मुख्यपृष्ठस्तंभझांकी : पटेल के साथ खेल

झांकी : पटेल के साथ खेल

अजय भट्टाचार्य।  क्या हार्दिक पटेल के साथ खेला हो गया है? यह सवाल वीरमगाम के राजनीतिक पंडितों को परेशान कर रहा है। गुजरात में भाजपा ने हाल में उसके खेमे में शामिल हुए युवा पाटीदार नेता हार्दिक पटेल को कांग्रेस से वीरमगाम विधानसभा सीट छीनने के लिए मैदान में उतारा है। इस सीट को जाति की राजनीति से ऊपर माना जाता है क्योंकि अल्पसंख्यक समुदाय समेत विभिन्न जातियों व धर्मों के नेता इस सीट की नुमाइंदगी कर चुके हैं। हार्दिक अमदाबाद के वीरमगाम तालुका के चंद्रनगर गांव के रहने वाले हैं। पहला विधानसभा चुनाव लड़ रहे पटेल का मुख्य मुकाबला निवर्तमान कांग्रेस विधायक लाखाभाई भारवाड़ से होगा, जिन्होंने २०१७ के विधानसभा चुनाव में भाजपा की तेजश्री पटेल को ६,५०० से अधिक मतों के अंतर से पटखनी दी थी। वीरमगाम सीट पर पिछले १० वर्षों से कांग्रेस का कब्जा है। दिलचस्प बात यह है कि २०१२ के विधानसभा चुनावों में तेजश्री पटेल ने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था और भाजपा के प्रागजी पटेल को १६,००० से अधिक मतों के अंतर से शिकस्त दी थी। कांग्रेस विधायक के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने विधानसभा के अंदर और बाहर दोनों जगह सत्तारूढ़ भाजपा की तीखी आलोचना करके अपनी छाप छोड़ी थीr।

बागी बिगाड़े गणित
गुजरात में एक दर्जन सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार भाजपा का गणित पूरी तरह बदल सकते हैं। इनमें से कई राजनेता भाजपा की पार्टी लाइन तोड़कर निर्दलीय के रूप में चुनाव मैदान में हैं। ऐसे सात भाजपा नेताओं को पार्टी लाइन का पालन नहीं करने पर निलंबित कर दिया गया है। इनमें नर्मदा जिले की नंदोद सीट से नामांकन दाखिल करनेवाले हर्षद वसावा, जूनागढ़ के केशोद से अरविंद लदानी, सुरेंद्रनगर के ध्रांगधरा से छत्रसिंह गुंजारिया, वलसाड के पारदी से केतन पटेल, राजकोट ग्रामीण से भरत चावड़ा, गिर के वेरावल से उदय शाह शामिल हैं। अमरेली जिले के राजुला से सोमनाथ और करम बरैया निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा ने अभी तक दूसरे चरण के लिए नामांकन पत्र दाखिल करनेवाले उम्मीदवारों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है। वडोदरा की वाघोड़िया सीट पर निवर्तमान भाजपा विधायक मधु श्रीवास्तव अब निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। इसी जिले से पादरा सीट भी भाजपा के लिए असुरक्षित साबित हो रही है क्योंकि इसके नेता और डेयरी राजनीति के प्रमुख नेता दिनेश पटेल उर्फ दीनू मामा निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा के पूर्व नेता मावजी देसाई बनासकांठा के धनेरा से बतौर निर्दलीय ताल ठोक रहे हैं। महिसागर जिले के लुनावाड़ा में भी भाजपा उम्मीदवार जिग्नेश सेवक के खिलाफ दो बागी जिलाध्यक्ष जेपी पटेल और शकन खांठावे ने निर्दलीय के रूप डटे हुए हैं।

नाम ने कुत्ता बना दिया
कहते हैं कि नाम में क्या रखा है? लेकिन नाम में अगर कुछ न होता तो आदमी कुत्ता क्यों बनता? यह नाम की ही महिमा है कि अच्छा खासा मनुष्य योनि का प्राणी कुत्ता बनकर भौंकने के लिए मजबूर है। सत्यप्रकाश अंगारा ने अपने ट्वीटर पर ४६ सेकेंड का एक वीडियो साझा किया है, जिसमें एक व्यक्ति राशन कार्ड में नाम गलत अंकित किए जाने के विरोध में कुत्ता बनकर अपना विरोध दर्ज करा रहा है। अब आप भी सोच में पड़ गए होंगे कि आखिर कोई भी व्यक्ति सड़क पर इस तरह की हरकत क्यों करेगा? ये मामला जरा हटकर है। इस शख्स के राशन कार्ड में गलत नाम छपकर आ गया। इस शख्स का नाम दत्ता था लेकिन गलती से इसकी जगह कुत्ता लिखा गया। ‘द’ शब्द की जगह ‘क’ आने से अर्थ का अनर्थ ही हो गया। यही वजह थी कि शख्स भड़क गया और अफसरों के सामने कुत्तों की तरह भौंकने लगा। महज ४६ सेकेंड के इस वीडियो को देखकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इस शख्स की हालत पर हंसते नजर आए तो कुछ ने इस गलती के लिए संबंधित अधिकारियों से माफी मांगने की बात कही।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और देश की कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनके स्तंभ प्रकाशित होते हैं।

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