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झांकी….येदियुरप्पा आत्मा और आंखें

दिल्ली दरबार की परिक्रमा कर कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा जब बंगलुरु वापस लौटे तब एक ऑडियो क्लिप कर्नाटक के राजनीतिक आसमान में गूंज रही थी। हालांकि वायरल हुए इस ऑडियो को कतील ने ‘फर्जी’ करार दिया है। कतील के मुताबिल येदियुरप्पा भाजपा की आत्मा हैं और वरिष्ठ मंत्री केएस ईश्वरप्पा व जगदीश शेट्टार इस आत्मा की दो आंखें हैं। क्लिप में, कतील को उनकी मूल तुलु भाषा में यह कहते हुए सुना जा सकता है कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने मुख्यमंत्री पद के लिए तीन नाम छांटे हैं। क्लिप के अनुसार, ‘तीन उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। संभावना है कि कोई भी मुख्यमंत्री बन सकता है। यहां से कोई भी मुख्यमंत्री नहीं बनेगा। हाईकमान दिल्ली से (किसी को) नियुक्त करेगा।’ इसके अलावा, ऑडियो क्लिप पर आवाज कैबिनेट में बड़े बदलावों के बारे में बात करते हुए सुनाई देती है: ‘ईश्वरप्पा, शेट्टार और टीम बाहर हो जाएगी। एक टीम बनाई जाएगी।’ केएस ईश्वरप्पा वर्तमान में ग्रामीण विकास और पंचायत राज (आरडीपीआर) मंत्री हैं, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार उद्योग मंत्री हैं। क्लिप के वायरल होने के तुरंत बाद, कतील ने इसे ‘फर्जी’ बताते हुए एक बयान जारी किया और येदियुरप्पा से जांच करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पार्टी को नुकसान पहुंचाने के लिए ऐसा किया गया है। राज्य में जारी विवादों पर मुख्यमंत्री येदियुरप्पा चुप्पी साधे हुए हैं। इसी बीच उन्होंने भाजपा विधायक दल को भोज और बैठक से पहले वरिष्ठ अधिकारियों और सचिवालय कर्मचारियों को लंच पर आमंत्रित किया है। पिछले शुक्रवार और शनिवार को नई दिल्ली में थे, जहां कहा जाता है कि भाजपा के शीर्ष नेताओं ने उन्हें पद छोड़ने के लिए कहा था। येदियुरप्पा ने २६ जुलाई को भाजपा विधायक दल की बैठक बुलाई है, जब उनके दो साल पूरे हो रहे हैं। इस बीच लिंगायतों के पंच-पीठ का कमोबेश समर्थन येदियुरप्पा के साथ है और उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि अगर येदियुरप्पा को हटाया गया तो भाजपा को इसके बुरे नतीजे भुगतने होंगे। रंबापुरी पीठ के जगतगुरु डॉ. वीरसोमेश्वरा ने कहा है कि येदियुरप्पा मुख्यमंत्री के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा करेंगे, मुझे पूरा भरोसा है। अगर कुछ उलटफेर किया गया तो पार्टी को खामियाज़ा भुगतना पड़ेगा। मठाधीशों के साथ – साथ वीरशैव लिंगायत महासंगठन प्रमुख शामनूर शिवशंकरप्पा भी येदियुरप्पा से मिले और अपना समर्थन जताया।
अति आत्मविश्वास ले डूबा
बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने चुनावों की हार का ठीकरा अपनी ही पार्टी पर फोड़ा है। उन्होंने कहा है कि भाजपा के कई नेताओं के अति आत्मविश्वास के कारण बंगाल में पार्टी की हार हुई। क्‍योंकि ऐसे नेताओं का मानना था कि बंगाल में पार्टी को १७० से अधिक सीटें मिलेंगी। पूर्व मिदनापुर जिले के चांदीपुर में भाजपा की बैठक में सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि कई नेताओं के अति आत्मविश्वास के कारण उभरती जमीनी स्थिति को समझने में नाकामयाब रहे। हमने विधानसभा चुनाव के पहले दो चरणों में अच्छा प्रदर्शन किया था। ऐसे में हमारे कई नेता आत्ममुग्ध और अति आत्मविश्वासी हो गए थे। उन्होंने विश्वास करना शुरू कर दिया था कि भाजपा चुनावों में १७०-१८० सीटें हासिल करेगी, लेकिन उन्होंने जमीनी काम नहीं किया, जो कि पार्टी को महंगा पड़ा। अधिकारी के मुताबिक जमीनी स्तर पर काम जारी रखना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि लक्ष्य निर्धारित करना, जो वास्तविक था लेकिन कड़ी मेहनत की जरूरत थी। अब यह समझना कठिन है कि सुवेंदु के निशाने पर कौन बड़े नेता हैं? अधिकारी के दावों पर तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि सुवेंदु मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से सामाजिक कल्याण परियोजनाओं और विकास की एक लहर को आसानी से भूल गए। जनादेश भाजपा के दिग्गजों के खिलाफ गया है। जो लगातार मुख्यमंत्री और तृणमूल के खिलाफ अभियान चला रहे थे। सुवेंदु के दावे पर कटाक्ष करते हुए घोष ने कहा कि भाजपा मुगालते में रह रही थी क्योंकि उनके कई नेताओं ने भविष्यवाणी की थी कि भगवा खेमा २०० सीटों को पार कर जाएगा। वह दूसरों के साथ गलती क्यों कर रहा है? क्या सुवेंदु ने भी बार-बार यह दावा नहीं किया कि उनकी पार्टी को कम से कम १८० सीटें मिलेंगी? वास्तव में वे (सुवेंदु) बंगाल की नब्ज नहीं जानते, जो तृणमूल कांग्रेस जानती है।
