मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनाझांकी : टोपी के मुकाबले टोपी

झांकी : टोपी के मुकाबले टोपी

अजय भट्टाचार्य।  अब गुजरात की जिम्मेदारी है कि वे भाजपा की टोपी की लाज रखें। इस बार गुजरात में आम आदमी पार्टी भी दम लगा रही है। आप की टोपी के मुकाबले टोपी उतार दी गई है। कल भाजपा संसदीय दल की बैठक में भाजपा के सभी सांसद नई टोपी में नजर आए। प्रधानसेवक ने चार राज्यों की जीत के बाद अमदाबाद में जो रोड शो किया था, उस दौरान इसी तरह की टोपी पहनी थी। अब यही टोपी सभी सांसदों और मंत्रियों को वितरित की गई हैं। इसके साथ ही इम्युनिटी बढ़ाने के लिए भाजपा सांसदों को मोदी की तस्वीर छपी बूस्टर चाकलेट भी दी गई है। भाजपा के चुनाव निशानवाली यह खास टोपी गुजरात में तैयार की गई है। हालांकि प्रधानसेवक ने गणतंत्र दिवस पर उत्तराखंड के राजपुष्प ब्रह्मकमल छपी टोपी पहनी थी। माना जा रहा है कि गुजरात में होनेवाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर यह टोपी काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इस टोपी को भगवा रंग दिया गया है जो कि गुजराती अस्मिता को जोड़ती है। वैसे चुनाव हिमाचल में भी हैं। शायद स्वतंत्रता दिवस पर हिमाचली टोपी लालकिले पर दिखेगी!
शिवपाल होंगे डिप्टी
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के बाद अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच दूरियां बढ़ती ही जा रही हैं। शिवपाल यादव जहां अखिलेश का नाम लेते हुए एक के बाद एक ट्वीट कर रहे हैं और भाजपा में शामिल होने के संकेत दे रहे हैं। वहीं अखिलेश से बढ़ती नाराजगी के बाद शिवपाल को लेकर कहा जा रहा है कि भाजपा सपा के खिलाफ एक बड़ा दांव चल सकती है। सदन में अखिलेश यादव पर दबाव बनाने के लिए उनके चाचा शिवपाल यादव को विधानसभा उपाध्यक्ष बना सकती है। यदि ऐसा होता है तो शिवपाल यादव सदन में अपने भतीजे व नेता विपक्ष अखिलेश यादव के नजदीक ही बैठेंगे। विधानसभा उपाध्यक्ष की सीट सदन में ठीक विपक्ष के नेता के बगल में ही होती है। चूंकि इस बार अखिलेश यादव ने बतौर नेता विपक्ष आक्रामक तेवर के संकेत दे दिए हैं। ऐसे में विधानसभा उपाध्यक्ष की कुर्सी पर शिवपाल को बिठा भाजपा, सपा प्रमुख पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर बढ़त हासिल करने की कोशिश करेगी।
बिहार पहुंचा बुलडोजर मॉडल
बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने सूबे में योगी मॉडल लागू करने की मांग कर बिहार की राजनीति में भूचाल ला दिया था। राबड़ी के बयान को लपकते हुए भाजपा ने नीतीश पर दबाव बनाने की चाल चली और उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने राबड़ी देवी की मांग का समर्थन किया। अब इस मांग का असर भी नजर आने लगा है। उत्तर प्रदेश की तर्ज पर बिहार में भी बुलडोजर की इंट्री हो गई है। सारण जिले के डोरीगंज थाना क्षेत्र के दफ्दरपुर गांव निवासी सुदीश राय के पुत्र सोनू कुमार की हत्या वर्ष २५ मार्च २०२१को इस्माइलपुर के समीप एन एच १९ पर हुई थी। पिता सुदीश राय ने इस मामले में पांच के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। दो अभियुक्त हाजिर हुए बाकी फरार जितेंद्र राय और विकास राय के घर की कुर्की का आदेश मिलते ही पुलिस मौजूदगी में जेसीबी के जरिए घर की चौकठ, खिड़की सहित रखे उपयोग के सभी सामान जब्त कर थाने में जमा किए गए। अगर कुर्की जब्ती के बाद भी हाजिर नहीं हुए तो फरार अभियुक्त के घर को तोड़ दिया जाएगा। सोनू की हत्या के एक वर्ष बाद उसके बड़े भाई संजीव कुमार की भी हत्या बीते २८ मार्च को हो गई। इस मामले में सुदीश राय ने प्राथमिकी में कहा है कि सोनू हत्याकांड में केस वापस नहीं लेने पर अभियुक्तों ने धमकी दी थी। इसी क्रम में उनके दूसरे बेटे की भी हत्या कर दी गई।
आदिवासी चेहरे की तलाश
राजस्थान में आदिवासी समुदाय में भाजपा अपना भविष्य तलाश रही है और इसी क्रम में सवाई माधोपुर में राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की हाजिरी में अनुसूचित जाति मोर्चा के बैनरतले मजमा जुटा। पार्टी पूर्वी राजस्थान और उसके आसपास के क्षेत्रों में अच्छा प्रभाव रखनेवाले आदिवासी मतदाताओं को अपने पक्ष में करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। राजस्थान में २०० विधानसभा सीटों में से कांग्रेस ने १०० सीटें जीती थीं। भाजपा को लगता है कि राज्य में नेतृत्व बीते चुनाव में बड़ा मुद्दा था और राजस्थान में पार्टी की हार के पीछे यह भी एक बहुत बड़ा कारण था। राजस्थान में सत्तासीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को टक्कर देना भाजपा के लिए कठिन चुनौती है। इसके पीछे अहम कारण यह है कि राज्य में पार्टी का नेतृत्व अशोक गहलोत की रणनीति के मुकाबले कमजोर नजर आता है। पार्टी आलाकमान २०२३ के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की राज्य इकाई में बड़ा बदलाव करना चाहता है। शायद कोई आदिवासी चेहरे पर सेहरा रख दिया जाए।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और देश की कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनके स्तंभ प्रकाशित होते हैं।

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