" /> झांकी…बाबुल का सुवेंदु पर निशाना

झांकी…बाबुल का सुवेंदु पर निशाना

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने परसों लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा सौंपने के साथ ही सुवेंदु अधिकारी को आईना भी दिखा दिया। हाल ही में बाबुल सुप्रियो ने भाजपा का साथ छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया था। लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद सुप्रियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार प्रकट करते हुए कहा कि मेरा दिल भारी है क्योंकि मैंने अपना राजनीतिक सफर भाजपा के साथ शुरू किया था। राजनाथ सिंह ने मुझ पर भरोसा किया। भाजपा में कई नेता बाहर से आए हैं। सुवेंदु अधिकारी कुछ महीने पहले तृणमूल कांग्रेस में थे। उनके भाई और पिता तृणमूल के सांसद पद से इस्तीफा दें। उनको नैतिक तौर पर तृणमूल से सांसद बने रहना शोभा नहीं देता है। सुवेंदु के पिता शिशिर अधिकारी कांथी से तृणमूल के टिकट पर लोकसभा सांसद हैं, जबकि उनके भाई दिव्येंदु तुमलुक से तृणमूल की टिकट पर जीतकर लोकसभा पहुंचे हैं।
गद्दारों की तलाश
विधानसभा उपाध्यक्ष चुनाव निपट जाने के बाद भाजपा में उन १४ विधायकों की तलाश तेज हो गई है, जिन्होंने इस चुनाव में क्रॉस वोटिंग की। बसपा और कांग्रेस ने वोटिंग का बहिष्कार किया था फिर भी कांग्रेस की रायबरेली सदर की विधायक अदिति सिंह ने मतदान में हिस्सा लिया था। कुल पड़े ३६४ वैध मतों में भाजपा समर्थित प्रत्याशी को ३०४ मत मिले, जबकि सदन में भाजपा व सहयोगियों की कुल मत संख्या ३१८ (भाजपा ३०४, अपना दल ९, सपा बागी ३, कांग्रेस बागी १, निषाद पार्टी १) है। मतलब सत्ताधारी खेमे के १४ वोट सपा उम्मीदवार को मिले हैं, जबकि सपा के ४६ विधायक हैं। लेकिन सपा उम्मीदवार को ६० मत मिले। अब भाजपा की खुफिया मशीनरी पार्टी के इन १४ गद्दारों का सुराग ढूंढने में जुटी है।
कांग्रेस का यादवी दांव
बिहार की दो सीटों के लिए हो रहे उपचुनाव में कांग्रेस ने राजद से गठबंधन टूटने के बाद यादव समाज में अपनी पैठ को मजबूत करने के लिए दोनों सीटों पर दो यादव नेताओं को अहम जिम्मेदारी दी है। पूर्व सांसद रंजीत रंजन को कुशेश्वरस्थान और चंदन यादव को तारापुर में पार्टी ने पर्यवेक्षक के तौर पर तैनात किया है। चंदन यादव राहुल गांधी की टीम के कोर मेंबर माने जाते हैं। कांग्रेस की इस रणनीति के बाद जानकारों का मानना है कि इस उपचुनाव में कांग्रेस अब लड़ाई के मूड में आती दिख रही है। पिछले दिनों कांग्रेस की ओर से जारी स्टार प्रचारकों की सूची में यादव जाति के किसी नेता का नाम न होने पर विपक्ष ने मसला उठाया था। पर्यवेक्षकों की तैनाती से उन तमाम सवालों को भी जबाव दिया गया है। यादव वोट बैंक में सेंधमारी को लेकर कांग्रेस चूकना नहीं चाहती है। इधर तेजप्रताप द्वारा कांग्रेस के पक्ष में प्रचार करने की घोषणा से भी पार्टी गदगद है।
निशाने पर कैप्टन
पंजाब में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का दायरा बढ़ाने के केंद्र सरकार के पैâसले पर कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री वैâप्टन अमरिंदर सिंह को निशाने पर लिया है। वैâबिनेट मंत्री परगट सिंह ने तो सीधा हमला करते हुए कहा है कि वैâप्टन साहब क्या साबित करना चाहते हैं? मैं तो पहले ही कहता था कि वे भाजपा के साथ हैं। परगट का कहना है कि बीएसएफ के जरिए भाजपा आधे पंजाब पर नियंत्रण करना चाहती है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने अमरिंदर पर परोक्ष हमला बोला कि विफलताओं को छिपाने और नेताओं और सरकारों द्वारा बनाई गई गंदगी को साफ करने के लिए बीएसएफ का उपयोग करना बहुत खतरनाक है। इसे अमरिंदर सिंह से बेहतर कोई नहीं जानता। ध्यान रहे वैâप्टन ने केंद्र के इस पैâसले का स्वागत किया है। मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी और उपमुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह रंधावा इसे राज्य के अधिकारों पर अतिक्रमण कह चुके हैं।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और देश की कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनके स्तंभ प्रकाशित होते हैं।