मुख्यपृष्ठस्तंभझांकी : गडकरी नोट

झांकी : गडकरी नोट

अजय भट्टाचार्य।
केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी अपनी बेबाक वाग्शैली के लिए जाने जाते हैं। साथ ही उनकी छवि एक सख्त लक्ष्य पूरा करने वाले नेता की भी है। वे अपने अधीन किसी भी परियोजना की समय सीमा का पालन करना पसंद करते हैं। वे जब बोलते हैं तो कभी-कभी पार्टी लाइन से हटकर भी बोल देते हैं, जिससे पार्टी और सरकार को बचाव की मुद्रा में आना पड़ता है। नागपुर मुख्यालय के चहेते हैं, लिहाजा भाजपा की छीछालेदर मंडली भी उन पर कीचड़ उछालने की हिम्मत नहीं कर पाती। पिछले सप्ताह सड़क परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करने के लिए वे गुजरात में थे। उन्होंने सड़कों, पुलों और लॉजिस्टिक पार्कों के निर्माण के लिए गुजरात को १२,६०० करोड़ रुपए आवंटित करने की घोषणा की। राज्य सरकार ने उनके दौरे को एक सामान्य घटना मानकर मीडिया को नहीं बुलाया या शायद यह खतरा था कि कहीं गडकरी मीडिया से कुछ ऐसा न बोल दें, जिससे गुजरात के सूबेदार या दिल्लीशाही का मजाक बने। जब समीक्षा बैठक हो गई तब आश्चर्यजनक रूप से मुख्यमंत्री और अन्य अधिकारियों के साथ उनकी बैठक के बारे में रात १० बजे के बाद प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई। आनन-फानन में कुछ पत्रकार बैठक स्थल पर पहुंच गए। जब एक पत्रकार ने उन्हें एक परियोजना पर घेरने की कोशिश की, तो गडकरी ने आत्मविश्वास से जवाब दिया, `आप एक कलम और कागज लें और परियोजना की समय सीमा नोट करें। उन्हें शेड्यूल के मुताबिक पूरा किया जाएगा। यदि देर हो, तो आकर मुझसे मिल लेना।’ सवाल यह है कि क्या २०२२ में देश के हर नागरिक को घर देने का वादा करने वाले नेताजी कोई समय सीमा बता सकते हैं?

सबसे भारी बाबा
‘बावा बहुत कन्फ्यूजन है रे..! अक्खा मुलुक में बाबा लोग का बोंबाबोंब चल रहेला है। कभी वो योगवाला बाबा बोलता था कि मैं मूर्ति पूजा नहीं करता, आज वो बाबा भी बोल रहला है कि धर्म को बचाना मांगता। अभी मेरे को अक्खा इंडिया बोले तो भारत, आर्यावर्त, हिंदूराष्ट्र, हिंदुस्थान में कहीं नहीं दिख रहेला कि कोई राक्षस-वाक्षस टाइप का आदमी लोग यज्ञ, हवन, घंटा, आरती को रोक रहा हो। भिडू फिर वो डिजाइनर ड्रेस पहनने वाला बाबा अइसा काय को बोलता कि सनातन धर्म पे हमला हो रहेला है। क्या वोइच सनातन धर्म है?’
‘ना रे बाबा अइसा नहीं। वो क्या है कि नागपुर में वो अंधश्रद्धा वाला गैंग भाई के पीछे पड़ गया। इसके लिए बाबा बोला धर्म पर हमला कर रहेले भाई लोग!’
‘फिर वो बाबा अइसा क्यों बोल रहेला कि देश को हिंदू राष्ट्र बनाने का, ये काम तो दूसरा कंपनी कर रहेला था न!’
‘अरे उसका भी रीजन है रे, दूसरा कंपनी को अभी कर्नाटक, एमपी, राजस्थान वगेरे के चुनाव में जुटना है।’
‘अच्छा एक बात बताएंगा क्या?’
‘अभी बहुत सारा बाबा लोग है कोई झाड़ वाला बाबा है, कोई नारियल वाला। नींबू वाला बाबा है तो डेरा वाला बाबा भी है जो जब चाहे जेल से बाहर आ जाता है टहलने के वास्ते। लोटन वाला बाबा और कंबल वाला बाबा। भाई इनमें सबसे भारी वाला बाबा कोण है रे भाई!
‘अरे जान दे बाबा..! काय कू मेरा मुंह खुलवाएगा? तूने उसका नाम ही नहीं लिया अभी तक।’
‘अइसा कोन है भाई जिसका नाम अपुन भूल गया? सभी खुद को भारी बोलते.. बोलो ना भाई, सबसे भारी मने सबसे बड़ा बाबा कोन?’
‘जुमलेश्वर स्वामी गुफा वाले बाबा।’
‘आईला अपुन उसको तो भूल ही गया था।’

२० करोड़ का कुत्ता
बेल्लारी में श्वान (कुत्ता) उत्सव चल रहा है, जिसमें देश के सबसे महंगे कुत्ते को देखने के लिए हजारों लोग उमड़ रहे हैं। कोकेशियन शेफर्ड प्रजाति के इस कुत्ते की कीमत लगभग २० करोड़ रुपए है। बंगलुरू निवासी सतीश इस कुत्ते के मालिक हैं। कैडबॉम हैदर नाम का यह कुत्ता १४ महीने का है और हिंदुस्थान में दुर्लभ नस्ल का है। हाल ही में हैदराबाद के एक व्यवसायी ने कुत्ते के लिए २० करोड़ रुपए देने की पेशकश की थी। मौजूदा समय में यह देश का सबसे महंगा कुत्ता है। इसके रखरखाव पर हर दिन करीब २,००० रुपए खर्च होते हैं। इससे पहले उनके पास लगभग एक करोड़ रुपए का कोरियाई डोसा मास्टिफ और ८ करोड़ रुपए का अलास्का मैलाम्यूट था। सतीश के पास दो कोकेशियान शेफर्ड पिल्ले भी हैं, प्रत्येक को ५ करोड़ रुपए में बेचने की बोली लग चुकी है। जिला प्रशासन ने सतीश से उत्सव में भाग लेने का अनुरोध किया था। समापन समारोह में विभिन्न श्रेणियों में सर्वश्रेष्ठ तीन कुत्तों को पुरस्कार दिया जाएगा। डॉग शो में ५५ नस्लों के कुत्तों ने भाग लिया।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और देश की कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनके स्तंभ प्रकाशित होते हैं।

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