मुख्यपृष्ठस्तंभझांकी : बैशाखी की ‘आजादी’

झांकी : बैशाखी की ‘आजादी’

लंबे इंतजार के बाद आखिरकार बैशाखी बनर्जी ने पति मनोजीत मंडल से आपसी सहमति के आधार पर तलाक ले लिया। बैशाखी काफी दिनों से अपने पति से अलग शोभन चटर्जी के साथ रह रही थी। इधर, शोभन का भी उनकी पत्नी रत्ना चटर्जी के साथ तलाक का मामला चल रहा है। अलीपुर कोर्ट में परसों सुनवाई के बाद आपसी सहमति पर आदेश आया। पिछले वर्ष सितंबर महीने में बैशाखी ने अपने पति से तलाक की अर्जी दी थी। बैशाखी का आरोप था कि उनके पति का किसी और महिला के साथ संबध है। मनोजीत की तरफ से कहा गया था कि अपने निजी जीवन में वह क्या करते हैं? इसके बारे में किसी को बताने की आवश्यकता नहीं है। बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी मनोजीत को दी गई है। शोभन ने कहा कि बैशाखी के साथ पुराना नाता है लेकिन पहली बार उसे आजादी की सांस लेते देख रहा हूं। मुझे भी इसी आजादी का इंतजार है।
धूमल की उम्मीद धूमिल

इशारों ही इशारों में सही मगर हिमाचल प्रदेश भाजपा के दिग्गज नेता व पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने पार्टी की भीतरी मशीनरी में सक्रिय भितरघात का मुद्दा उठा दिया है। उन्हें लगता है कि २०१७ के विधानसभा चुनाव में उनकी हार की वजह भाजपा के भीतर ही थी। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की हार के कारणों की जांच भाजपा कर रही है। इसी बहाने धूमल ने २०१७ में अपनी हार के कारणों की भी जांच की मांग की है। उन्होंने साफ तौर पर तो मांग नहीं की लेकिन गोल-मोल बात करते हुए पार्टी हाईकमान पर जांच का पैâसला छोड़ दिया। धूमल ने कहा है कि जिस तरह उतराखंड में मुख्यमंत्री प्रत्याशी के हार की जांच हो सकती है तो उसी तरह हिमाचल में भी हो सकती है। पार्टी हाईकमान के पास सारे निर्णय होते हैं और हाईकमान को ही इस बारे में सोचना चाहिए। धूमल को कांग्रेस के राजिंदर राणा ने सुजानपुर सीट पर पटखनी दी थी। भाजपा धूमल की मांग पर जांच करेगी ही नहीं और अगर करे भी तो भी धूमल को चुनाव मैदान में उतारे इसकी भी संभावना धूमिल है क्योंकि वे ७८ साल के हैं और भाजपा के नए नीति नियंता इस उम्र के नेता को वहीं स्थापित करते हैं, जहां आज लालकृष्ण आडवाणी और मुरलीमनोहर जोशी तशरीफ फरमा रहे हैं।
टोपी ही पहचान है…!
स्थापना दिवस पर भाजपा मुख्यालय से लेकर जिला दफ्तर तक हर जगह कार्यक्रम हुए। प्रधानसेवक नरेंद्र मोदी के संबोधन से लेकर प्रमुख स्थानों पर शोभा यात्राएं तक निकाली गर्इं। लेकिन इन सब के बीच मध्य प्रदेश में पार्टी के प्यादे से लेकर वजीर तक हर छोटे-बड़े कार्यकर्ता के सिर पर मोदी ब्रांड भगवा टोपी चिपकी हुई थी। सभी लोग यह टोपी पहने नजर आए। स्थापना दिवस के मौके पर टोपी पहनने के लिए सभी कार्यकर्ताओं को पहले से ही निर्देश जारी किए गए थे। इसे इस तरह समझा जा सकता है कि स्थापना दिवस के कार्यक्रम से ठीक एक दिन पहले पूरे प्रदेश के भाजपा मुख्यालय पर टोपियां पहुंचा दी गर्इं। इन टोपियों पर भाजपा का चुनाव चिह्न कमल भी छपा हुआ था/है। आमतौर पर भाजपाई इस तरह की टोपियां कम पहनते रहे हैं। लेकिन माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव में जिस तरह से पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी और वहां आम आदमी के नेताओं की पहचान उनकी टोपी बन गई कुछ इसी तरह अब भाजपा भी टोपी को अपनी पहचान बनाने की जुगत में है ताकि इसका राजनीतिक फायदा भी उसे मिल जाए।
बेटी की शाही अगवानी
पुणे के एक परिवार की एक छोटी-सी कोशिश ने बेटियों के जन्म को लेकर समाज को एक प्यारा-सा संदेश दिया है। सोशल मीडिया पर तेजी से शेलगांव का एक वीडियो वायरल हो रहा यह है। इसमें पिता अपनी नवजात बच्ची को सीने से लगाए हेलिकॉप्‍टर से उतरकर कार में बैठता नजर आ रहा है। घर में लड़की के जन्म से परिवार इतना खुश हुआ कि नवजात को बड़े शाही अंदाज में हेलिकॉप्टर के जरिए घर ले जाया गया। परिवारवाले बच्‍ची के साथ पहली बार घर लौटने के मौके को यादगार बनाना चाहते थे। बच्ची के पिता विशाल झारेकर का कहना है कि उनके पूरे परिवार में कोई बेटी नहीं थी, इसलिए बेटी को घर ले जाने के लिए हमने एक लाख रुपए में हेलिकॉप्टर की व्‍यवस्‍था की। विशाल पेशे से वकील हैं। हेलिकॉप्टर उतरते वक्त नन्हीं-सी बच्ची के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण वहां मौजूद थे।

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