मुख्यपृष्ठस्तंभझांकी: जदयू का बड़ा खेल

झांकी: जदयू का बड़ा खेल

अजय भट्टाचार्य/मुंबई। आज बिहार की राजनीति खासकर राजद में बड़ा धमाका होने जा रहा है। जदयू ने बड़ा खेल करते हुए राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के छोटे बेटे इंजीनियर अजीत सिंह को अपने पाले में कर लिया है और आज १२ अप्रैल को जदयू प्रदेश कार्यालय में विधिवत तरीके से इंजीनियर अजीत सिंह जदयू की सदस्यता ग्रहण करेंगे। खुद अजीत सिंह ने मीडिया से कहा है कि १२ अप्रैल को वे जदयू की सदस्यता ग्रहण करेंगे। पिता जगदानंद सिंह के राजद में रहने के कारण अजीत एक कार्यकर्ता के रूप में जुड़े थे। बकौल, अजीत राजद भी समाजवादी सोच की पार्टी है और जदयू भी। राजद में सीखने को अब बहुत कुछ नहीं है। नीतीश कुमार ने जिस ढंग से पिछले १५ साल शासन चलाया है, उसके बाद ऐसा लगता है कि उनके साथ सीखने का ज्यादा मौका मिलेगा। यही कारण है कि राजद छोड़कर वे जदयू के पाले में जा रहे हैं। पैâसले से परिवार की टूट की बात पर अजीत सिंह का दावा है कि परिवार में कोई टूट नहीं होगी। वैसे, अजीत के बड़े भाई सुधाकर सिंह जो अभी राजद के विधायक हैं, वे कभी भाजपा में थे। मतलब जगदा बाबू परिवार की राजनीति एक तरफ और परिवार एक तरफ।
जुलूस के बहाने राजनीति
रामनवमी पर बंगाल में बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद, हिंदू जागरण मंच समेत कई संगठनों की ओर से जुलुस निकाले गए हैं। घोषित तौर पर भाजपा का कोई पृथक कार्यक्रम आज नहीं रखा गया लेकिन पार्टी के सभी नेता अपने-अपने इलाकों में जुलूसों में शामिल हुए। प्रदेश नेतृत्व की ओर से ऐसा ही निर्देश भाजपा नेताओं को दिया गया। पार्टी के सांसदों व विधायकों को भी रामनवमी के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कहा गया। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष भी खड़गपुर में ऐसे ही कार्यक्रम में शामिल थे। उन्होंने कहा कि वे जिस रैली में शामिल होंगे, उसमें हथियार भी होगा। अपने चिर-परिचित अंदाज में दिलीप घोष ने सवाल किया, ‘राम के नाम पर होनेवाली रैली में हाथों में अस्त्र नहीं तो क्या लड्डू रहेगा? हर साल ही खड़गपुर में धूमधाम से रामनवमी का पालन किया जाता है, इस बार भी होगा। हिंदू शक्ति के उपासक होते हैं। सभी देवी-देवताओं के हाथों में अस्त्र होता है। भगवान राम भी योद्धा थे।’
कांग्रेस का खेला
बिहार विधान चुनाव में कांग्रेस ने भले ही बड़ी जीत हासिल न की हो मगर पांच सीटों पर राजद और दो सीटों पर जदयू का खेल भी बिगाड़ दिया। कांग्रेस की दमदार मौजूदगी के कारण कटिहार, दरभंगा, सीतामढ़ी, पूर्णिया और गोपालगंज में राजद का खेल बिगड़ गया। खाली हाथ चुनाव में उतरी कांग्रेस ने पूर्व के चुनाव की अपेक्षा शानदार प्रदर्शन किया है। पश्चिम चंपारण में हार के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार अफाक अहमद ने शानदार प्रदर्शन किया। पार्टी ने यहां अपनी ताकत का एहसास कराया और कांग्रेस छोड़ जदयू में गए राजेश राम को तीसरे नंबर पर भेजने में पार्टी सफल रही। इस सीट पर कांग्रेस को मुसलमानों के साथ-साथ ब्राह्मणों का भी समर्थन मिला। यही कारण है कि राजद जीत गई और जदयू तीसरे नंबर पर चली गई। पूर्वी चंपारण की सीट जिस पर निर्दलीय उम्मीदवार माहेश्वर सिंह ने जीत दर्ज कराई, उसे भी कांग्रेस अपने-अपने कोटे की सीट ही मानती है। माहेश्वर सिंह का चुनाव प्रचार करने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा और राज्यसभा सदस्य अखिलेश सिंह गए थे।
पूर्व का भूत
नेतागीरी और चमकेशी में एक समानता है कि नाम के आगे पद जरूर जुड़ा होना चाहिए। वर्तमान नहीं तो भूतकाल का भूत बेताल की तरह इस तरह के चमकेशों के कंधे पर सवार नहीं होता है, बल्कि वे खुद इस बेताल को अतीत की डाल से उतार कर अपने ऊपर लाद लेते हैं। भूतपूर्व विधायक, सांसद, मंत्री, संतरी से लेकर अफसर और प्रत्याशी तक इस भूत को पूर्व से निकाल अपने वर्तमान से चिपका लेते हैं। इन दिनों एक तस्वीर अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसे देखकर आप हैरान भी होंगे और अपनी हंसी को रोक भी नहीं पाएंगे। तस्वीर को आईपीएस अधिकारी रुपिन शर्मा ने अपने ट्विटर पर साझा करते हुए मजेदार वैâप्शन भी दिया है। फोटो में लाल रंग की एक पुरानी कार ( नं. आर एन एच ८१८२) नजर आ रही है, जिसमें आगे नंबर प्लेट भी है। काफी पुरानी इस कार की खास बात इसकी नंबर प्लेट में झलकती है। कार की नंबर प्लेट पर लिखा है, भूतपूर्व कक्षानायक और अग्रेंजी में लिखा है एक्स क्लास मॉनिटर!

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