मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनाझांकी : अधूरी चाहत की आहट

झांकी : अधूरी चाहत की आहट

अजय भट्टाचार्य।  ‘आप’ के दूत पिछले दिनों छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव से मिले। इसके बाद ऐसी हवा बनी कि टीएस देव आप की झाड़ू थामकर आगामी विधानसभा चुनाव में आप की तरफ से भावी मुख्यमंत्री की तरह पेश किए जाएंगे। आखिर खुद सिंह साहब सामने आए और बाकायदे प्रेस कॉन्प्रâेंस कर कहा, ‘कांग्रेस में हूं और भविष्य में भी कांग्रेस में ही रहूंगा। कांग्रेस में माहौल सकारात्मक है। आम आदमी पार्टी वालों ने मुझसे संपर्क किया था लेकिन अरविंद केजरीवाल से मेरी मुलाकात कभी नहीं हुई है। छत्तीसगढ़ में आम आदमी पार्टी सियासी खेला करने की कोशिश कर रही है लेकिन राज्य में फिलहाल तीसरे विकल्प की गुंजाइश नहीं है। आम आदमी पार्टी का छत्तीसगढ़ में कोई अस्तित्व नहीं है। भाजपा के साथ कई मुद्दों पर मेरी असहमति है। ऐसे में भाजपा में भी जाने का कोई सवाल ही नहीं उठता है। भाजपावाले मुझे कभी मुख्यमंत्री नहीं बनाएंगे। इसके अलावा उन्होंने अपनी एक ‘अधूरी चाहत’ के बारे में भी इशारों में ही अपनी बात रखी कि जो बनना था वह बन गया हूं। अभी कुछ बनना बाकी है, एक चाहत अभी बची हुई है। उम्मीद है कि पूरी होगी। बातें हुई हैं, सब कुछ सकारात्मक है। जल्द डिविलवरी हो जाएगी। समय आ गया है, उस चाहत को अंजाम तक ले जाने का।’ उनकी इस बात से कयास लगाए जा रहे हैं कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस भूपेश बघेल को आराम देकर, कुछ समय के लिए सिंहदेव को भी मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंप सकती है।
राजे निपटान आयोजन
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राजस्थान में रानी साहिबा को निपटाने में लग गई है। इसलिए पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया को अगले साल के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद का चेहरा नहीं बनाया जाएगा। पार्टी राजे को सूबे की राजनीति से निकालकर केंद्रीय राजनीति में लाना चाहती है। हाल के दिनों में उनकी दिल्ली यात्रा के बाद उन्हें केंद्र सरकार में शामिल किए जाने की अटकलें तेज हो गई हैं। राजे विरोधियों का तर्क है कि इससे रानी को राजनीतिक तौर पर दो फायदे मिलेंगे। पहला यह कि भाजपा की राजनीति में उनका स्थान और दूसरा उनके बेटे का राजनीतिक भविष्य सुरक्षित रहेगा। पार्टी की ओर से यह कदम उठाने के पीछे पार्टी में व्याप्त अंतर्कलह को समाप्त करना है। पार्टी मुख्यमंत्री के चेहरे के बिना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर चुनाव लड़ने का मन बना रही है।
आगजनी पर तृणमूल में दो सुर
रामपुरहाट की घटना की सीबीआई जांच के मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस में ही विरोधाभासी स्वर उठ रहे हैं। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा चाहती है जिला अध्यक्ष अणुब्रत मंडल गिरफ्तार हो। सीबीआई की जांच अभी एक चौथाई भी पूरी नहीं हुई है लेकिन भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने अपनी रिपोर्ट में बीरभूम के जिला तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष अणुब्रत मंडल का नाम रामपुरहाटकांड में जोड़ दिया है। इससे सीबीआई की जांच प्रभावित और कमजोर होगी। यह जिला तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष अणुब्रत मंडल को गिरफ्तार करने की साजिश है। जबकि अणुब्रत मंडल ने सीबीआई जांच को लेकर संतुष्टि जताई है। अणुव्रत के मुताबिक अब तक इस पूरे मामले में सीबीआई अच्छी तरीके से जांच कर रही है। प्रशासन की ओर से उन्हें पूरा सहयोग भी किया जा रहा है। इस बीच अणुब्रत मंडल को मवेशी तस्करी मामले में सीबीआई ने फिर ५ अप्रैल को निजाम पैलेस में तलब किया है।
१३ लाख किसानों का डब्बा गोल
नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन से लिंक न हो पाने के कारण बिहार के लगभग १३ लाख से किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना की किश्त नहीं मिलेगी। केंद्र सरकार ने एक अप्रैल से यह व्यवस्था लागू की है कि जिन किसानों का खाता आधार और नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) से लिंक नहीं होगा, उन्हें अब राशि का भुगतान नहीं किया जाएगा। राज्य में ऐसे किसानों की संख्या १२ लाख २९ हजार ८०० है। इसके अलावा ९४ हजार ७९९ किसानों के आवेदन और आधार के नाम में अंतर है। किसानों की यह संख्या ई केवाईसी के कारण वंचितों से अलग है। राज्य के किसानों को इस योजना का भुगतान इसी महीने होने वाला है। कृषि समन्वयक और सलाहकारों किसानों का भुगतान न रुके इसके लिए किसानों से भी अपील कर रहे हैं कि बैंक में जाकर आवेदन दें और अपने खाते को आधार के साथ एनपीसीआई से लिंक करा लें। यह काम बैंक के अधिकारी करेंगे, लेकिन आवेदन उन्हें देना होगा।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और देश की कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनके स्तंभ प्रकाशित होते हैं।

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