" /> झांकी… दल-बदलू परेशान

झांकी… दल-बदलू परेशान

भाजपा महासचिव सीटी रवि, केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, पार्टी के संगठन महासचिव बीएल संतोष, मुरुगेश निरानी, अरविंद बेलाड और हावेरी-गडग से लोकसभा सांसद शिवकुमार चानाबसप्पा उदासी को पीछे छोड़ते हुए येदियुरप्पा सरकार में गृह मंत्री रहे बसवराज बोम्मई कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने हैं। मतलब साफ है कि पार्टी आलाकमान ने येदियुरप्पा की ही सुनी और उनके खासमखास का मुख्यमंत्री पद पर राजतिलक कर दिया। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष को भी सबसे आगे के रूप में देखा गया था क्योंकि वे असंतोष को दूर रख सकते थे, लेकिन येदियुरप्पा के साथ उनकी तनातनी और उत्तर प्रदेश में आसन्न विधानसभा चुनावों ने उनका रास्ता रोक दिया। निवर्तमान कर्नाटक सरकार के मंत्री मुरुगेश निरानी रविवार से ही दिल्ली में डेरा डाले हुए थे। कहने के लिए निरानी से जुड़े करीबी दावा कर रहे थे कि वे निजी दौरे पर दिल्ली में हैं। खास बात यह है कि निरानी भी येदियुरप्पा की तरह लिंगायत समुदाय से आते हैं और वे भी मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में से एक थे। इस घटनाक्रम के बीच उन लोगों की घबराहट भी सतह पर आ गई है जो एचडी कुमारस्वामी की सरकार को गिराकर कांग्रेस या जनता दल सेक्युलर से भाजपा सरकार में शामिल हुए थे। दो साल पहले २०१९ में १७ विधायक भाजपा में शामिल हुए थे, उनमें से अधिकांश ने अपनी पुरानी सीटों पर उपचुनाव लड़ा और कइयों को मंत्रिपद दिया गया था, जैसा कि येदियुरप्पा ने वादा किया था। कांग्रेस छोड़कर सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बने डॉ. के सुधाकर ने कहा- हमें हमारे नेता येदियुरप्पा पर विश्वास था और इसलिए हम आए। येदियुरप्पा के पद छोड़ने पर पूर्व कांग्रेसी और कृषि मंत्री बीसी पाटील का कहना था कि ‘हमें इस्तीफा क्यों देना चाहिए? क्या हुआ? बिना किसी कारण के इस्तीफा कौन देगा? हमें इस्तीफा क्यों देना चाहिए? अब जबकि पुराना मंत्रिमंडल भंग होकर नए की प्रक्रिया जारी है ऐसे में नई सरकार में भी उनका मंत्री पद बचता है या नहीं यह देखने वाली बात होगी। विधानसभा में लगभग रोते हुए अश्रुपूर्ण भावना के साथ येदियुरप्पा ने अपने पद से इस्तीफा की घोषणा की थी। कर्नाटक के मजबूत लिंगायत समुदाय से आनेवाले येदियुरप्पा लगातार अप्रत्यक्ष रूप से अपना कद ऊंचा दिखाने की कोशिश भी कर रहे थे और समर्थन बटोर रहे थे। अब पार्टी संगठन को मजबूत कर अगले चुनाव में भाजपा को एक बार फिर जीत दिलाने के उनके बयान का अर्थ यह लगाया जा रहा है कि उनकी नजर प्रदेश पार्टी अध्यक्ष पद पर है, जिसे फिलहाल नलिन कटील संभाल रहे हैं। इसके साथ-साथ येदियुरप्पा चाहते हैं कि नए मंत्रिमंडल में उनके बेटे बिजेंद्रा को जगह दी जाए।
‘सरकार’ के चुनाव पर भाजपा का वार
पश्चिम बंगाल में खाली राज्यसभा सीट पर आगामी ९ अगस्त को चुनाव होना है और भाजपा ने इस चुनाव के बहाने पार्टी छोडकर तृणमूल में शामिल हुए मुकुल राय पर हल्ला बोलने की तैयारी की है। तृणमूल कांग्रेस ने प्रसार भारती के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी और पूर्व आईएएस जवाहर सरकार को राज्‍यसभा भेजने का फैसला किया है। जवाहर सरकार ने कुछ समय तक प्रसार भारती के सीईओ के रूप में काम किया था। इस संबंध में तृणमूल कांग्रेस ने ट्वीट किया कि हमें संसद के उच्‍च सदन में जवाहर सरकार को मनोनीत करते हुए काफी खुशी हो रही है। जवाहर सरकार ने ४२ साल तक सार्वजनिक सेवा की और प्रसार भारती के पूर्व सीईओ भी रहे। चुनाव आयोग ने शुक्रवार को घोषणा की थी कि तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद दिनेश त्रिवेदी की ओर से खाली की गई राज्यसभा सीट पर नौ अगस्‍त को उपचुनाव कराए जाएंगे। दिनेश त्रिवेदी ने फरवरी में राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद भाजपा का हाथ थाम लिया था। जवाहर सरकार का राज्‍यसभा सांसद बनना लगभग तय है। फिर भी भाजपा ने चुनाव में अपना उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। यह अलग बात है कि राज्य के पार्टी अध्यक्ष दिलीप घोष ने औपचारिक घोषणा से परहेज किया। तकनीकी रूप से मुकुल राय अभी भी भाजपा विधायक हैं। राज्यसभा सदस्य का चुनाव करने के लिए विधायक खुला मतदान करते हैं। भाजपा नेताओं का मानना है कि राय तृणमूल द्वारा नामित जवाहर सरकार को वोट देंगे। जैसा कि एक विधायक को पार्टी के अधिकृत एजेंट को अपना मत दिखाना होता है, यह संदेह से परे स्थापित हो जाएगा कि मुकुलदा