मुख्यपृष्ठधर्म विशेषजीवन-दर्पण :पीपल की परिक्रमा लगाएं, शनि से लाभ पाएं!

जीवन-दर्पण :पीपल की परिक्रमा लगाएं, शनि से लाभ पाएं!

डॉ. बालकृष्ण मिश्र

गुरु जी, मेरी राशि क्या है और कुंडली में गंडमूल दोष क्या है, हमें उपाय बताएं? – आशीष पांडेय
(जन्मतिथि- २२ सितंबर २०१२, समय- रात्रि ३.३५ बजे, स्थान- इलाहाबाद, यूपी)
आशीष जी, आपका जन्म सिंह लग्न वृश्चिक राशि में हुआ है। आपका जन्म ज्येष्ठा नक्षत्र में हुआ है। यह नक्षत्र गंडमूल नक्षत्र के अंतर्गत आता है। इस नक्षत्र में जन्म लेने पर माता-पिता को २७वें दिन गंडमूल की शांति कराना आवश्यक होता है। यदि आपने पूजन नहीं कराया है तो गोमुख प्रसव शांति आपको कराना आवश्यक है। आपकी कुंडली को गहराई से देखा जाए तो कालसर्प योग भी विद्यमान है। इस कारण आपका स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहता होगा एवं परिश्रम का पूर्ण पारिश्रमिक भी प्राप्त नहीं कर पाते होंगे। शनि ग्रह के द्वारा शुभ फल प्राप्त करने के लिए पीपल के पेड़ की परिक्रमा एवं हनुमान चालीसा का पाठ करें तथा हनुमान जी का दर्शन भी करना आपको आवश्यक है। जीवन की अन्य गहराइयों को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।

गुरु जी, मेरा काम छूट गया है। कुंडली में दोष है क्या, कोई उपाय बताएं? – नारायण भानुशाली
(जन्मतिथि- २८ जुलाई १९८९, समय- दिन में १. ३५ बजे, स्थान- चेंबूर, मुंबई)
नारायण जी, आपका जन्म तुला लग्न एवं वृष राशि में हुआ है। वृष राशि पर दशमेश चंद्रमा उच्च राशि का होकर अष्टम स्थान में बैठा हुआ है। गोचर में देखें तो चंद्र के साथ राहु बैठा हुआ है। राहु का उपाय आपको करना चाहिए, नौकरी जरूर मिल जाएगी। क्योंकि आपकी कुंडली में इस समय गुरु की महादशा में गुरु का अंतर चल रहा है। गुरु आपकी कुंडली में पराक्रम भाव का स्वामी होकर भाग्य भाव में बैठकर आपको भाग्यशाली बनाया है लेकिन पंचम भाव पर राहु बैठकर आपको कन्फ्यूजन में भी डालता है तथा लग्नेश शुक्र पर पूर्ण दृष्टि भी डाल रहा है। लाभ भाव पर केतु बैठने के कारण पद्म नामक कालसर्प योग भी बना रहा है। इस योग के कारण आपके जीवन के विकास में अनेक प्रकार से परेशानियां आ रही हैं। जीवन को पूर्ण विकसित करने के लिए पद्म नामक कालसर्प योग की वैदिक पूजा कराना आवश्यक है। जीवन की अन्य गहराइयों को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।

गुरु जी, मेरा काम बनते-बनते बिगड़ जा रहा है क्या कुंडली में कोई दोष है, यदि दोष है तो उपाय बताएं?
– तुषार सोलंकी
(जन्मतिथि- ११ मई १९९९, समय- प्रात: ७.५० बजे, घनसौली, नई मुंबई)
तुषार जी, आपका जन्म बृष लग्न एवं कुंभ राशि में हुआ है। वृष लग्न में आपका जन्म होने के कारण आप उच्चाभिलाषी हैं। लग्नेश शुक्र रोगेश होकर द्वितीय भाव में बैठकर समय-समय पर आपके आत्मबल को भी कमजोर बना देता होगा। पराक्रम भाव में राहु बैठकर आपको पराक्रमी तो बनाया है लेकिन भाग्य भाव में केतु बैठकर भाग्य ग्रहण दोष भी बना रहा है। भाग्य ग्रहण दोष के कारण आपका कार्य प्रारंभ में बहुत अच्छा होता होगा लेकिन समाप्ति कमजोर बन जाता है। आपकी कुंडली को यदि सूक्ष्मता से अवलोकन किया जाए तो बासुकी नामक कालसर्प योग भी बना रहा है। इस योग के कारण आपके जीवन में विकास के मार्ग को प्रशस्त नहीं होने दे रहा है। जीवन के विकास के मार्ग को प्रशस्त करने के लिए निम्न योगों का पूजन कराना आवश्यक है। जीवन की विशेष जानकारी प्राप्त करने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण भी बनवाएं।

गुरु जी, मेरी राशि क्या है यदि कोई दोष है तो उपाय बताएं? – अभिषेक चौधरी
(जन्मतिथि- २६ अगस्त २००२, समय- प्रात: ८.३० बजे, स्थान- भदोही, यूपी)
अभिषेक जी, आपका जन्म कन्या लग्न और मीन राशि में हुआ है। लग्न में लग्नेश एवं कर्मेश बुध-शुक्र के साथ लग्न में भी उच्च राशि का बैठकर आपको बुद्धिमान बनाया है। आपकी कुंडली में बारहवें भाव में सूर्य के साथ मंगल बैठ करके आपको मांगलिक भी बना दिया है। पराक्रम भाव में केतु एवं भाग्य भाव में राहु बैठकर आपकी कुंडली में भाग्य ग्रहण दोष एवं कालसर्प योग भी बनाया है। भविष्य में इन योगों के कारण असुविधा भी प्राप्त हो सकती है। मांगलिक दोष का विचार विवाह से पूर्व करना आवश्यक होगा। दांपत्य जीवन का पूर्णत: सुख प्राप्त करने के लिए मंगल चंडिका स्तोत्र का पाठ भी आवश्यक होगा। जीवन की अन्य गहराइयों को जानने के लिए जीवन दर्पण बनवाएं।

गुरु जी, शादी कब होगी और क्यों रुकावट आ रही है कोई उपाय बताएं? – पूनम पाल
(जन्मतिथि- १६ नवंबर १९९२, समय- रात्रि १२.२५ बजे, स्थान- बेलापुर, नई मुंबई)
पूनम जी, आपका जन्म सिंह लग्न एवं कर्क राशि में हुआ है। आपकी कुंडली  का ठीक से विचार किया गया। आपकी कुंडली में सुखेश एवं भाग्येश मंगल नीच राशि का होकर बारहवें भाव में बैठकर आपको मांगलिक बना दिया है। विवाह का समय चल रहा है लेकिन मांगलिक दोष के कारण अनुकूल पति नहीं मिल पा रहा है। अनुकूल  पति प्राप्त करने के लिए मंगल चंडिका स्तोत्र का पाठ कराना आवश्यक होगा। आपको ८ मंगलवार लाल मसूर की दाल अपने हाथों से किसी सफाईकर्मी को भी देना चाहिए एवं मंगल चंडिका स्तोत्र का पाठ कराने से दांपत्य जीवन पूर्णतया सुखमय होगा और अनुकूल  पति भी प्राप्त हो जाएगा।

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