" /> झांकी….कहीं निगाहें, कहीं निशाना!

झांकी….कहीं निगाहें, कहीं निशाना!

सोमवार को विशेष सत्र बुलाकर उत्तर प्रदेश विधानसभा उपाध्यक्ष चुनाव में भाजपा समर्थित उम्मीदवार के तौर पर नरेश अग्रवाल के बेटे नितिन अग्रवाल को जितवाकर पार्टी ने वैश्य समाज को लुभाने की सियासी चाल चल दी है। वैसे परंपरा रही है कि विपक्ष को यह पद मिलता है लेकिन नितिन अग्रवाल सपा के विधायक हैं और भाजपा में शामिल हो चुके हैं। नितिन अग्रवाल की जीत भाजपा द्वारा समर्थित सपा उम्मीदवार के रूप में हुई। लंबे समय तक सपा में रहे नितिन अग्रवाल के पिता नरेश अग्रवाल दो साल से भाजपा में हैं मगर उन्हें कोई बड़ी कुर्सी भाजपा ने नहीं दी है। चुनावों से ऐन पहले नितिन अग्रवाल को विस उपाध्यक्ष बनाए जाने के पीछे का मकसद भी अग्रवाल समुदाय को खुश करना है। बंगाल में यही प्रयोग ममता बनर्जी ने मुकुल रॉय को सार्वजनिक लेखा समिति का अध्यक्ष बनाकर किया है। मुकुल भाजपा विधायक हैं मगर तृणमूल में शामिल हो चुके हैं। अब भाजपा मुकुल के खिलाफ अभियान छेड़े हुए हैं।
आशीर्वाद पर विवाद
खड़दह में ३० अक्टूबर को उपचुनाव होगा और इसके लिए तृणमूल व भाजपा के उम्मीदवार पूरे जोर-शोर से प्रचार में लगे हुए हैं। इस क्रम में भाजपा उम्मीदवार जय साहा प्रचार करने के दौरान दिवंगत तृणमूल विधायक काजल सिन्हा के घर पहुंच गए। उन्होंने काजल सिन्हा की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और दिवंगत की पत्नी नंदिता सिन्हा से जीत का आशीर्वाद भी लिया। इस आशीर्वाद से खड़दह में राजनीतिक चर्चाओं का माहौल गर्म हो चुका है। वहीं इस सौजन्य मुलाकात को तृणमूल स्वाभाविक तौर पर नहीं ले रही है। तृणमूल नेतृत्व की ओर से कहा गया कि है सौजन्य भेंट की जा सकती है और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद देने में भी कोई बुराई नहीं है। मगर जीत का आशीर्वाद देना ही अपने आप में कई सवाल खड़े कर गया है। खड़दह सीट से राज्य के मंत्री शोभन देव चट्टोपाध्याय तृणमूल की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं जबकि भाजपा ने अपने भूमिपुत्र और युवा नेता जय साहा पर विश्वास करते हुए उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया है।
सपा का सियासी चौका
भले भाजपा ने नितिन अग्रवाल के जरिये वैश्य समाज को अहमियत नहीं दिए जाने को लेकर उठती आवाज शांत कर ली हो मगर सपा ने भी नरेंद्र वर्मा की हार से भी राजनीतिक चौका लगाने की कोशिश की है। सपा के पिछड़े कुर्मी उम्मीदवार का असर भी करीब १२ जिलों में पड़ेगा। सपा ने गैर यादव पिछड़ों के वोट बैंक को संदेश दिया है कि भाजपा उनके खिलाफ है। सबको मालूम है यह विपक्ष का पद होता है। ऐसे में यादव वोट बैंक के ठप्पे को हटाते हुए नरेंद्र वर्मा को उम्मीदवार उतारकर सपा ने भी बढ़त बना ली है। जातिगत आधार पर देखें तो उप्र के १६ जिलों में कुर्मी और पटेल वोट बैंक छह से १२ फीसदी तक है। इनमें मिर्जापुर, सोनभद्र, बरेली, उन्नाव, जालौन, फतेहपुर, प्रतापगढ़, कौशांबी, प्रयागराज, सीतापुर, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, बस्ती और संत कबीर नगर जिले प्रमुख हैं। बेनी प्रसाद वर्मा के रहते सपा के पास कुर्मी वोटरों में असर रखने वाला बड़ा चेहरा था, लेकिन उसके बाद से ये वोट बैंक सपा से खिसक गया, जिसको सपा जोड़ने में जुटी है।
प्यार में बिजली गुल
कहते हैं प्यार अंधा होता है मगर बिहार में पूर्णिया जिले के गनेशपुर डहरिया आदिवासी टोला में प्यार के कारण अक्सर अंधेरा हो जाता था। हर २-३ दिन में गांव की बिजली २-३ घंटे के लिए गायब हो जाया करती थी, जबकि इसके आसपास गांवों में बिजली रहती थी। बिजली कटने की वजह जब लोगों को पता चली तो सभी हैरान रह गए। परोरा गांव के बिजली मिस्त्री सुरेंद्र राय का जमाई टोला की एक युवती से इलू-इलू वाला रिश्ता था। उसे जब भी प्रेमिका से मिलना होता वह गांव की बिजली काटकर अंधेरे में रंगरेलियां मना लेता। इस बात की भनक युवती के पड़ोसी को लग गई। फिर जैसे ही गांव की बिजली कटी गांववालों ने दोनों को रंगे हाथ पकड़ने की योजना बनाई। बिजली कटने पर युवती भी अपने आशिक का सिग्नल मिलते ही तैयार थी। जैसे ही बिजली मिस्त्री युवती के घर में घुसा ग्रामीणों ने रंगे हाथ दोनों को पकड़ लिया। फिर दोनों के सिर मुंडवाकर और जूता-चप्पल पहनाकर गांव में शोभा यात्रा निकाल दी, ताकि इसके बाद कोई गांव में इस तरह की गलती न करे। बाद में गांव के राम मुर्मू के निर्देश पर दोनों की आदिवासी रीति-रिवाज से शादी कर प्रेमी के घर परोरा भेज दिया गया। इधर दूसरी लड़की के घर पहुंचने पर आशिक के घर अलग से बवाल खड़ा हो गया क्योंकि प्रेमी पहले से शादीशुदा था।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और देश की कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनके स्तंभ प्रकाशित होते हैं।