तृणमूल में शामिल हो गए हैं। यह भाजपा के मुकुल राय के खिलाफ दलबदल विरोधी मामले को मजबूत करेगा। राय के दलबदल के बाद से राज्य के भाजपा उनकी विधायकी रद्द कराने के लिए बेताब हैं। भाजपा के नंदीग्राम विधायक और बंगाल में विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी तो इस मुद्दे पर अदालत जाने की फिराक में हैं। बंगाल विधानसभा की लोक लेखा समिति के अध्यक्ष के रूप में ममता ने राय को भाजपा सदस्य बताते हुए उनकी ताजपोशी की थी तभी से भाजपा भिन्नाई हुई है। आम तौर पर यह पद विपक्ष के सदस्य को दिया जाता है। भाजपा का मानना है कि मुकुल राय तृणमूल उम्मीदवार को ही वोट देंगे। हालांकि, विधानसभा शिष्टाचार के जानकारों का मानना है कि अगर राय विवाद से बचना चाहते हैं तो वे अपना वोट डालने से पूरी तरह परहेज कर सकते हैं।
साहनी नाराज
बिहार के पशुपालन मंत्री मुकेश साहनी उत्तर प्रदेश के वाराणसी में अपने साथ हुए शासकीय शिष्टाचार से बहुत खफा हैं। इसलिए उन्होंने नीतीश कुमार के नेतृत्‍व वाली राजग सरकार की बैठक का बहिष्कार किया है। विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के नेता मुकेश सहनी के साथ उत्तर प्रदेश में उनके साथ जो ‘व्‍यवहार’ हुआ उसे लेकर बैठक का बायकॉट किया है। बैठक में नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री ताराकिशोर प्रसाद मौजूद थे। वीआईपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश सहनी की नाराजगी, नीतीश की सरकार में प्रमुख सहयोगी भारतीय जनता पार्टी से है। क्योंकि उन्हें फूलन देवी को लेकर आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश जाने नहीं दिया गया था। उप्र पुलिस ने एयरपोर्ट पर ही सहनी को रोक दिया था। इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सहनी ने कहा कि ऐसी घटनाएं भाजपा सरकार के ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ के नारे पर सवाल खड़ा करती हैं। सरकार को समर्थन जारी रखने के बीच बहिष्कार की यह नई राजनीति है। मुकेश सहनी इससे पहले मई माह में भी नीतीश सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर चुके हैं जब उन्‍होंने पप्‍पू यादव की गिरफ्तारी मामले में राज्‍य सरकार से अलग राय जताते हुए ट्वीट करके कहा था, जनता की सेवा ही धर्म होना चाहिए। पप्‍पू यादव को गिरफ्तार करना असंवेदनशीलता है।’ पूर्व सांसद और जन अधिकार पार्टी (जाप) के अध्यक्ष राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को सरकारी काम में बाधा डालने और लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
जुगाड़ आविष्कार
कहते हैं कि आवश्यकता आविष्कार की जननी है। इन दिनों सुरसा के मुंह की तरह र्इंधन की कीमतों में हर दिन बढ़ोतरी हो रही है। लोग परिवहन के एक वैकल्पिक और अधिक किफायती साधन के लिए बेताब हैं। हमारे देश में मेधा और जुगाड़ एक-दूसरे के पूरक हैं। तमिलनाडु के विल्लुपुरम के ३३ वर्षीय एस भास्करन ने महंगे होते यात्रा खर्च को समझा और एक इलेक्ट्रिक साइकिल तैयार की है जो सिर्फ एक यूनटि करंट के साथ ५० किमी तक की यात्रा कर सकती है। इसे बनाने में उन्हें केवल २०,००० रुपए का खर्च आया। विल्लुपुरम के पाकामेडु गांव के निवासी भास्करन मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा धारक हैं। पिछले साल महामारी के कारण उन्हें अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी और कृषि पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। अपने खाली घंटों के दौरान, भास्करन ने इलेक्ट्रिक साइकिल पर शोध किया और २,००० रुपए में एक पुरानी साइकिल खरीदी, जिसे उन्होंने ई-साइकिल में बदल दिया। उन्हें केवल १८,००० रुपए के स्पेयर पार्ट्स की जरूरत थी। अपने नए प्रवर्तन पर भास्करन का कहना है कि साइकिल एक विद्युत मोटर, बैटरी, नियंत्रक और ब्रेक कट ऑफ स्विच से सुसज्जित है। बैटरी को एक यूनिट तक चार्ज किया जा सकता है और यह इसे ५० किमी की रेंज देता है। स्पीड ३० किमी प्रति घंटा होगी। एक बार बैटरी बंद हो जाने के बाद, इसे साइकिल चलाकर भी रिचार्ज किया जा सकता है। यह साइकिल आम लोगों के लिए वरदान साबित होगी। भास्करन अपनी इस इलेक्ट्रिक साइकिल का पेटेंट कराने के लिए प्रयास कर रहे हैं। उनका सपना अपने आविष्कारों और शोध से कमाई करना है। इसके अलावा वे विकलांग व्यक्तियों के लिए एक किफायती इलेक्ट्रिक व्हीलचेयर बनाने की भी कोशिश कर रहे हैं।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और देश की कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनके स्तंभ प्रकाशित होते हैं।)