राजद में बड़े बदलाव की आहट
राष्ट्रीय जनता दल में बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। इसी सिलसिले में रविवार को पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से बिहार प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह की मुलाकात हुई। इस वक्त लालू बीमार चल रहे हैं और वे चाहते हैं कि जगदानंद सिंह के प्रदेश अध्यक्ष के पद पर रहते ही तेजस्वी यादव को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की बागडोर सौंप दी जाए। एक बैठक बुलाकर पहले तेजस्वी यादव को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाएगा। कार्यकारी अध्यक्ष बनाने के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाएगा और उसमें सभी नियमों का खयाल रखा जाएगा। विधानसभा चुनाव में वाम दलों को महागठबंधन में शामिल करने का फैसला भी लालू प्रसाद का ही था। उन्होंने देख लिया कि तेजस्वी ने अपने बलबूते काफी मेहनत करके इतनी सीटें पार्टी और महागठबंधन को दिलाई है। इससे पहले जब तेजस्वी यादव को लालू प्रसाद ने उप मुख्यमंत्री बनवाया था, उसके पहले तेजस्वी की कोई बड़ी भूमिका बिहार की राजनीति में नहीं थी। जिस समय लालू प्रसाद ने अपने दोनों बेटों को राजनीति में प्रवेश दिलाया और एक झटके में एक को उप मुख्यमंत्री और दूसरे को स्वास्थ्य मंत्री बनवाया, उस समय साथ में नीतीश कुमार थे। बाद में जदयू और राजद का गठबंधन टूट गया था। राजद में परिवारवाद के आरोप का कोई असर लालू प्रसाद पर नहीं पड़ा। परिवारवाद का आरोप तब भी लगा था जब लालू ने प्रसाद ने आनन-फानन में राबड़ी देवी को बिहार की पहली महिला मुख्यमंत्री बनवाया था। बेटी मीसा भारती को राज्यसभा भेजा था। तेजस्वी यादव को पहले कार्यकारी अध्यक्ष और उसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष की बागडोर दी जाती है, तब भी परिवारवाद का आरोप लगेगा लेकिन इसकी परवाह पार्टी के बड़े नेताओं को नहीं है। लालू प्रसाद चाहते हैं कि पार्टी के बड़े फैसले अब तेजस्वी यादव लें और वे संरक्षक की भूमिका में रहें। प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह और राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद की दिल्ली में ताजा मुलाकात राष्ट्रीय जनता दल के संगठन में बड़े स्तर पर बदलाव के संकेत हैं।
मिशन पर रेवंत
तेलंगाना में कांग्रेस की कमान संभालने के बाद ए. रेवंत रेड्डी जिस तरह से आक्रामक ढंग से जुटे हैं उसकी धमक सुनी जा सकती है। टीआरएस नेता डी संजय को कांग्रेस में वापस लाकर उन्होंने टीआरएस के साथ-साथ भाजपा को भी अलर्ट मोड पर लाकर खड़ा कर दिया है। संजय भाजपा नेता और निजामाबाद के सांसद धर्मपुरी अरविंद के भाई हैं। संजय और अरविंद के पिता डी श्रीनिवास राव आंध्र प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद रहे थे। दिलचस्प यह है कि उनके दादा डी वेंकट राम जनसंघ के सदस्य थे। निजामाबाद के पूर्व मेयर संजय उस पार्टी में लौटे हैं, जहां उनके पिता डी श्रीनिवास लगभग चार दशकों तक वरिष्ठ नेता रहे और टीआरएस में शामिल होने से पहले तीन बार पार्टी के विधायक रहे। संयोग से रेवंत ने भी अपनी राजनीति भाजपा की छात्र वाहिनी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से शुरू की थी। इस बीच, जडचेरला के पूर्व विधायक और भाजपा के महबूनगर जिला अध्यक्ष इरा शेखर ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर कांग्रेस में शामिल होने की घोषणा की। भाजपा में शामिल होने से पहले वे तेदेपा के साथ थे। तेदेपा के पूर्व नेता गांड्रा सत्यनारायण, जिन्होंने २०१८ में भूपालपल्ली विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, वे भी आधिकारिक रूप से पार्टी में शामिल हो गए। खबर है कि तेलंगाना के सबसे धनी राजनेता पूर्व सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी से भी रेवंत ने संपर्क किया है और जल्द ही विश्वेश्वर अपनी पुरानी पार्टी में वापस होंगे। विश्वेश्वर रेड्डी भारत के एकमात्र सांसद हैं जिन्हें संसद सदस्य के रूप में सेवा करते हुए अमेरिकी पेटेंट दिया गया है। वे प्रसिद्ध अस्पताल श्रृंखला अपोलो के संस्थापक प्रताप सी रेड्डी के दामाद हैं। २०१३ में टीआरएस से अपनी राजनीतिक पारी शुरू करनेवाले विश्वेश्वर २०१८ में कांग्रेस में शामिल हुए थे और इसी वर्ष मार्च में उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थे। रेवंत की कोशिशें रंग लाई तो के वी रेड्डी फिर कांग्रेस में होंगे।

( लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और देश की कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनके स्तंभ प्रकाशित होते हैं।)