मुख्यपृष्ठस्तंभझांकी : येदी को नहीं चाहिए नाम

झांकी : येदी को नहीं चाहिए नाम

अजय भट्टाचार्य। कहते हैं कि नाम में क्या रखा है, इसलिए ही कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता बीएस येदियुरप्पा ने वह शिवमोगा में बन रहे हवाईअड्डे का नाम अपने नाम की बजाय राज्य के किसी प्रख्यात व्यक्ति पर रखने का सुझाव दिया है। मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने बीते बुधवार को शिवमोगा के सोगने में हवाई अड्डे के निर्माण कार्य का निरीक्षण करने के बाद इसका नाम पूर्व मुख्यमंत्री के नाम पर रखने का एलान किया था। अब येदियुरप्पा ने इस संबंध में बोम्मई को संबोधित एक ट्वीट में कहा है कि मैं मुख्यमंत्री के शिवमोगा हवाई अड्डे का नाम मेरे नाम पर रखने के पैâसले से अभिभूत हूं। मैं पूरी विनम्रता के साथ सरकार से अनुरोध करता हूं कि कर्नाटक के किसी भी प्रख्यात व्यक्तित्व के नाम पर हवाईअड्डे का नाम रखा जाए, जो उनके योगदान के लिए एक उचित श्रद्धांजलि होगी। हवाई अड्डे का नाम येदियुरप्पा के नाम पर रखने के सरकार के पैâसले का कुछ विरोध हुआ था, जिसमें विपक्षी नेताओं सहित कुछ लोगों ने इशारा किया था कि जिले की कई प्रमुख हस्तियां सम्मान की पात्र हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं वाले इस हवाई अड्डे का उद्घाटन इस साल दिसंबर में होने की उम्मीद है।

इफ्तार का सार
राबड़ी देवी के घर शुक्रवार को हुई इफ्तार पार्टी में शामिल होकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कुछ दिन के लिए भाजपा के बड़बोलों को शांत कर दिया है। संदेश यह गया कि विकल्प मौजूद है। बाकी की कसर तेजप्रताप यादव ने यह कहकर पूरी कर दी कि उनकी नीतीश कुमार से सीक्रेट बातचीत हुई है, बिहार में खेला होगा, हम सरकार बनाएंगे। पांच साल बाद नीतीश कुमार भी राबड़ी आवास पहुंचे थे। नीतीश कुमार से क्या सीक्रेट बात हुई है, यह तेजप्रताप ही जानें। लेकिन इफ्तार पार्टी में उन्होंने नीतीश कुमार के ठीक बगल में अपनी जगह बना ली और अंत तक बैठे रहे। वह टू सीटेड सोफा था। तेजस्वी उसके बाद बैठे। ज्यादातर समय तेजस्वी खड़े दिखे। इस बीच लालू प्रसाद की सांसद बेटी मीसा भारती ने नीतीश कुमार के पास जाकर उनसे देर तक बातचीत की।

कमीशन दो, अनुदान लो!
जब धर्म का पूरा ठेका ले ही लिया है तो धर्म के काम में कमीशनखोरी भी धर्म ही कहा जाएगा। ठेकेदार खुदकुशी मामले में पूर्व मंत्री केएस ईश्‍वरप्‍पा पर लगे आरोपों के बाद कर्नाटक सरकार फिर निशाने पर है। शिरहट्टी तालुक के बालेहोसुर मठ के डिंगलेश्वर स्वामीजी का आरोप है कि यदि किसी स्वामी (संत) के लिए अनुदान स्वीकृत किया जाता है तो यह ३० प्रतिशत कटौती के बाद मठ में पहुंच पाता है। यह सीधा सच है। अधिकारी आपको स्पष्ट रूप से बताते हैं कि जब तक राशि नहीं काटी जाएगी, तब तक आपकी परियोजना शुरू नहीं होगी। संत ने आरोप लगाया कि राज्य में कोई भी सरकारी काम ठीक से नहीं हो रहा है। ३० प्रतिशत कमीशन देने संबंधी दयनीय स्थिति है। ३० प्रतिशत भुगतान के बाद ही काम शुरू होता है। कई ठेकेदारों ने अपना काम बंद कर दिया है। केवल बातचीत हो रही है लेकिन कोई विकास नहीं हो रहा है। कई विधायक काम शुरू करने से पहले दर तय करते हैं।
बेटी के मंडप में बाप की शादी
बेटी के लिए जो मंडप तैयार हुआ था, वहां पहले पिता की शादी हुई। इस शख्स की पहले ही दो शादियां हो चुकी हैं और उसकी चार संतानें भी हैं। बिहार के गढ़वा जिले के डंडई थाना क्षेत्र स्थित लवाही कला गांव के ५६ वर्षीय शिव प्रसाद वैद्य को अपनी ही छात्रा से प्रेम हो गया। तीन साल पहले एक दिन लड़की घर से लापता हो गई। उसके पिता ने ट्यूटर शिव प्रसाद वैद्य पर संदेह जताते हुए स्थानीय थाने में शिकायत की लेकिन तब पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। बीते सोमवार को किसी ने घरवालों को जानकारी दी कि लड़की छत्तीसगढ़ के एक गांव में है। शिव प्रसाद ने उसे वहां किराए के मकान में रखा है। लड़की के घरवालों ने गांव-समाज और पुलिस को इसकी सूचना दी। शिव प्रसाद ने पूछताछ में सच कबूल लिया। शिव प्रसाद ने यह भी बताया कि लड़की उसके एक बच्चे की मां भी बन चुकी है। इसके बाद लड़की को छत्तीसगढ़ से लाया गया। फिर इलाके के बाबा मगरदह महादेव मंदिर में दोनों की शादी कर दी गई।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और देश की कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनके स्तंभ प्रकाशित होते हैं।)

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