मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनाझांकी...पिछलग्गू बने, अटकलें बढ़ीं

झांकी…पिछलग्गू बने, अटकलें बढ़ीं

अजय भट्टाचार्य।  नवसंवत्सर पर कुछ नया करना था इसलिए प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के मुखिया, सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के भाई और सपा मुखिया अखलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव ने प्रधानसेवक नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कू पर अनुसरण (जिसे अंग्रेजी में फालो और ठेठ देशी भाषा में पिछलग्गू होना कहते हैं) करना शुरू कर दिया है। हाल ही में बाबा जी से की गई मुलाकात के बाद उनके भाजपा में जाने की अटकलें जन्मीं थी। अब इस पिछलग्गू भूमिका को उनके भाजपा में जाने की दिशा में एक और कदम के रूप में देखा जा रहा है। इस पर उनकी पार्टी के प्रवक्ता दीपक मिश्रा कहते हैं कि राजनीति में संभावनाएं हमेशा जीवित रहती हैं। इस बीच अखिलेश यादव ने भी मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की है। वैसे शिवपाल सिंह यादव के ट्विटर हैंडल के अनुसार वह वर्तमान में बौद्ध आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा, भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री कार्यालय और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित १२ ट्विटर हैंडल को फॉलो करते हैं।
अब निशंक होंगे बंगले से बाहर
चिराग पासवान से उनके दिवंगत पिता रामविलास पासवान का बंगला खाली कराने के बाद पूर्व शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को आवंटित २७ सफदरजंग रोड स्थित बंगला खाली कराने की तैयारी हो गई है। यह बंगला पिछले वर्ष ही केंद्रीय उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को आवंटित किया जा चुका है। रमेश पोखरियाल निशंक अब मंत्री नहीं हैं और उन्हें आठ स्तरीय बंगला नहीं दिया जा सकता है। अगले सप्ताह से बंगला खाली होना शुरू हो जाएगा। निशंक ने खराब स्वास्थ्य की वजह से बंगले को खाली करने में असमर्थता जताई थी। इस बंगले से सिंधिया परिवार का खास जुड़ाव रहा है। ज्योतिरादित्य के पिता माधवराव सिंधिया लंबे समय तक इसी बंगले में रहे थे, जब वे कांग्रेस की सरकार में मंत्री थे। ज्योतिरादित्य इसी बंगले में २०१९ तक थे। लेकिन लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद भाजपा सरकार ने उनसे ये बंगला खाली करा लिया था। भाजपा में प्रवेश के पश्चात मोदी कैबिनेट में जगह मिलने के बाद जब सिंधिया से बंगले का चयन करने को कहा गया तो उन्होंने अपने पुराने ड्रीम बंगले को ही चुना।
आसान नहीं फॉर्मूला
नीतीश कुमार को बिहार से उठाकर दिल्ली में प्राणप्रतिष्ठित करनेवाले फॉर्मूले को लागू करना आसान नहीं है। अगर नीतीश कुमार उपराष्ट्रपति बने तो वे सक्रिय राजनीति से दूर हो जाएंगे। फिलहाल नीतीश के बाद जदयू के पास ऐसा कोई नेता नहीं है, जो पार्टी को संभाल पाए। किसी एक नेता पर सहमति बनाना भी आसान नहीं है। इससे जदयू में भगदड़ की स्थिति बन सकती है, इसलिए वे यह जोखिम लेना पसंद नहीं करेंगे। बिहार विधानसभा में जदयू के पास इस बार भाजपा के मुकाबले आधी सीटें हैं। नीतीश फिर से मुख्यमंत्री तो बन गए हैं, मगर सरकार में उनकी पिछले कार्यकाल जैसी धमक नहीं है। उन्हें कई बार भाजपा के सामने हथियार डालने पड़े हैं। हाल ही में गठबंधन की सहयोगी वीआईपी के तीन विधायकों के पाला बदलने से भाजपा के विधायकों की संख्या ७७ हो गई है। चर्चा है कि कांग्रेस के कई विधायक भाजपा के संपर्क में हैं।
अग्नि (उगलतीं) मित्रा…!
अपने नाम के अनुसार आसनसोल उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार अग्निमित्रा पॉल आग उगल रही हैं। पॉल का एक वीडियो सामने आया है जिसमें उन्हें यह कहते हुए सुना जा रहा है कि मार का बदला मार। यदि एक्शन होगा तो रिएक्शन भी होगा। यदि सत्तारूढ़ दल की ओर से हमले किए जाते हैं, तो इसका जवाब दिया जाएगा। इसके बाद ही तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत भी दर्ज कराई है। आसनसोल निगम से होर्डिंग लगाने की अनुमति न मिलने पर अग्निमित्रा पॉल धरने प्रदर्शन भी कर रही हैं। उनका आरोप है कि उन्हें होर्डिंग नहीं लगाने दिया जा रहा है। इधर तृणमूल के सांसद कल्याण बनर्जी ने इस पर अग्निमित्रा पॉल को लेकर बड़ी बात कह दी। कल्याण ने कहा कि माथे पर बड़ी सी बिंदी लगाकर सिर्फ झगड़ा करती है।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और देश की कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनके स्तंभ प्रकाशित होते हैं।

अन्य समाचार