही, उत्तर प्रदेश)
सचिन जी, आपका जन्म बुधवार के दिन ज्येष्ठा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में हुआ है और आपकी राशि वृश्चिक बन रही है। आपकी राशि पर शनि की ढैया भी प्रारंभ हो गई है। गोचर के आधार पर अगर हम बात करें तो आपकी राशि से चौथे स्थान पर शनि बैठ करके रोग भाव को और दशम भाव को अपनी पूर्ण दृष्टि से देख रहा है इसलिए आपको शनि का उपाय करना चाहिए। शनि के उपाय के लिए आप प्रतिदिन हनुमान चालीसा का तीन बार पाठ करें।

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