मुख्यपृष्ठधर्म विशेषजीवन दर्पण : शनि पहले नौकर बनाता है फिर मालिक!

जीवन दर्पण : शनि पहले नौकर बनाता है फिर मालिक!

डॉ. बालकृष्ण मिश्र

गुरु जी, मेरी राशि क्या है और समय ठीक नहीं चल रहा है कोई उपाय बताएं?
राहुल भोसले
(जन्मतिथि- १६ अप्रैल १९७३, समय- रात्रि २.३५ बजे, स्थान- जोगेश्वरी, मुंबई)
राहुल जी, आपका जन्म मकर लग्न एवं तुला राशि में हुआ है। इस समय आपकी राशि पर शनि की ढैया चल रही है। लग्नेश शनि सप्तम भाव में बैठकर लग्न को स्वगृही दृष्टि से देख रहा है। अत: आपका आत्मबल बहुत ही ठीक है लेकिन सप्तमेश चंद्र के साथ राहु कर्म भाव में बैठकर ग्रहण योग बना दिया है। ग्रहण योग के कारण आप अपने परिश्रम का पूर्ण पारिश्रमिक प्राप्त नहीं कर पाते होंगे। इस समय आपकी कुंडली में बुध की महादशा में राहु का अंतर चल रहा है। राहु के कारण ही आपकी कुंडली में ग्रहण योग बना हुआ है। आपकी कुंडली में भाग्येश होकर सुख भाव में बैठा है। इस समय आपका मध्यम स्तर का समय चल रहा है। वैदिक विधि से ग्रहण योग की पूजा करने से आपका समय विशेष अनुकूल हो जाएगा। जीवन की अन्य गहराइयों को जानने के लिए संपूर्ण जीवन बनवाएं।
गुरु जी, मैं व्यवसाय करूंगा या नौकरी कृपया सलाह दें ?
अजय कुशवाहा
(जन्मतिथि- २८ दिसंबर १९८०, समय- रात्रि १२.२० बजे, स्थान- गोरखपुर, यूपी)
अजय जी, आपका जन्म कन्या लग्न एवं सिंह राशि में हुआ है। पंचमेश शनि लग्न में ही बैठकर आपको व्यापारिक दिमाग का व्यक्ति बना दिया है लेकिन लग्न में शनि बैठकर पराक्रम भाव एवं सप्तम भाव तथा कर्म भाव पर पूर्ण दृष्टि डाल रहा है। आपका कार्यक्षेत्र व्यापार ही होगा लेकिन पहले आपको नौकरी करना चाहिए फिर व्यापार, तब ज्यादा लाभ होगा। क्योंकि शनि पहले नौकर बनाता है फिर मालिक लेकिन आपकी कुंडली में अंगारक योग एवं पद्मनामक कालसर्प योग भी बना हुआ है। इन योगों के कारण परिश्रम का पूर्ण पारिश्रमिक भी आपको नहीं मिल पाता होगा। अत: वैदिक विधि से कालसर्प योग की शांति कराएं तब व्यापार प्रारंभ कर सकते हैं। आपकी कुंडली में इस समय राहु की महादशा भी चल रहा है, जो अनुकूल दायक नहीं है। जीवन की अन्य गहराइयों को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।
गुरु जी, मेरी राशि क्या है और कुंडली में दोष क्या है?
राजकुमारी यादव
जन्मतिथि- १९ नवंबर १९९५, समय- दिन में १०.२६ बजे, स्थान- बोरीवली, मुंबई)
राजकुमारी जी, आपका जन्म धनु लग्न एवं वृष राशि में हुआ है। लग्नेश बृहस्पति भाग्येश सूर्य के साथ में बैठकर अस्त होकर समय-समय पर आपके आत्मबल को समाप्त कर देता है। आपकी कुंडली में पंचमेश मंगल नीच राशि का होकर अष्टम भाव में बैठकर आपको शिक्षा का पूर्ण लाभ प्राप्त नहीं होने दे रहा है। क्योंकि पंचम भाव में केतु बैठकर समय-समय पर आपको कन्फ्यूजन में भी डाल देता है। अष्टम स्थान में मंगल बैठने के कारण आपकी कुंडली मांगलिक भी है तथा आपकी कुंडली में कालसर्प योग भी है। इन योगों की पूजा कराना आपके लिए आवश्यक है और विवाह का निर्धारण होने से पहले `मंगल चंडिका स्तोत्र’ का पाठ जरूर कराएं। ऐसा करने पर अनुकूल पति प्राप्त होने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा जीवन की अन्य गहराइयों को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।
गुरु जी, मेरी कुंडली में दोष क्या है। मैं बहुत परेशान हूं, कोई उपाय बताएं?
शंकर अवस्थी
(जन्मतिथि- १६ अक्टूबर १९५४, समय- रात्रि ३.३० बजे, स्थान- मुरबाड, ठाणे)
शंकर अवस्थी जी, आपका जन्म सिंह लग्न एवं वृष राशि में हुआ है। सिंह लग्न में जन्म होने के कारण आप पुरुषार्थी हैं। आपकी कुंडली में छठे भाव पर मंगल बैठकर शत्रु हंता योग बना रहा है लेकिन समय-समय पर स्वास्थ्य की प्रतिकूलता भी बना देता है। आपकी कुंडली में शनि रोगेश एवं सप्तमेश होकर वर्तमान समय में वक्री है, जिसके कारण आपके स्वास्थ्य में विपरीतता आ सकती है। वर्तमान समय में आपकी कुंडली में बुध की महादशा में केतु का अंतर चल रहा है, जो आपके लिए अनुकूल नहीं है क्योंकि राहु एवं केतु के कारण आपकी कुंडली में कालसर्प योग भी बन रहा है। कालसर्प योग की वर्तमान समय में वैदिक विधि से पूजन कराना आपके लिए विशेष आवश्यक है। ऐसा करने पर आपका स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा एवं अनेक प्रकार से विकास के मार्ग भी प्रशस्त हो सकता है। जीवन की अन्य गहराइयों को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण भी बनवाएं।

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